क्रॉस वोटिंग की आशंका ने उड़ाई दिग्गजों की नींद, राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुआ रोचक
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आगामी 11 जून को राज्यसभा की 58 सीटों पर होने वाले चुनाव में क्रॉस वोटिंग की बढ़ती आशंका ने कई दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। उत्तर प्रदेश में महिला उद्योगपति प्रीति महापात्रा की बतौर निर्दलीय उम्मीदवार बनने से कांग्रेस में हलचल है। इस सूबे में अगर बसपा, रालोद के विधायकों ने क्रॉ वोटिंग का सहारा लिया तो कांग्रेस प्रत्याशी कपिल सिब्बल की जीत पर पेंच फंस सकता है।
हरियाणा में अंत समय में इनेलो के रुख में आए परिवर्तन ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा की परेशानी बढ़ा दी है। अगर दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार अधिवक्ता आरके आनंद के समर्थन में इनेलो और कांग्रेस ने हाथ मिला लिए तो चंद्रा की जीत पर ग्रहण लग सकता है। कुछ यही स्थिति झारखंड में है, जहां भाजपा को दूसरी सीट हासिल करने के लिए अन्य दलों के सहयोग की जरूरत है। चुनाव से पूर्व सभी दल उत्तर प्रदेश, हरियाणा और झारखंड में क्रॉस वोटिंग की संभावना से सहमे हुए हैं।
सबसे दिलचस्प तस्वीर उत्तर प्रदेश की
इनमें सबसे दिलचस्प तस्वीर उत्तर प्रदेश की है। यहां की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए बतौर निर्दलीय महापात्रा ने पर्चा दाखिल कर मुख्य रूप से कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। महापात्रा जीत के लिए जरूरी 34 विधायकों का समर्थन तभी जुटा सकती हैं। वह अन्य दलों में सेंध लगा सकती हैं। उन्हें भाजपा के बाकी बचे 7 विधायकों का समर्थन मिलना तय है। ऐसे में शेष 27 विधायकों के लिए उनकी निगाहें अन्य दलों के विधायकों पर होगी। खास बात यह है कि अपने 7 उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए सपा को भी 4 विधायकों की जरूरत है।
जाहिर तौर पर सपा भी संख्या बल जुटाने में लगी है। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को भी 6 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है। ऐसे में जीत हासिल करने के लिए सबकी निगाहें रालोद के 9 और बसपा के 12 अतिरिक्त विधायकों के इतर इन्हीं दलों में बड़ी सेंध लगाने पर होगी।
हरियाणा में एक बार तो भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा की जीत सुनिश्चित लग रही थी। मगर ऐन मौके पर इनेलो के हाथ खींच लेने और दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार आनंद के समर्थन में खड़ा हो जाने से बाजी पलटती दिख रही है। अगर आनंद इनेलो के साथ कांग्रेस का समर्थन हासिल करने में कामयाब रही तो चंद्रा की जीत की राह में रोड़ा आना तय है। ऐसे में इनेलो के 19 और कांग्रेस के 17 विधायकों की बदौलत आनंद जीत के लिए जरूरी 30 विधायकों से अधिक विधायक जुटाने में कामयाब हो जाएंगे।