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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   CRPF: orders of headquarters are being flouted in the sexual abuse case in the 187th battalion of force

CRPF: यौन शोषण में फंसे कमांडेंट का जलवा बरकरार, आदेशों की उड़ी धज्जियां, गवाहों को नहीं छोड़ रहे आरोपी 'अफसर'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 25 Oct 2022 07:03 PM IST
सार

CRPF: सीआरपीएफ की 187वीं बटालियन के कमांडेंट सुरेंद्र सिंह राणा को यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें दो दिन पहले ही जमानत मिली है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 509, 354ए और 354डी के तहत केस दर्ज किया था। सीआरपीएफ ने इस मामले की विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं...

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CRPF: orders of headquarters are being flouted in the sexual abuse case in the 187th battalion of force
crpf - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की 187वीं बटालियन में सामने आया 'यौन शोषण' का मामला गर्माता जा रहा है। बल मुख्यालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि उधमपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद सप्ताह भर की जमानत पर आए कमांडेंट सुरेंद्र राणा का जलवा बरकरार है। भले ही उन्हें 137 वीं बटालियन में अटैच किया गया है, लेकिन 187वीं बटालियन में उनका रौब देखा जा सकता है। कहने को तो दूसरी बटालियन में हैं, मगर आवास व स्टाफ, सब पुराना ही है। यौन शोषण एवं मानसिक प्रताड़ना देने के आरोपी कमांडेंट ने, आठ से दस लोग अपने साथ रखे हुए हैं। इनमें ड्राइवर, गार्ड, सिग्नल कर्मी, कुक व अन्य कर्मी शामिल हैं। ये सभी लोग इस केस में अहम गवाह हैं।

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सूत्रों ने बताया कि एक तरफ तो उक्त आरोपी अफसर इन लोगों को अपने साथ रखे हुए है और दूसरा दबाव डालकर इनकी हाजिरी 187वीं बटालियन में ही दिखाई जा रही है। पीड़िता सहायक कमांडेंट को मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है। उनके पास केस के संबंध में दर्जनों अज्ञात फोन कॉल आ रही हैं।

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उधमपुर पुलिस ने किया था कमांडेंट को गिरफ्तार

सीआरपीएफ की 187वीं बटालियन के कमांडेंट सुरेंद्र सिंह राणा को यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें दो दिन पहले ही जमानत मिली है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 509, 354ए और 354डी के तहत केस दर्ज किया था। सीआरपीएफ ने इस मामले की विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं। आईजी सोनल मिश्रा की अध्यक्षता में दो सदस्यीय दल, इस केस की जांच कर रहा है। उधर, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने महिला शिकायतकर्ता सहायक कमांडेंट से इस मामले को लेकर पूछताछ की है। सीआरपीएफ की 187वीं बटालियन, जिसके कई अफसर जम्मू सेक्टर में 'आरओपी' जेल सिक्योरिटी जैसी अहम ड्यूटी का निर्वहन करते रहे हैं। कई माह पहले यह केस शुरू हुआ था। एक अधिकारी के मुताबिक, बल मुख्यालय को इस केस से जुड़ी हर जानकारी मुहैया कराई गई थी। उसके बावजूद केस में उस तरह से कार्रवाई नहीं हो सकी, जिससे पीड़िता महिला अधिकारी को समय रहते न्याय मिल पाता।

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बैक डेट में उपस्थिति लगवाने का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, उधमपुर में 187वीं बटालियन के सीओ सुरेंद्र राणा पर कई तरह के आरोप लग रहे हैं। पुलिस थाने से वापस लौटने के बाद उन्होंने यूनिट के मंदिर में पूजा की थी। वहां चुनिंदा लोगों को बुलाया गया। केस दर्ज होने के बाद उन्हें 137वीं बटालियन में अटैच किया गया, लेकिन उनका कथित हस्तक्षेप 187वीं बटालियन में जारी रहा। वे बिल्कुल उसी तरह से कार्य करते रहे, जैसे उन्हीं के पास वहां का चार्ज हो। उन्होंने अपने पास जो स्टाफ रखा, वह भी 187वीं बटालियन का है। सिग्नल का कामकाज देखने वाला एक कर्मी लंबे समय से उनके साथ हैं। कमांडेंट के पास मौजूद आठ से दस कर्मियों के इस स्टाफ में से अधिकांश कर्मी इस केस में गवाह हैं। इसके बावजूद उन्हें नहीं छोड़ा जा रहा। इन कर्मियों की बैक डेट में उपस्थिति लगवाने के लिए संबंधित अधिकारी पर दबाव डाला जा रहा है। जब संबंधित अधिकारी इसके लिए ना नुकर करते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि व्हाट्सएप पर आदेश भेज दिया जाएगा। 187वीं बटालियन से जुड़े कई लोगों के लिए फेवरेबल आदेश जारी हो रहे हैं।   

दूर तक जा रहीं यौन शोषण मामले की कड़ियां

सूत्रों ने बताया कि ये केवल यौन शोषण का मामला नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार से भी जुड़ा है। शुरुआत तो भ्रष्टाचार के मामले दबाने को लेकर ही हुई थी। पुलिस एवं सीआरपीएफ को बताया गया है कि 187वीं बटालियन में लंबे समय से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। इस बटालियन में चार अफसर खेल कोटे से पदोन्नति पाए हैं। इनके अलावा जूनियर स्टाफ में भी कई कर्मी खेल कोटे से हैं। कमांडेंट सुरेंद्र सिंह, डिप्टी कमांडेंट सरोज सिहाग और उनके पति सहायक कमांडेंट सतीश सिहाग व राजेश्वरी 'एसी' खेल कोटे से यहां तक पहुंचे हैं। विभागीय पत्राचार में यह सामने आया था कि इनमें कई अधिकारी हरियाणा से आते हैं। वहां क्षेत्रवाद फैलाया जा रहा था। जवानों के खाने की गुणवत्ता को लेकर जब मामला उछला तो उसे दबाने का प्रयास किया गया। इसके अलावा गाड़ियों के रखरखाव के दौरान भी कथित भ्रष्टचार की बात सामने आई थी। गुमनाम पत्रों में भी कई गंभीर आरोप लगे थे। वहां तैनात डिप्टी कमांडेंट सरोज सिहाग और उनके पति सहायक कमांडेंट सतीश सिहाग का नाम भी उस पत्र में लिखा गया था। ये दोनों अफसर विभागीय जांच का सामना कर रहे थे। इन पर आरोप लगा था कि ये अपनी बटालियन में क्षेत्रवाद फैला रहे हैं। कमांडेंट सुरेंद्र राणा भी इनके प्रति सॉफ्ट रवैया रखते हैं। इन सबकी गतिविधियां, यूनिट का माहौल बिगाड़ रही थी।

सीओ व तीन अन्य अफसरों को बाहर भेज दिया गया

बटालियन का माहौल खराब होने से रोकने के लिए सतीश सिहाग, सरोज सिहाग और महिला शिकायतकर्ता का तबादला, जम्मू सेक्टर से बाहर करने की सिफारिश की गई। हालांकि किन्हीं कारणवश इनका तबादला नहीं हो सका। सीओ सुरेंद्र सिंह का तबादला 187वीं बटालियन से झारखंड सेक्टर दफ्तर में हुआ था, लेकिन उन्होंने कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया। उधमपुर पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि इस केस की जांच की जा रही है। शिकायतकर्ता से पूछताछ कर बयान लिए जा रहे हैं। गवाहों को भी बुलाया जाएगा। बल के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि जब इस तरह के केस मुख्यालय की नजर में होते हैं, तो उनकी तेजी से निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। खासतौर से उन मामलों में, जहां शिकायतकर्ता महिला होती हैं। बल के अनुशासन के लिए ये बहुत जरूरी है।

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