कोरोना बुलेटिन: 83 जिलों में सिर्फ 0.73 फीसदी लोग प्रभावित, देश में सामुदायिक संक्रमण नहीं
कोरोना वायरस को लेकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आज गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मौजूदा स्थिति से अवगत कराया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल, आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव और नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने अहम जानकारियां दी। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस की सही स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए देश में सेरो सर्वे कराया गया। इस सर्वे में कई राहत देने वाली बातें सामने आई हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि भारत में निश्चित तौर पर कोरोना वायरस सामुदायिक स्तर पर संक्रमण के चरण में नहीं है। गुरुवार को कोविड-19 के 357 मरीजों की मौत हुई और संक्रमण के 9,996 मामले सामने आए। कोरोना वायरस संक्रमण से किसी एक दिन में होने वाली मौत का यह सर्वाधिक आंकड़ा है। इसके साथ ही, देश में कोविड-19 से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर 8,102 हो गई, जबकि संक्रमण के मामले बढ़ कर 2,86,579 हो गए हैं।
- देश में संक्रमण की स्थिति जानने के लिए यह सेरो सर्वे कराया गया।
- देशभर के कई जिलों में अप्रैल के अंत की स्थिति को लेकर यह सेरो सर्वे कराया गया।
- इसके मुताबिक देश में एक फीसदी से भी कम आबादी इस वायरस से प्रभावित हुई है।
- इसके अलावा अभी देश में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति नहीं है।
- हालांकि, बड़ी संख्या में आबादी के इसकी चपेट में आने को लेकर अब भी खतरा है।
- 83 जिलों में कराए गए इस सर्वे में पाया गया कि सिर्फ 0.73 फीसदी लोग ही इससे प्रभावित हुए हैं।
- ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों में (1.09 गुना) और शहरी झुग्गी बस्तियों में (1.89 गुना) खतरा अधिक है।
- पहले हिस्से में ‘सार्स-कोवी-2’ से संक्रमित सामान्य आबादी के हिस्से का अनुमान लगाया गया है।
- दूसरे हिस्से में आबादी के उस हिस्से को रखा गया है, जो कंटेनमेंट जोन या संक्रमण के अधिक मामलों वाले शहरों में सक्रमित हुए हैं।
- सर्वे का पहला हिस्सा पूरा हो गया है जबकि दूसरा जारी है। यह सर्वे आईसीएमआर ने राज्य स्वास्थ्य विभागों, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ समन्वय कर मार्च में शुरू किया था।
- अध्ययन में कुल 83 जिलों और 26,400 लोगों को शामिल किया गया। देश में 25 अप्रैल को कोविड-19 के सामने आये मामलों के आधार पर इन जिलों का चयन किया गया।
- देश में ठीक होने वाले मरीजों का प्रतिशत 49.21 है।
- भारत में कोरोना वायरस से मरने वालों की दर अन्य देशों की तुलना में काफी कम है।
- 15 मई को देश में मृत्यु दर 3.3 प्रतिशत थी। अब यह घटकर 2.8 फीसदी रह गई है।
- कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में लॉकडाउन कारगर साबित हुआ है।
- हालांकि हमें कोरोना वायरस को लेकर आगे भी सतर्कता बनाए रखना है।
- बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों के लिए जोखिम काफी ज्यादा है।
- आईसीएमआर ने कहा कि राज्यों को कोरोना के प्रति अपनी सतर्कता को कम नहीं करना चाहिए।
- हमारे पास एक दिन में दो लाख टेस्टिंग करने की क्षमता है: आईसीएमआर
- अभी वर्तमान में देश में करीब डेढ़ लाख टेस्टिंग हो रही है।
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि राज्यों से उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही मृतकों का डाटा तैयार किया जाता है।
- अगर राज्य एक या दो दिन में इन आंकड़ों में बदलाव करता है, तो अगले 2-3 दिन में इस नंबर में बदलाव हो जाता है।
क्या है सेरो सर्वे
- सामान्य लोगों के रक्त के नमूने लिए जाते हैं और इसे IgG एंटीबॉडीज के लिए टेस्ट किया जाता है।
- अगर कोई व्यक्ति IgG पॉजिटिव पाया जाता है, तो इसका मतलब यह हुआ कि वह पहले कोरोना वायरस से संक्रमित रह चुका है।