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पश्चिम बंगाल: माकपा का दावा टीएमसी गर्मी में बर्फ से भी तेजी से पिघल रही, कहा विपक्ष की भूमिका की उम्मीद

Sat, 23 May 2026 01:47 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Sat, 23 May 2026 01:47 PM IST
सार

माकपा ने दावा किया कि टीएमसी पश्चिम बंगाल में तेजी से कमजोर हो रही है और वाम दल जल्द भाजपा के मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। माकपा नेता मों सलीम ने टीएमसी पर पुलिस और गुंडों के सहारे राजनीति करने तथा भाजपा-आरएसएस को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। 

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CPI(M) TMC Is Melting Faster Than Ice in the Heat Expresses Hope for an Effective Opposition Role
माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस गर्मी में बर्फ से भी तेजी से पिघल रही है। माकपा को उम्मीद है कि वह टीएमसी से विपक्ष की जगह ले लेगी। माकपा के पश्चिम बंगाल महासचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि वाम दल, विशेष रूप से माकपा, राज्य में अपने वैचारिक विरोधियों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा का मुकाबला करने में पहले से ही सबसे आगे हैं।

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तृणमूल कांग्रेस पर लगाया आरोप 

सलीम ने कहा, अब, चूंकि तृणमूल कांग्रेस इस गर्मी में बर्फ से भी तेजी से पिघल रही है, इसलिए हमारा काम अब केवल सैद्धांतिक रूप से ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्राथमिक विपक्ष के रूप में काम करना है। सलीम ने दावा किया कि पार्टी और राज्य के लोग आशावान हैं। उन्हें उम्मीद है कि माकपा के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा तृणमूल कांग्रेस से राज्य में विपक्ष की जगह ले लेगा। 

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उन्होंने कहा कि टीएमसी की डेढ़ दशक से अधिक की रणनीति में पुलिस और गुंडों का इस्तेमाल शामिल था। इस रणनीति ने आरएसएस को भीतरी इलाकों में पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाईं। माकपा ने टीएमसी और भाजपा पर राजनीति में धर्म का उपयोग कर वाम दलों को दूर रखने का आरोप लगाया है। 

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वाम दलों की रणनीति और मुद्दे

माकपा नेता ने कहा कि वाम दलों और श्रमिक संघों ने पहले ही उन फेरीवालों के विस्थापन का मुद्दा उठाया है। इन फेरीवालों को राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से कई जगहों से बेदखल किया गया है। उन्होंने भाजपा पर सबसे गरीब लोगों की आजीविका पर हमला करने का आरोप लगाया। सलीम ने कहा कि माकपा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और पश्चिम बंगाल की संस्कृति तथा लोगों के बीच सौहार्द को किसी भी आसन्न खतरे जैसे मुद्दों के लिए लड़ेगी। 

चुनावी प्रदर्शन और गठबंधन

माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे ने, जिसने 1977 से 2011 तक पश्चिम बंगाल पर शासन किया था, 2021 के विधानसभा चुनावों में एक निर्वाचन क्षेत्र (मुर्शिदाबाद जिले में डोमकल) जीतकर अपने चुनावी सूखे को दूर किया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, माकपा ने इन चुनावों में सिर्फ 4.45 फीसदी वोट हासिल किए, जबकि वाम मोर्चे के अन्य घटक एक फीसदी वोट शेयर भी हासिल नहीं कर सके।

 2011 में वाम मोर्चे का वोट शेयर 39 फीसदी था, जिसमें माकपा का 30 फीसदी हिस्सा था। यह 2021 में माकपा के लिए गिरकर 4.73 फीसदी हो गया। 2021 के विधानसभा चुनावों में, वाम मोर्चे ने अखिल भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा (एआईएसएफ) और भाकपा (माले) लिबरेशन के साथ गठबंधन किया था। कांग्रेस ने सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा, जिसमें उसे दो सीटें मिलीं, जबकि एआईएसएफ ने भांगड़ निर्वाचन क्षेत्र बरकरार रखा। इन आंकड़ों के बावजूद, माकपा राज्य में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता फिर से स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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