फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CRPF Doctors Taking Election Duty in Bengal Lightly Why Did the Medical Directorate Have to Issue a Reprimand

CRPF: बंगाल चुनाव में ड्यूटी को हल्के में ले रहे सीआरपीएफ के डॉक्टर, मेडिकल निदेशालय को क्यों देनी पड़ी सीख

Mon, 13 Apr 2026 06:27 PM IST
Jitendra Bhardwaj Jitendra Bhardwaj
Updated Mon, 13 Apr 2026 06:27 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल चुनाव में 2500 से ज्यादा केंद्रीय बल तैनात हैं। सीआरपीएफ मेडिकल निदेशालय ने डॉक्टरों को चेताया कि वे संवेदनशील ड्यूटी से न बचें। अधिकारियों को जवानों के साथ रहकर चिकित्सा सेवा सुनिश्चित करने और पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए हैं।

विज्ञापन
CRPF Doctors Taking Election Duty in Bengal Lightly Why Did the Medical Directorate Have to Issue a Reprimand
CRPF - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 2500 से ज्यादा कंपनियां तैनात की गई हैं। राज्य में दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। सीएपीएफ के कंपनी कमांडर भी उसी लोकेशन पर ठहरे हैं, जहां उनकी कंपनी को तैनात किया गया है। इस बीच देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के मेडिकल निदेशालय ने उन डॉक्टरों को एक 'सीख' दी है, जिन्हें बंगाल के चुनाव में तैनात किया गया है। निदेशालय के नोटिस में यह बात आई है कि सीआरपीएफ के कई डॉक्टर, बंगाल चुनाव में 'ड्यूटी' को हल्के में ले रहे हैं। वे इससे बचना चाहते हैं। आईजी/डायरेक्टर 'मेडिकल' ने बल के चिकित्सकों से कहा है कि वे नेक कार्य वाले पेशे में हैं। उन्हें विपरित परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी से दूर नहीं भागना चाहिए। 

विज्ञापन

संवेदनशील चुनाव में मेडिकल अफसर अहम 

आईजी/डायरेक्टर 'मेडिकल' ने गत सप्ताह बल की विभिन्न फोरमेशन को भेजे अपने संदेश में कहा, बंगाल में चुनाव की संवेदनशीलता के मद्देनजर, मेडिकल अफसरों की ड्यूटी बहुत अहम है। उन्हें अपनी कंपनियों के साथ रहना चाहिए। ये बात ध्यान रखें कि चुनावी ड्यूटी में तैनात जवानों को मेडिकल सुविधा की कमी का सामना न करना पड़े। चुनावी ड्यूटी को लेकर डायरेक्टर मेडिकल ने डॉक्टरों के लिए सख्त हिदायतें जारी की हैं। इनमें कहा गया है कि अनेक मेडिकल अफसर संवदेनशील चुनावी ड्यूटी को लेकर गंभीर नहीं हैं। वे इस तरह की ड्यूटी से बचना चाहते हैं। भर्ती प्रक्रिया, चुनाव, आपातकालीन वायु निकासी, लड़ाई से घायल जवानों को निकालना और दूसरी तरह की गंभीर स्थितियों में ड्यूटी से बचना ठीक नहीं है। डॉक्टरों का इस तरह का व्यवहार, उनके 'लड़ाकू चिकित्सा अधिकारी' पेशे के सिद्धांतों के अनुरुप नहीं है। उन्हें इस तरह की किसी भी लापरवाही से बचना चाहिए। वे अपने कर्तव्य से भटकें नहीं। 

विज्ञापन

स्वास्थ्य सेवा, मानव जाति की महान सेवा 

आईजी/डायरेक्टर 'मेडिकल' ने अपने संदेश में कहा है कि स्वास्थ्य सेवा, मानव जाति की महान सेवा है। यह बल अपने हर अधिकारी से उम्मीद करता है कि वह अपनी फोर्स और उसके सभी कार्मिकों के साथ एक अटूट जुड़ाव रखता है। वह हर फ्रंट पर अपने बल के साथ मजबूती से खड़ा है। सभी मेडिकल अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपनी जिम्मेदारी के भाव को समझें। सख्त ड्यूटी से बचने के लिए कोई बहाना न तलाशें। आपातकाल या ऐसी परिस्थितियां, जिन्हें टालना संभव न हो, केवल तभी वे अपनी ड्यूटी से दूर हो सकते हैं। इन बातों के मद्देनजर, सभी मेडिकल अफसर बंगाल चुनाव में पेशेवर नैतिकता का ध्यान रखते हुए चुनावी ड्यूटी में शामिल हों। 

विज्ञापन
विज्ञापन

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed