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विदेश मंत्रालय ने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आतंकवाद निरोधक कार्रवाई मुख्य प्राथमिकता

Thu, 18 Jun 2020 08:03 PM IST
मुकेश कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Thu, 18 Jun 2020 08:03 PM IST
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counter terrorism action by the united nations security council main priority ministry of external affairs
विकास स्वरूप - फोटो : ani

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चुने जाने के कुछ घंटे बाद भारत ने गुरूवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र की इस शक्तिशाली ईकाई द्वारा आतंकवाद निरोधक कार्रवाई बढाना और आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया का अराजनीतिकरण उसकी मुख्य प्राथमिकताओं में होगा।

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भारत को अभूतपूर्व चुनाव में दो साल के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुन लिया गया । कोरोना वायरस महामारी के कारण सामाजिक दूरी के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए 192 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने मास्क पहनकर मतदान किया।
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भारत के चयन की जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) विकास स्वरूप ने कहा कि भारत उन सभी देशों की आवाज बनकर काम करेगा जो परिषद के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक देश के रूप में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चुनाव में भारत का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सुरक्षा परिषद की पांच अस्थायी सीटों के लिए हुए चुनाव में भारत को 192 में से 184 मत मिले।
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सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में भारत की प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा आतंकवाद निरोधक कार्रवाई में इजाफा भारत की मुख्य प्राथमिकता होगी। स्वरूप ने कहा ,'इससे पहले भी भारत 2011-12 के दौरान सुरक्षा परिषद का सदस्य था, तब हम संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधक समिति के अध्यक्ष रहे और 'आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता' की अवधारणा को लेकर आए।'

उन्होंने कहा कि आगामी कार्यकाल में भारत आतंकवाद, उसके समर्थकों और हमदर्दों और आतंकवादियों की ऐशगाहों के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई बढाने के लिए काम करेगा जिसके लिए आतंकवादियों और आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जाएगा।


उन्होंने कहा , 'प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया का अराजनीतिकरण भी जरूरी है क्योंकि आतंकवाद की घटनाओं को लेकर कोई सफाई नहीं दी जा सकती।' स्वरूप ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझाौते को जल्दी अंतिम रूप दिए जाने पर भी काम करेगा जिसका प्रस्ताव 1996 में भारत ने रखा था।

यह पूछने पर कि क्या पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कोई द्विपक्षीय मसला उठाया और मौके के राजनीतिकरण की कोशिश की, उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों और वर्षों से पाकिस्तान इस तरह का बर्ताव करता आया है। उन्होंने कहा, 'वे हमेशा बहुपक्षीय मंचों पर द्विपक्षीय मसले उठाते आये हैं। यह तो अब उनकी नीति का हिस्सा ही हो गया है।'

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