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मुंबई: बांद्रा कब्रिस्तान में संक्रमितों के शव दफनाने पर रोक से कोर्ट का इनकार
Mon, 27 Apr 2020 06:55 PM IST
योगेश साहू
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: योगेश साहू
Updated Mon, 27 Apr 2020 06:55 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मुंबई में स्थिति ज्यादा खराब है क्योंकि कोरोना के सबसे अधिक मामले यहीं सामने आए हैं। बहरहाल बंबई उच्च न्यायालय ने कोरोना संक्रमित मरीजों के शव बांद्रा के कब्रिस्तान में दफनाने से रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
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बता दें कि बंबई उच्च न्यायालय में कोरोना वायरस की वजह से जान गंवाने वालों के शवों को दफनाने के लिए 'बांद्रा कब्रिस्तान' का इस्तेमाल करने की बीएमसी की अनुमति को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल की गई थी। इस पर सोमवार को कोर्ट ने सुनवाई करते हुए रोक लगाने से इनकार कर दिया।
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सोमवार को न्यायमूर्ति बीपी कोलाबवाला ने उपनगर बांद्रा में कोंकणी मुस्लिम कब्रिस्तान के पास रहने वाले लोगों की याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में कोविड-19 संक्रमण से जान गंवाने वालों के शवों को दफन करने पर रोक लगाने की कोर्ट से मांग की गई थी।
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याचिका प्रदीप गांधी और अन्य ने दायर की थी। इसमें दावा किया गया था कि अगर शव ठीक तरीके से नहीं दफनाया गया तो स्थानीय लोगों में वायरस के सामुदायिक संचरण का डर है। वहीं कब्रिस्तान के न्यासियों की ओर से वकील प्रताप निम्बाल्कर ने याचिका का विरोध किया।
उन्होंने दलील दी कि शवों को दफनाने से पहले उचित सावधानी बरती जा रही है। साथ ही यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने याचिका में कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं रखा है, जिससे यह पता चले कि शवों से वायरस फैल सकता है।
वकील निम्बाल्कर ने केविड-19 से गंवाने वाले लोगों के शवों के प्रबंधन को लेकर दिशा-निर्देशों पर 15 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना का हवाला भी दिया, जिसमें कहा गया था कि कोरोना वायरस छींक या खांसी की बूंदों से फैलता है।
अदालत ने इस दलील को मानते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने कोई सामग्री या सबूत पेश नहीं किया, जो दिखाए कि कोविड-19 संक्रमण से जान गंवाने वाले व्यक्ति को दफनाने से आसपास रहने वाले लोगों के जीवन को कोई खतरा होगा।
हाईकोर्ट ने बृहंमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को आदेश भी दिया कि स्थानीय पुलिस की मदद से कब्रिस्तान के दरवाजे पर स्थानीय लोगों के लगाए गए तीन ताले खोले जाएं। बता दें कि स्थानीय लोगों ने इस कब्रिस्तान में शव को दफनाए जाने के खिलाफ 13 अप्रैल को प्रदर्शन किया था और कब्रिस्तान के दरवाजे पर ताला लगा दिया था।