CSS: प्रमोशन में पिछड़ी सरकार की 'रीढ़', केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों को क्यों लगानी पड़ी PMO से गुहार?
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
केंद्र सरकार की 'रीढ़' कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के हजारों अधिकारी चौथे कैडर रिव्यू का इंतजार कर रहे हैं। वजह, इन अधिकारियों की पदोन्नति व्यवस्था में कई तरह की खामियां हैं। इन्हें तय समय पर पदोन्नति नहीं मिल पाती। साल 2022 में सीएसएस के चौथे कैडर रिव्यू के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) ने समय रहते अपने सुझाव कमेटी को दे दिए थे। इसके बावजूद अभी तक कैडर रिव्यू नहीं हो सका इै। इसके चलते सीएसएस में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की पदोन्नति में अनावश्यक देरी हो रही है। अंडर सेक्रेटरी को डिप्टी सेक्रेटरी के पद तक पहुंचने में 13 साल लग रहे हैं। सीएसएस फोरम ने अब प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर कैडर समीक्षा रिपोर्ट को शीघ्र प्रस्तुत करने और उसे बिना किसी देरी के लागू करने का अनुरोध किया है।
रिपोर्ट तैयार है, मगर उसे पेश नहीं किया जा रहा
सीएसएस फोरम ने 18 जनवरी को प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्रा को यह पत्र भेजा है। सीएसएस फोरम के महासचिव, आशुतोष मिश्रा के मुताबिक, केंद्रीय सचिवालय सेवा के अंतर्गत नए पदों के सृजन में तेजी लाने के लिए पीएमओ को यह पत्र लिखा गया है। इसमें प्रमुख मांग, कैडर समीक्षा रिपोर्ट को शीघ्र प्रस्तुत करना और उसकी सिफारिश को अविलंब लागू कराना है। केंद्र सरकार ने 27 अक्तूबर, 2022 को बड़ी संख्या में नई विकासात्मक योजनाओं और परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त जनशक्ति की आवश्यकता का आंकलन करने के लिए एक समिति (कैडर समीक्षा समिति) का गठन किया था। सीएसएस फोरम ने अपने पत्र में कहा है कि सीआरसी ने दो तीन महीने बाद ही विभिन्न मंत्रालयों/विभागों से अतिरिक्त जनशक्ति की आवश्यकता की मांग की थी। अधिकांश विभागों ने 2023 की पहली छमाही में अपनी आवश्यकता भेज दी थी। जानकारी के अनुसार, वह रिपोर्ट तैयार है, मगर उसे प्रस्तुत नहीं किया जा रहा। कैडर समीक्षा समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में नए पद सृजित किए जाने की राह प्रशस्त होगी। इससे सैकड़ों सीएसएस अधिकारियों की पदोन्नति की राह खुलेगी। साथ ही देश में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सीएसएस फोरम ने अविलंब दे दिए थे सुझाव
सीएसएस फोरम के महासचिव आशुतोष मिश्रा के अनुसार, अक्तूबर 2022 में सीएसएस के चौथे कैडर रिव्यू के लिए कमेटी गठित की गई थी। इसमें डीओपीटी के एस्टेब्लिशमेंट अधिकारी एवं अतिरिक्त सचिव को कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था। डीओपीटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी 'सीएस' तथा व्यय विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी 'पर्स', इस कमेटी के सदस्य और डीओपीटी के डिप्टी सेक्रेटरी 'सीएस1' को मेंबर सेक्रेटरी बनाया गया। इसके बाद कमेटी ने सीएसएस फोरम से सुझाव मांगे थे। फोरम के पदाधिकारियों ने कमेटी को जनवरी 2023 में ही अपना प्रतिवेदन सौंप दिया था। इतना ही नहीं, फोरम ने डीओपीटी मंत्री और दूसरे शीर्ष अधिकारियों को समय-समय पर जल्द कैडर रिव्यू कराने का आग्रह भी किया है। इन सबके बाद भी कमेटी की रिपोर्ट नहीं आई। हर मोर्चे पर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले लगभग 12000 सीएसएस अधिकारी अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सीएसएस, केंद्र सरकार में रीढ़ की तरह कार्य करती है। पीएमओ के निर्देशन में, अनेक नई योजनाएं तैयार हो रही हैं। उन्हें जमीन पर उतारने की रणनीति तैयार करना और उनके मूल्यांकन जैसा अहम कार्य, सीएसएस के अधिकारी पूरी तन्मयता के साथ पूरा करते हैं। केंद्र सरकार में इस तालमेल और योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की रफ्तार में कोई कमी न आए, इसके लिए सीएसएस कैडर रिव्यू रिपोर्ट को जारी कर उसे लागू किया जाए।
26 साल की सेवा के बाद नहीं बन सके डायरेक्टर
मौजूदा समय में लगभग 1200 अंडर सेक्रेटरी ऐसे हैं, जो डिप्टी सेक्रेटरी बनने की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में ये अधिकारी लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह से 100 डिप्टी सेक्रेटरी ऐसे हैं, जिन्होंने डायरेक्टर बनने के सभी पड़ाव पार कर लिए हैं। खास बात है कि ये सभी अधिकारी 1997 से राजपत्रित ओहदे पर कार्यरत हैं। डीओपीटी के नियमानुसार, इन्हें 18 साल की सेवा के बाद ही डायरेक्टर बन जाना चाहिए थे, लेकिन 26 साल की सेवा के बाद भी इन्हें अभी तक वह पद नहीं मिल सका है। ऐसे ही कई अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। दूसरे पदों पर भी कुछ ऐसा ही हाल है। सीएसएस फोरम द्वारा लंबे समय तक किए गए आंदोलन के बाद गत वर्ष 'एएसओ' को सेक्शन अफसर की पदोन्नति मिली थी। पिछले साल जून में डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की घोषणा के बाद सीएसएस के करीब 1600 'एएसओ' को अनुभाग अधिकारी यानी 'एसओ' की एडहॉक पदोन्नति दी गई थी। सीएसएस फोरम को इस मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगानी पड़ी थी। सैंकड़ों सीएसएस अधिकारियों ने नॉर्थ ब्लॉक के भीतर और बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था।