फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Coronavirus vaccine: covishield vaccine made more antibody as compare to covaxin vaccine, here is the reason

कोरोना वैक्सीन पर स्टडी: एंटीबॉडी के मामले में कोविशील्ड ने कोवाक्सिन से क्यों मारी बाजी, जानिए वजह

Mon, 07 Jun 2021 04:11 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 07 Jun 2021 04:11 PM IST
सार

कोवाक्सिन और कोविशील्ड दोनों ही रिएक्टोजैनिक साइड इफेक्ट के साथ आती हैं। इसमें इंजेक्शन साइड पर दर्द, बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, चक्कर आना, सिर दर्द या पेट दर्द जैसे साधारण देखने को मिल सकते हैं। हालांकि कोवाक्सिन में अभी तक कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखने को मिला है...

विज्ञापन
Coronavirus vaccine: covishield vaccine made more antibody as compare to covaxin vaccine, here is the reason
कोविशील्ड और कोवाक्सिन वैक्सीन - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

देश में कोरोना टीकाकरण अभियान तेजी से शुरू हो गया है। कोविशील्ड और कोवाक्सिन के साथ कई विदेशी कंपनियों के टीके भी जल्द भारत में लोगों को लगाना शुरू हो जाएंगे। इसी बीच कोरोना वैक्सीन के दो टीके लेने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के बीच हाल ही में एंटीबॉडी को लेकर एक अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि कोविशील्ड की दो खुराक लेने वालों व्यक्तियों में कोवाक्सिन की तुलना में बेहतर एंटीबॉडी की प्रतिक्रिया देखी गई है।

विज्ञापन


जो व्यक्ति कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके हैं, उनमें से कोविशील्ड लेने वाले 98 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी दिखीं, जबकि कोवाक्सिन लगवाने वाले 80 फीसदी लोगों में ही ऐसा देखा गया। ये अध्ययन चिकित्सा विज्ञान में अप्रकाशित पाण्डुलिपियों के ऑनलाइन आर्काइव मेडआर्काइव में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन का मकसद भारतीयों में कोविशील्ड और कोवाक्सिन की दो खुराक पूरी होने के बाद एंटीबॉडी प्रतिक्रिया की जांच करना था।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन



सफदरजंग अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के डायरेक्टर, प्रोफेसर और हेड डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि कोविशिल्ड वैक्सीन में जीवित एडिनोवायरस को लेकर उसमें कोविड का एक सेगमेंट डाला जाता है। इसे हम वेक्टर वैक्सीन कहते हैं। ये वायरस लाइव होता है इसलिए इसमें डिवीजन होने की क्षमता कहीं ज्यादा होती है। जिससे वह व्यक्ति के शरीर में ज्यादा और तेजी से प्रतिक्रिया देती है। वहीं जहां तक कोवाक्सिन की बात करें तो इसमें इनएक्टिव वायरस होता है जो शरीर के अंदर जाकर डिवीजन नहीं करता। इस कारण इसमें अन्य वैक्सीन की तुलना में ज्यादा फर्क नहीं आता है।

दोनों वैक्सीन में है ये फर्क

कोवाक्सिन को भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ मिलकर बनाया किया है। कोवाक्सिन एक इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है, जो बीमारी पैदा करने वाले वायरस को निष्क्रिय करके बनाई गई है। शुरुआत में कोवाक्सिन पर काफी प्रश्न उठाए गए थे। लेकिन अब दुनियाभर के एक्सपर्ट ने इस वैक्सीन की कार्य क्षमता की प्रशंसा की है। व्हाइट हाउस के मेडिकल एडवाइजर एंथॉनी फाउची ने खुद एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कोवाक्सिन B.1.617 वैरिएंट यानी भारत के डबल म्यूटेंट वैरिएंट को बेअसर करने में कारगर है।

कोविशील्ड चिम्पैंजी में पाए जाने वाले एडिनोवायरस वेक्टर पर आधारित वैक्सीन है। इसमें चिम्पैंजी को संक्रमित करने वाले वायरस को आनुवांशिक तौर पर संशोधित किया गया है, ताकि ये इंसानों में ना फैल सके। इस संशोधित वायरस में एक हिस्सा कोरोना वायरस का है जिसे स्पाइक प्रोटीन कहा जाता है। ये वैक्सीन शरीर में इम्यून रिस्पॉन्स बनाती हैं जो स्पाइक प्रोटीन पर काम करता है। ये वैक्सीन एंटीबॉडी और मेमोरी सेल्स बनाती हैं जिससे वायरस को पहचानने में मदद मिलती है।

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा डेवलप कोविशील्ड की इस वैक्सीन को कई और भी देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये वैक्सीन कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित करने का काम करती है। हालांकि इन दोनों ही वैक्सीन की खूबियां इन्हें एक दूसरे से अलग बनाती हैं।

कोवाक्सिन और कोविशील्ड दोनों ही रिएक्टोजैनिक साइड इफेक्ट के साथ आती हैं। इसमें इंजेक्शन साइड पर दर्द, बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, चक्कर आना मतली, सिर दर्द या पेट दर्द जैसे साधारण देखने को मिल सकते हैं। हालांकि कोवाक्सिन में अभी तक कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखने को मिला है।

कोविशील्ड पर कई देशों में इसके साइड इफेक्ट्स को लेकर सवाल खड़े हो चुके हैं। कई मामलों में लोगों को ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो चुकी है। जबकि कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां लोगों को न्यूरोलॉजिकल से जुड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा है।

इम्यून की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया

अध्ययन करने वालों का कहना है कि हमने देश के स्वास्थ्यकर्मियों पर कोविशील्ड और कोवाक्सिन की दोनों खुराक लेने के बाद इम्यून प्रतिक्रिया का मूल्यांकन किया है। देशभर में सभी वर्गों के बीच कोरोनावायरस टीके से संबंधित एंडी बॉडी मापक अध्ययन किया गया, जिसमें दोनों में से किसी भी टीके की दो खुराक लगवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों में 21 दिन या उसके बाद सार्स-कोवी-2 एंटी-स्पाइक बाइंडिंग एंटीबॉडी की मात्रा का आकलन किया गया।

515 स्वास्थ्यकर्मियों में 305 पुरुष और 210 महिलाओं में से 95 फीसदी में दोनों टीकों में से किसी की भी दो खुराक लगवाने के बाद सीरो-पॉजिटिविटी देखी गई। कोविशील्ड लगवाने वाले 425 में 98.1 फीसदी सीरो-पॉजिविटी देखी गई, जबकि कोवाक्सिन के 90 प्राप्तकर्ताओं में 80 फीसदी सीरो-पॉजिटिविटी देखी गई। सीरो-पॉजिटिविटी का मतलब रक्त के सीरम में एंटीबॉडी मौजूद होना है। शोधार्थियों ने कहा कि इस अध्ययन का मूल उद्देश्य कोविशील्ड और कोवाक्सिन की प्रत्येक खुराक के बाद एंटीबॉडी प्रतिक्रिया और आयु, लिंग, रक्तसमूह, बॉडी मास इंडेक्स तथा सह-रुग्णता के बीच संबंधों का विश्लेषण करना था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed