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दावा: कोरोना के एवाई.4.2 वैरिएंट की तीव्रता बहुत कम, इसलिए चिंताजनक नहीं, इंसाकॉग की रिपोर्ट जारी
Sun, 07 Nov 2021 03:50 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sun, 07 Nov 2021 03:50 PM IST
सार
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में ऐसा कोई बॉयोलॉजिकल आधार नहीं है, जिससे इस वैरिएंट की संक्रामकता बढ़ने का महामारी के संदर्भ में आकलन किया जा सके। इसकी आगे जांच चल रही है।
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corona delta
- फोटो : istock
विस्तार
कोरोना के नए वैरिएंट एवाई.4.2 की तीव्रता अन्य सभी वैरिएंट की तुलना में बहुत कम होकर 0.1 फीसदी है। यह इतनी कम है कि चिंताजनक नहीं मानी जा सकती।
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इंडियन सॉर्स-कोर्व-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) की ताजा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इंसाकॉग के साप्ताहिक बुलेटिन में कहा गया है कि अन्य डेल्टा वेरिएंट से तुलना करने पर AY.4.2 की प्रभावशीलता अलग नहीं लगती है।
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इंसाकॉग का कहना है कि एवाई.4.2 वैरिएंट की तीव्रता अन्य सभी वैरिएंट्स आफ कंसर्न या वैरिएंट आफ इंट्रेस्ट (VOC/VOI) के मुकाबले इस बार 0.1 फीसदी से भी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में ऐसा कोई बॉयोलॉजिकल आधार नहीं है, जिससे इस वैरिएंट की संक्रामकता बढ़ने का महामारी के संदर्भ में आकलन किया जा सके। इसकी आगे जांच चल रही है।
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इंसाकॉग ने कहा कि डेल्टा (B.1.617.2 और AY.x) भारत में अब भी नए वैरिएंट आफ कंसर्न (VOC) या वैरिएंट आफ इंट्रेस्ट (VOI) बने हुए हैं। भारत में डेल्टा का पहला दौर पिछले साल अक्तूबर में आया था। इसके कारण देश में भयावह दूसरी कोराना लहर चली थी और यह अप्रैल मई में पीक पर थी।
क्या है इंसाकॉग
इंसाकॉग देश की 28 राष्ट्रीय लेबोरटरी का महासंगठन है। इसकी स्थापना दिसंबर 2020 में की गई थी। इसका मकसद सॉर्व कोव 2, जिसके कारण कोरोना महामारी फैली है, के जीनोमिक वैरिएंट्स पर नजर रखना था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन होकर यह देशभर में अपने नेटवर्क के जरिए कोरोना के नए वैरिएंट्स पर नजर रखता है।