Railways: 'हादसे का कारण समय से चूक का पता नहीं लगना'; 18 माह पहले ट्रेन बेपटरी होने की जांच पर आई CRS रिपोर्ट
भारतीय रेलवे ने स्वीकार किया है कि ट्रेन परिचालन में खामियों का समय पर पता नहीं लगा पाना अक्तूबर, 2023 में हुए हादसे का अहम कारण है। तत्कालीन रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) सुवोमय मित्रा ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में कहा है कि पटरी में खामियों का समय पर पता नहीं लगा पाने के कारण 11 अक्तूबर, 2023 को बिहार के रघुनाथपुर स्टेशन पर नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। बता दें कि इस हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी।
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बिहार के बक्सर में 18 महीने पहले हुई रेल दुर्घटना पर तत्कालीन रेलवे सुरक्षा आयुक्त (पूर्वी सर्किल) सुवोमय मित्रा ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने स्वीकार किया है कि पटरी में खामियों का समय पर पता नहीं लगा पाने के कारण 11 अक्तूबर, 2023 को पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल में नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। मित्रा ने अपनी रिपोर्ट में रघुनाथपुर स्टेशन पर हुए हादसे को लेकर कहा है कि रेलवे के निर्माण में शामिल विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए कड़ी निगरानी की जानी चाहिए। मित्रा ने कहा, पटरियों की स्थिति की वास्तविक समय पर निगरानी हो सके, रेलवे इन संभावनाओं पर विचार कर सकता है। यह बिंदु रेलवे बोर्ड को हाल ही में सौंपी गई सिफारिशों में एक है।
ट्रैक प्रबंधन प्रणाली (TMS) के कई मॉड्यूल काम कर रहे हैं
रेलवे ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में कहा है कि इस्पात निर्माण और रेल रोलिंग की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए रेलवे और सेल / भिलाई के रेल विनिर्माण संयंत्र द्वारा निरंतर सुधार और उन्नयन किया जा रहा है। रिपोर्ट में रेल के रासायनिक और धातुकर्म गुणों में सुधार के लिए उठाए गए कई कदमों का उल्लेख किया गया है। रेलवे ट्रैक की स्थिति की उचित निगरानी के संबंध में मित्रा ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ट्रैक प्रबंधन प्रणाली (TMS) में विभिन्न मॉड्यूल काम कर रहे हैं।
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सभी स्तरों पर नियमित निगरानी होती है
रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ट्रैक प्रबंधन में रेल और वेल्ड के यूएसएफडी (अल्ट्रासॉनिक फ्लॉ डिटेक्शन) परीक्षण की निगरानी भी शामिल है। इसके तहत यूएसएफडी ऑपरेटर नियमित रुप से टीएमएस पर दैनिक यूएसएफडी परीक्षण के दौरान रेल और वेल्ड के यूएसएफडी परीक्षण डेटा फीड करते हैं। जरूरी रखरखाव के लिए इन यूएसएफडी परीक्षण आंकड़ों से संबंधित सभी स्तरों पर नियमित निगरानी की जाती है।
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रेलवे में टूटी हुई पटरियों का पता लगाने के लिए तीन प्रौद्योगिकियों का परीक्षण
पटरियों की स्थिति की वास्तविक समय पर निगरानी के लिए सीआरएस की चिंता का समाधान करते हुए रेलवे ने कहा, विभिन्न क्षेत्रीय रेलवे में टूटी हुई पटरियों का पता लगाने वाली प्रणालियों के लिए तीन प्रौद्योगिकियों का परीक्षण चल रहा है। सुवोमय मित्रा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पूर्वोत्तर में कंटीन्यूअस ब्रोकन रेल डिटेक्शन सिस्टम (NGRT) सिस्टम का ट्रायल चल रहा है। उत्तर मध्य रेलवे में एकॉस्टिक डोमेन टेक्नोलॉजी रेल एकॉस्टिक का परीक्षण चल रहा है। उत्तर मध्य रेलवे में ही वाइब्रेशन एनर्जी आधारित ब्रोकन रेल डिटेक्शन सिस्टम का ट्रायल भी चल रहा है। सीआरएस ने आगे सिफारिश की है कि रेलवे पटरी में दरारों की पहचान के लिए रेलवे के पास उचित तंत्र उपलब्ध होना चाहिए।
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