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हालात बिगड़े: अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे में हुई कोरोना से हर दूसरी मौत 

Wed, 14 Apr 2021 07:10 AM IST
Amit Mandal परीक्षित निर्भय , अमर उजाला
परीक्षित निर्भय , अमर उजाला Published by: Amit Mandal Updated Wed, 14 Apr 2021 07:10 AM IST
सार

  • केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार देश के अस्पतालों में भर्ती होने के 48 घंटे में ही मरीज की मौत हो रही है 

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Covid 19 deaths: every other death from corona occurred within 48 hours of hospitalization
कोरोना से मौत (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देश के अलग-अलग हिस्सों सोशल मीडिया पर श्मशान घाट व कब्रिस्तान की हालत दिखाने वाले वीडियो सामने आ रहे हैं। लेकिन इन मौतों के पीछे असल वजह राज्यों का पिछली घटनाओं से सबक नहीं लेना है। केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार देश के अस्पतालों में भर्ती होने के 48 घंटे में ही मरीज की मौत हो रही है। 
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कोरोना से हर दूसरी मौत 48 और तीसरी 72 घंटे में हो रही है। हालात इस कदर खराब होने लगे हैं कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मप्र, पंजाब सहित कई राज्यों के अस्पतालों में मरीज तब पहुंच रहे हैं जब उनकी सांसें उखड़ने लगती हैं। चिकित्सीय भाषा में इस स्थिति को काफी गंभीर माना जाता है जिसमें रोगी से फेफड़ों तक विषाणु पहुंच जाते हैं। 
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विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यत सक्रमित मरीज को इस स्थिति में पहुंचने के लिए कम से कम 6 से 9 दिन का वक्त लगता है लेकिन हालत यह है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले 40 से 45 फीसदी तक मरीज ऐसी अवस्था में पहुंच रहे हैं जिनका इलाज शुरू होने के चंद घंटों बाद मौत हो रही है। 
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मार्च से 10 अप्रैल तक हालात बदतर
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष मार्च से लेकर 10 अप्रैल तक कोरोना से हुई मौतों में ज्यादातर अस्पताल में भर्ती होने के पहले तीन दिन में दर्ज हो रही हैं। ऐसे ही हालात पिछले साल भी थे तब मंत्रालय राज्यों के साथ बैठकें कर इन्हें रोकने में सफल हो गया था। हालांकि, फिर ऐसे ही संकट से पता चलता है कि राज्यों ने पिछली घटनाओं से सबक नहीं लिया। 

ज्यादा मौतों की प्रमुख वजह
सही निगरानी नहीं: किसी में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद जिला चिकित्सीय टीम को निगरानी करना जरूरी है। मरीज बिना लक्षण का है तो उसे आइसोलेशन में व अगर उनकी स्थिति बिगड़ रही है तो समय पर भर्ती कराना जरूरी है। इसमें टीम फेल हो रही है। 


मरीजों का झूठ: कंटेनमेंट जोन का डर होने की वजह से कई मरीड अपनी स्थिति को छिपा लेते हैं। जब उनकी हालत बिगड़ने लगती है तो आनन-फानन में इन्हें भर्ती कराया जाता है। 
 
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