नक्सलियों पर लगेगा अंकुश: सीआरपीएफ के डीजी जीपी सिंह का एलान, कहा- 2026 तक कर देंगे नक्सलवाद का सफाया
नक्सलवाद के पूरी तरह से खात्मे को लेकर सीआरपीएफ प्रमुख जीपी सिंह ने कहा कि नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2019 से यह अभियान तेज हुआ है और केंद्र-राज्य पुलिस मिलकर काम कर रही है।
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केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जीपी सिंह ने नक्सलवाद के पूरी तरह से खात्मे की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। साख बी उन्होंने 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की बात पर जोर देते हुए एलान किया है कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर देने का लक्ष्य तय किया गया है।
बता दें कि नक्सलियों के खिलाफ यह अभियान 2014 में शुरू हुआ था, लेकिन 2019 के बाद इसे और तेज और केंद्रित किया गया है। केंद्र और राज्य की पुलिस एक साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया किया जा सके। इसको लेकर जीपी सिंह ने कहा कि हम पूरी मजबूती और सख्ती से नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अमित शाह ने दिया नक्सल मुक्त भारत पर जोर
उधर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य पर जोर देते हुए सुरक्षा बलों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नक्सल मुक्त भारत के संकल्प में एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त करते हुए सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के विरुद्ध अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन में छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के कुर्रगुट्टालू पहाड़ (KGH) पर 31 कुख्यात नक्सलियों को मार गिराया।
उन्होंने कहा कि जिस पहाड़ पर कभी लाल आतंक का राज था, वहां आज शान से तिरंगा लहरा रहा है। इसके साथ ही शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोगी जी के नेतृत्व में हम नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए संकल्पित हैं। मैं देशवासियों को पुनः विश्वास दिलाता हूँ कि 31 मार्च 2026 तक भारत का नक्सलमुक्त होना तय है।
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नक्सलवाद के सफाई पर जोर
सीआरएफ प्रमुख ने आगे आकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 में जहां 35 जिले सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 6 रह गई है। उन्होंने कहा कि कुल नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2014 में 126 थी, जो अब घटकर 18 रह गई है। इसके साथ ही जीपी सिंह ने ये भी कहा कि 2014 में नक्सली हिंसा की 1,080 घटनाएं हुई थीं, जबकि 2024 में यह घटकर 374 रह गईं।
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नक्सलियों का बढ़ा आत्मसमर्पण
गौरतलब है कि 2014 में 287 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 19 हो गई। वहीं 2014 से अब तक 2,089 नक्सली मारे गए हैं। इसके साथ ही 2024 में 928 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। 2025 में अब तक 718 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।