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एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अब आत्मनिर्भर बनेगा देश, सीएसआईआर-एनएएल और एनआरडीसी करेगा मदद
Thu, 20 Aug 2020 02:28 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 20 Aug 2020 02:28 AM IST
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ब्रह्मोस मिसाइल
- फोटो : Brahmos Aerospace
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एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में स्टार्टअप उद्योगों को बढ़ावा देने का फैसला केंद्र सरकार ने किया है। आत्मनिर्भर भारत योजना को अगले स्तर पर लेकर जाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के तहत काम करने वाले नेशनल रिसर्च डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनआरडीसी) ने सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरी (एनएएल) के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है।
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इसके लिए सीएसआईआर-एनएएल और एनआरडीसी ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। अभी तक देश केवल कलपुर्जों और मूलभूत ढांचे पर थोड़ा बहुत काम करता था।
एनआरडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ पुरुषोत्तम ने कहा है इससे अब पूरी तरह से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र के उद्योगों को विकसित करने के लिए दोनों संस्थान मिलकर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की इस पहल के तहत इस क्षेत्र में स्टार्टअप कंपनियों को इन्क्यूबेशन के साथ-साथ उत्पाद एवं प्रोटोटाइप विकसित करने और उसे वैधता दिलाने के लिए जरूरी सलाह और सहायता उपलब्ध कराएंगे।
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डॉ पुरुषोत्तम बताया कि दोनों संस्थानों की इस साझेदारी से सीएसआईआर की अन्य घटक प्रयोगशालाओं में भी इनोवेशन/इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के रास्ते खुल सकते हैं।
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