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कोरोना के हालात: गुजरात सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा-हकीकत उसके दावों के विपरीत

Tue, 13 Apr 2021 04:45 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, अहमदाबाद
एजेंसी, अहमदाबाद Published by: देव कश्यप Updated Tue, 13 Apr 2021 04:45 AM IST
सार

  • हाईकोर्ट ने कहा, आरटी-पीसीआर जांच हो भी रही है तो पांच-पांच दिन तक रिपोर्ट नहीं आ रही है
  • कोर्ट ने पूछा- चुनाव के वक्त बूथ स्तर पर मैनेजमेंट किया जाता है, वैसे ही कोरोना की स्थिति में बूथ स्तर पर मैनेजमेंट नहीं किया जा सकता है क्या?

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Coronavirus situation in Gujrat High court rebuked state government says reality contrary to its claims
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य में कोरोना संक्रमण के हालात और लोगों को हो रही समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार की जमकर खिंचाई की। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार जो भी दावे कर रही है, हकीकत उसके विपरीत है।

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चीफ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस भार्गव करिया की पीठ ने कहा कि लोग अब यह सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि वे भगवान के रहमोकरम पर हैं। पीठ ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण हालात पर स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई कर रही है। एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने कोरोना से निपटने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की पीठ को जानकारी दी। इस पर पीठ ने कहा कि हकीकत सरकारी दावों से पूरी तरह से अलग है।
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आप कह रहे हैं कि सब कुछ ठीक है लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। लोगों के बीच सरकार को लेकर विश्वास की कमी है। पीठ ने कहा कि राज्य में कई तहसील, तालुका और गांवों में कोरोना जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। आरटी-पीसीआर जांच हो भी रही है तो पांच-पांच दिन तक रिपोर्ट नहीं आ रही है।
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वैक्सीन की दो डोज लेने के बाद भी लोगों की जान जा रही
चीफ जस्टिस ने कहा कि उनके पास निजी जानकारी है कि अस्पताल भर्ती करने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वैक्सीन की दो डोज लेने के बाद भी लोगों की मौत हो रही है। पीठ ने कहा कि ऑफिसों में स्टाफ 50 फीसदी किया जाए। कर्फ्यू वक्त में छूट दी जा रही है और रात्रिकालीन कर्फ्यू का भी ठीक से अमल नहीं हो रहा है। पीठ ने कहा है कि चुनाव के वक्त बूथ स्तर पर मैनेजमेंट किया जाता है, वैसे ही कोरोना की स्थिति में बूथ स्तर पर मैनेजमेंट नहीं किया जा सकता है क्या।


ऑक्सीजन, बेड की कमी नहीं तो लोग लाइनों में क्यों हैं?
रेमडेसिविर इंजेक्शनों की कमी की शिकायत पर सरकार के दावे पर चीफ जस्टिस ने कहा कि जब प्रदेश में 27,000 इंजेक्शन उपलब्ध हैं तो पता लगाया जाए कि इनमें से कितनों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। आखिर हर कोविड अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध क्यों नहीं है। पीठ ने एडवोकेट जनरल से पूछा कि आप कह रहे हैं कि प्रदेश में ऑक्सीजन और बेडों की कमी नहीं है तो लोग लाइनों में क्यों खड़े हैं।

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