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SC: 'आपराधिक कार्यवाही का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं, आरोपी को न्याय के कटघरे में लाना', शीर्ष अदालत की टिप्पणी

Thu, 29 Aug 2024 11:08 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 29 Aug 2024 11:08 PM IST
सार

आपराधिक विश्वासघात के एक मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही का उद्देश्य प्रतिशोध लेना नहीं, बल्कि आरोपी को न्याय के कटघरे में लाना है। इस मामले में न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और संजय करोल की पीठ ने सुनवाई की है।

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Criminal proceedings meant to bring wrongdoer to justice not to seek vendetta: SC
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि आपराधिक कार्यवाही का उद्देश्य गलत काम करने वाले को न्याय के कटघरे में लाना है, न कि बदला लेना या प्रतिशोध लेना है। बता दें कि न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और संजय करोल की पीठ ने आपराधिक विश्वासघात के एक मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें तेलंगाना के पडाला वीरभद्र राव नामक एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के पूर्व ससुराल वालों पर शादी के समय दिया गया 'स्त्रीधन' वापस न करने का आरोप लगाया था।
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स्त्रीधन एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल पैसे और संपत्ति समेत उपहारों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है, जो एक महिला को उसके माता-पिता, रिश्तेदारों या ससुराल वालों से मिलता है।
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महिला का  'स्त्रीधन' पर 'एकमात्र अधिकार'
पीठ ने कानून की स्थापित स्थिति को दोहराया कि एक महिला (पत्नी या पूर्व पत्नी) का 'स्त्रीधन' पर 'एकमात्र अधिकार' होता है। पडाला वीरभद्र राव की तरफ से अपनी बेटी के पूर्व ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज किए गए आपराधिक मामले के बारे में पीठ ने कहा, हम आगे यह भी कह सकते हैं कि आपराधिक कार्यवाही का उद्देश्य गलत काम करने वाले को न्याय के कटघरे में लाना है, और यह बदला लेने या उन लोगों के खिलाफ प्रतिशोध लेने का साधन नहीं है, जिनसे शिकायतकर्ता की दुश्मनी हो सकती है।
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अमेरिका में बेटी को किया गया प्रताड़ित- शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता का दावा था कि उन्होंने 1999 में शादी के समय सोने के गहने और अन्य सामान दिए थे और उसके बाद दंपति अमेरिका चले गए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में रहते हुए उनकी बेटी को प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उनकी पत्नी गंभीर रूप से परेशान हो गई और आखिरकार 6 जून, 2008 को उसकी मौत हो गई। राव ने अपनी शिकायत में कहा कि उनकी बेटी और दामाद का 16 साल की शादी के बाद 14 अगस्त, 2015 को अमेरिका में 2016 में तलाक हो गया।

2021 में दर्ज कराई गई एफआईआर
राव ने 2021 में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी बेटी को जो गहने उपहार में दिए थे, लेकिन शादी के समय उसके ससुराल वालों को सौंप दिए थे, उन्हें वापस नहीं किया गया। उनकी बेटी ने 2018 में दोबारा शादी कर ली। एफआईआर धारा 406 आईपीसी (आपराधिक विश्वासघात) के तहत दर्ज की गई थी।


'पिता और पति का स्त्रीधन पर कोई अधिकार नहीं'
पीठ की ओर से फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति करोल ने कहा, यह माना गया है कि पति को कोई अधिकार नहीं है, और फिर यह आवश्यक रूप से निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए कि पिता को भी कोई अधिकार नहीं है, जब बेटी जीवित, स्वस्थ और 'स्त्रीधन' की वसूली जैसे निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है।


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