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SC: बृंदा करात ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख, हिंदू संगठनों के नेताओं पर नफरत भरे भाषण देने का लगाया आरोप

Thu, 17 Aug 2023 07:28 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 17 Aug 2023 07:28 PM IST
सार

बृंदा करात ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे धार्मिक संगठनों के नेताओं द्वारा कथित तौर पर दिल्ली में नागलोई और घोंडा चौक सहित कुछ स्थानों पर सार्वजनिक बैठकों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लोगों को उकसाने वाले कुछ नफरत भरे भाषणों का जिक्र किया।

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CPIM leader Brinda Karat moves SC alleging hate speeches by leaders of Hindu outfits
सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता बृंदा करात ने हेट स्पीच को लेकर हिंदू संगठनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बृंदा करात ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से एक लंबित याचिका में हस्तक्षेप करने की मांग की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुसलमानों को मारने और उनके सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करने वाले "घोर नफरत भरे भाषण" विभिन्न राज्यों में रैलियों में दिए गए थे, इनमें हरियाणा भी शामिल है, जहां हाल ही में सांप्रदायिक झड़पों में छह लोगों की जान चली गई।

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सीपीआई (एम) नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद ने शीर्ष अदालत से अनुमति मांगी है कि उन्हें इस मुद्दे पर पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला द्वारा दायर लंबित याचिका में एक पक्ष के रूप में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी जाए। करात ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे धार्मिक संगठनों के नेताओं द्वारा कथित तौर पर दिल्ली में नागलोई और घोंडा चौक सहित कुछ स्थानों पर सार्वजनिक बैठकों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लोगों को उकसाने वाले कुछ नफरत भरे भाषणों का जिक्र किया।
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याचिका में कहा गया है, हाल ही में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि के नेताओं ने दिल्ली के विभिन्न स्थानों जैसे नागलोई, घोंडा चौक आदि में आयोजित सार्वजनिक बैठकों में हिंदू धर्म के नाम पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लोगों को उकसाया है। इसमें कहा गया, हिंदुत्व के नाम पर लोगों को संवैधानिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ भड़काया गया।
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इसमें कहा गया, ऐसी बैठकें राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में हो रही हैं और मुस्लिम समुदाय के आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार के लिए लगातार आह्वान किया जा रहा है। ये भाषण स्पष्ट रूप से आईपीसी की कई धाराओं के तहत अपराध हैं। आरोप लगाया है कि दुर्भाग्य से पुलिस द्वारा ऐसे लोगों के खिलाफ न तो कड़ी कार्रवाई की जा रही है और न ही ऐसी बैठकों को रोका जा रहा है।

11 अगस्त को शाहीन अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा था कि समुदायों के बीच सद्भाव और सौहार्द होना चाहिए। पीठ ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा हाल ही में नूंह में भड़के सांप्रदायिक दंगों के बाद दर्ज मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का विचार रखा था। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से निर्देश लेने और 18 अगस्त तक प्रस्तावित समिति के बारे में सूचित करने को कहा था।

शीर्ष अदालत ने पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला को वीडियो सहित सभी सामग्री एकत्र करने और 21 अक्टूबर, 2022 के फैसले के अनुपालन में प्रत्येक राज्य में नियुक्त नोडल अधिकारियों को सौंपने का भी निर्देश दिया था।

याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद नूंह में सांप्रदायिक झड़पों के बाद कई राज्यों में 27 से अधिक रैलियां आयोजित की गईं और नफरत भरे भाषण दिए गए।  दो अगस्त, 2023 को सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में 'समहस्त हिंदू समाज' द्वारा एक जुलूस को हरियाणा के हिसार में एक पड़ोस से गुजरते हुए देखा जा सकता है, जिसमें पुलिस अधिकारी मौजूद हैं और निवासियों और दुकानदारों को चेतावनी दे रहे हैं कि यदि वे दो दिन के बाद किसी भी मुस्लिम को काम पर रखेंगे तो उनकी दुकानों का बहिष्कार किया जाएगा।

याचिकाकर्ता ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पुलिस महानिदेशक और अन्य अधिकारियों को पर्याप्त कार्रवाई करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की है कि ऐसी रैलियों की अनुमति नहीं दी जाए।


शीर्ष अदालत ने अब्दुल्ला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह के बाद दो अगस्त को आदेश पारित किया था। जिसमें कहा गया था कि हरियाणा में हुई झड़पों को लेकर हिंदू दक्षिणपंथी समूहों- विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विभिन्न हिस्सों में 23 प्रदर्शनों की घोषणा की गई है। नूंह में पहली बार भड़की सांप्रदायिक झड़पों में दो होम गार्ड और एक मौलवी सहित छह लोग मारे गए थे, जब विश्व हिंदू परिषद के जुलूस पर भीड़ ने हमला किया था। सांप्रदायिक झड़पें बाद में गुरुग्राम और राष्ट्रीय राजधानी के करीब कुछ अन्य स्थानों तक फैल गईं।

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