गोवंश पकड़ने पहुंची पुलिस पर फायरिंग, एफआईआर
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काटने के लिए ले जा रहे गोवंशीय पशुओं को बरामद करने पहुंची पुलिस पर तस्करों ने फायरिंग कर दी। फायरिंग से पुलिस कर्मियों में भगदड़ मच गई। पुलिस वाले जीप के पीछे जा छिपे। इसी बीच पशु तस्कर फरार हो गए। पशु तस्करों के भागने पर पुलिस ने मौके से 41 पशु बरामद किये, जिसमें गोवंशीय पशु भी थे। नामजद सहित बीस अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है।
सिविल लाइंस पुलिस को मंगलवार की सुबह सूचना मिली थी कि कुछ लोग बड़ी संख्या में गोवंशीय पशुओं को काटने के लिए ताशका व कांशीराम कालोनी होते हुए घेर मर्दान खां पैदल ले जा रहे हैं। सूचना पर दरोगा बिक्रम सिंह सिपाहियों के साथ बरेली गेट के पास पहुंच गए। पुलिस ने चारों ओर से घेराबंदी करके पशुओं को ले जा रहे लोगों को पकड़ने की कोशिश की तो पशु तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
दरोगा व सिपाहियों ने जीप के पीछे छिपकर खुद को बचाया। इस बीच पशु तस्कर निकल भागे। फायरिंग की सूचना पर कई और थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई, हालांकि पशुओं को छोड़ कोई और हाथ नहीं लगा। बाद में पुलिस ने मौके से 41 पशु बरामद किए जिसमें गोवंशीय पशु भी थे। सिविल लाइंस प्रभारी अजय कुमार का कहना है कि पुलिस पर फायरिंग और पशु क्रूरता अधिनियम में एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिसिया कार्रवाई को बताया गलत
मंगलवार को कुरैशी बिरादरी की मीटिंग में सिविल लाइंस पुलिस पर अत्याचार करने का आरोप लगाया गया। कहा गया कि कमोरा पशु बाजार से 200 पशु खरीदकर कुछ लोग ला रहे थे। इनमें कोई भी पशु गोवंश का नहीं था।
सभी पशु 14 आयु वर्ष से अधिक के थे। कहा कि 14 आयु वर्ष से अधिक के पशुओं का कारोबार करने में सुप्रीम कोर्ट से भी अनुमति है। मीटिंग में मौजूद लोगों ने कहा कि पुलिस ने दौ सौ पशुओं में सौ पशु मौके पर ही लोगों को बांट दिए। पुलिस की यह कार्रवाई गलत है।
मीटिंग में हाजी मुकीम कुरैशी, हाजी माजिद , तौफीक, रईस खां, रेहान खां, जमशेद, महबूब आदि मौजूद रहे। इधर, सिविल लाइंस प्रभारी का कहना है कि मीटिंग करने वाले वह लोग हैं, जिन पर मुकदमा दर्ज हो रहा है।