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Parliamentary Sittings: भाकपा सांसद ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, संसदीय बैठकों की 'घटती' अवधि पर जताई चिंता

Tue, 04 Jul 2023 08:24 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 04 Jul 2023 08:24 PM IST
सार

Parliamentary Sittings: सांसद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुमत में लाने वाली 16वीं लोकसभा में केवल 331 बैठकें थीं, जिन्हें 17 सत्रों में विभाजित किया गया था।

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CPI MP draws PM Modi's attention towards 'declining' duration of parliamentary sittings
भाकपा के राज्यसभा सांसद बिनॉय विश्वम - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सांसद बिनॉय विश्वम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के मानसून सत्र की अवधि कम होने पर निराशा जताई है और आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकार में इस तरह की बैठकों की अवधि में भारी कमी आ रही है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी की घोषणा के अनुसार, मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 11 अगस्त को समाप्त होगा, जो कि प्रभावी रूप से केवल सत्रह दिनों के लिए होगा। 

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उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण रूप से बहुत कम है क्योंकि सरकार और सांसदों द्वारा इस पर तत्काल ध्यान देने की मांग करने वाले कई मुद्दे और कानून हैं। लोकतांत्रिक सोच रखने वाले लोगों और सांसदों द्वारा समान रूप से देखा जा रहा है कि संसद की बैठकों की अवधि काफी कम हो रही है जिससे हमारे लोकतांत्रिक संसदीय गणराज्य को नुकसान हो रहा है।'

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सांसद ने कहा कि पहली लोकसभा में 15 सत्रों में 677 बैठकें विभाजित थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुमत में लाने वाली 16वीं लोकसभा में केवल 331 बैठकें थीं, जिन्हें 17 सत्रों में विभाजित किया गया था। उन्होंने कहा, 'पहली लोकसभा के मुकाबले संसद सत्र की अवधि और बैठकों की संख्या आधी से अधिक हो गई है।
 

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उन्होंने कहा, 'पहली लोकसभा के लिए प्रति सत्र औसत बैठकें 45 दिन की थीं, लेकिन 16वीं लोकसभा के दौरान यह घटकर केवल 19 दिन रह गई। मौजूदा 17वीं लोकसभा में पहले ही पूरे पांच साल के लिए सबसे कम बैठक के दिन होने का अनुमान लगाया गया है और पिछले बजट सत्र तक केवल 230 बैठकें हुई थीं।' 
 

विश्वम ने यह भी दावा किया कि बैठक के दिनों के अलावा मोदी शासन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस की गुणवत्ता में भी गिरावट आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा ने 2021 के मानसून सत्र के दौरान एक घंटे से भी कम समय में पांच विधेयक पारित किए, कृषि कानूनों और श्रम संहिता जैसे महत्व के मुद्दों को अराजकता के बीच मंजूरी दे दी गई।

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