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Maharashtra: मुंबई की मेयर तावड़े को आरोपमुक्त करने संबंधी याचिका कोर्ट ने की खारिज, जानें क्या है मामला

Wed, 18 Mar 2026 11:33 AM IST
Asmita Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Wed, 18 Mar 2026 11:33 AM IST
सार

कोर्ट ने मुंबई की मेयर रितु तावड़े को आरोपमुक्त करने के संबंधित याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों के बयानों को उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त है। जानें क्या है पूरा मामला? 

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Court rejects Mumbai Mayor Tawde's plea for discharge find out the matter
रितु तावड़े मुंबई की मेयर - फोटो : ANI

विस्तार

मुंबई की एक अदालत ने दो स्कूल शिक्षकों पर हमले के मामले में शहर की मेयर और भाजपा पार्षद रितु तावड़े को बरी करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पीड़ितों के बयानों को उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत बताया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वाईपी मनथका ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा कि अन्य गवाहों ने भी कहा कि तावडे ने शिक्षकों पर हमला किया था। यह घटना 29 जुलाई, 2016 को वाकोला क्षेत्र में नगर निगम के एक उर्दू माध्यम विद्यालय में घटी थी।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह विवाद एक महिला शिक्षिका के अचानक तबादले को लेकर भड़का, जो कथित तौर पर कैंसर से जूझ रही थीं। अभियोजन पक्ष ने कहा कि तावड़े ने छह अन्य लोगों के साथ कथित तौर पर स्कूल में प्रवेश किया। इसके साथ ही कैंसर से पीड़ित होने के बावजूद शिक्षक के तबादले को लेकर प्रबंधन के साथ तीखी बहस की।
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दो स्कूल शिक्षकों पर हमला किया
इसके अलावा, पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने प्रबंधन को गालियां देना शुरू कर दिया। इसके साथ ही दो स्कूल शिक्षकों पर हमला किया। इस मामले पर 11 अगस्त, 2016 को एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई थी, और बचाव पक्ष ने 13 दिन की देरी को अस्पष्ट बताया था। तावड़े ने अपनी याचिका में दावा किया कि घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति संयोगवश थी और कथित भीड़ की घटना से इसका कोई संबंध नहीं था"। उन्होंने दावा किया कि भाजपा पार्षद के रूप में उनकी स्थिति का दुरुपयोग शिकायतकर्ता (स्कूल की प्रधानाध्यापिका) द्वारा अनुचित प्रचार प्राप्त करने के लिए किया गया प्रतीत होता है"।


झूठा फंसाया गया है- तावड़े
पार्षद ने दावा किया, "शिकायतकर्ता ने आवेदक की राजनीतिक पहचान के बारे में जानने के बाद, दुर्भावना और गुप्त इरादों से काम करते हुए तावडे को झूठा फंसाया ताकि अपनी व्यक्तिगत शिकायत को बल प्रदान कर सके।" हालांकि, अतिरिक्त लोक अभियोजक इकबाल सोलकर द्वारा प्रतिनिधित्व की गई पुलिस ने तर्क दिया कि पीड़ितों के बयान से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि तावड़े ने दोनों शिक्षकों को थप्पड़ मारकर उन पर हमला किया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि स्कूल एक ऐसी जगह है जहां छात्रों को जीवन के सबक मिलते हैं, लेकिन जिस जगह पर झगड़ा हुआ, वह जगह भी वैसी ही है, इसलिए इस कृत्य को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

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मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद, न्यायाधीश ने कहा कि "पीड़ितों ने स्पष्ट रूप से आवेदक का नाम उस व्यक्ति के रूप में लिया है जिसने स्कूल के अंदर उन्हें हाथ से पीटा था"। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अन्य गवाहों ने भी कहा कि तावडे ने शिक्षकों पर हमला किया था। अदालत ने तावड़े की याचिका खारिज करते हुए फैसला सुनाया, "यह आवेदक के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त से अधिक है।"

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