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कोरोना वायरस: संसद भवन को ही नहीं मिल पा रहा है सैनेटाइजर और मास्क

Tue, 17 Mar 2020 07:11 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 17 Mar 2020 07:11 PM IST
सार

  • सफाई कर्मियों को मंगलवार को मिले ग्लव्स, सैनेटाइजर का पता नहीं
  • सुरक्षा और जांच कर्मियों को भी मंगलवार को मिले हैं ग्लव्स, हर गेट पर थर्मल स्कैनर
  • संसद भवन से अलग नहीं है मंत्रालयों का हाल

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CoronaVirus: sanitizers and masks are not available in adequate quantity for parliament security
Loksabha - फोटो : a

विस्तार

देश कोरोना वायरस के संक्रमण को हराने के लिए जंग लड़ रहा है और संसद भवन को सैनेटाइजर नहीं मिल पा रहा है। बाजार में संसद भवन के खरीददार गए थे और खाली हाथ लौट आए। बुधवार को मिलेगा। कुछ मास्क भी आए हैं। सफाई कर्मियों को ग्लब्स मिल गए हैं। अभी उन्हें मास्क का इंतजार है।
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सैनेटाइजर के बारे में पूछने पर कहते हैं कि यह अफसरों के लिए आया है। हां, वह हाथ की साबुन से सफाई जरूर करते हैं। संसद भवन को भी साफ सुथरा रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। संसद भवन में भीतर प्रवेश गेट नंबर 12 पर सैनिटाइजर जांच अधिकारियों के पास रखा था। कल खत्म हो गया था। आज वह बिना सैनेटाइजर के ही लोगों की जांच-पड़ताल कर रहे हैं।

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एक अन्य गेट पर जांच अधिकारी ने बताया कि सोमवार तक तो बिना ग्लव्स हाथ से लोगों की जांच की गई। आज मास्क और ग्लव्स मिले हैं। सूत्र का कहना है कि ड्यूटी है। इसे करने से मना नहीं कर सकते, लेकिन खुद के सुरक्षा के उपाय न हों तो डर लगता है। आखिर हम भी इंसान है।
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संसद भवन की पहली, दूसरी मंजिल और ग्राऊंड फ्लोर में सफाई कर्मियों के हाथ में पिंक कलर के ग्लब्स मिले, लेकिन चेहरे पर मास्क या ढकने जैसा कुछ नहीं था। सुरक्षा कर्मियों में भी कई जवान प्रवेश द्वार पर आधी अधूरी तैयारियों में दिखाई दिए।


पूछने पर पता चला कि अभी सामान आ रहा है। हालांकि संसद भवन में विजिटर एंट्री पर प्रतिबंध लग चुका है। मंत्रियों के संसद भवन में स्थिति कार्यालय हों या बेसमेंट में स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय का एक अंश, उधर तैयारी पूरी है।

प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र के हाथ भी खाली

शास्त्री भवन में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र है। वहां जाइए तो सैनेटाइजर उपलब्ध नहीं हैं। मास्क के बारे में पूछने पर पता चला कि दो रुपये वाला मास्क 30 रुपये में मिल रहा था, इसलिए वहां नहीं है। कपड़े का आर्डिनरी मास्क है। उसकी साबुन से धोकर सफाई की जा सकती है, लेकिन यह भी मूल कीमत से कई गुना मंहगा 50 रुपये में मिल रहा था।

यह भी दो दर्जन के करीब ही था। जनऔषधि केंद्र के व्यवस्थापक का कहना है कि बाजार में चीजें कई गुना दामों पर मिल रही हैं। गुणवत्ता भी अच्छी नहीं है। जनऔषधि केंद्र के कारण वहां बड़ी संख्या में मंत्रालय के कर्मी आ रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौट जा रहे हैं।    

हाथ धोने का सुविधाजनक जुगाड़ भी नहीं

मंत्रालय के कर्मियों की एक चिंता और सुनिए। सैनिटाइजर नहीं है। ऊपर से हाथ साबुन से हाथ धोने के लिए सुविधा जनक जुगाड़ नहीं है। कुछ कर्मी अपना खुद का डेटॉल हैंडवाश और लाइफबॉय साबुन लेकर आ रहे हैं। दफ्तर कर्मियों का कहना है कि वॉश रूम में जो जेल या तरल साबुन रखा गया है, उसकी बहुत अच्छी गुणवत्ता होने की संभावना कम है।

इसलिए वह खुद तैयारी के साथ आ रहे हैं, लेकिन उन्हें हाथ धोने के लिए दूर बने वॉशरूम तक बार-बार जाना पड़ रहा है। बताते हैं मन में कोरोना को लेकर डर बैठ रहा है, इसलिए जाना पड़ता है। सैनेटाइजर होता तो वह भी कुछ बूंद डालकर निश्चिंत हो जाते।

एक सरकारी कर्मी का कहना है कि 100 एमएल का सैनेटाइजर 130 रुपये में मिल रहा है। अब आखिर कितना सैनेटाइजर रखा जाए।

कोरोना के संक्रमण का फैल रहा है फोबिया

देश में कोरोना का संक्रमण किस हद तक फैलेगा, इस बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी कुछ स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं, लेकिन सांसदों के भीतर इसका डर साफ दिखाई दे रहा है। एक राज्यमंत्री ने कहा कि विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कोरोना के संक्रमण की संभावना के कारण खुद को निगरानी में रख लिया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के राज्यमंत्री अश्विनी चौबे का कहना है कि तैयारी की जा रही है। हम कोरोना को हराएंगे। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि जानकारी, बचाव और सहयोग के साथ सतर्कता ही भारत मूल मंत्र मानकर चल रहा है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि भारतीय संस्कृति, रहन-सहन और तौर-तरीके को ध्यान में रखकर एडवाइजरी जारी की जा रही है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द कोरोना के नए मरीजों पर रोक लग जाए। जो कोरोना के संक्रमित मरीज हैं उन्हें स्वस्थ करके घर भेज दिया जाए। तीसरे चरण से पहले हम संक्रमण पर काबू पा लें।

संसद भवन से अलग नहीं है मंत्रालयों का हाल

शास्त्री भवन, कृषि भवन, रेल भवन, उद्योग भवन, निर्माण भवन समेत तमाम केंद्रीय सचिवालय के दफ्तरों की हालत संसद भवन की तैयारी जैसी ही है। विजिटर्स एंट्री बहुत सीमित है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम अभी पुख्ता नहीं हैं। शास्त्री भवन के एक मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि कोई खांसता है तो पहला शक कोरोना वायरस के संक्रमण से पीड़ित होने पर चला जा रहा है।



एक अन्य सूत्र का कहना है कि साफ, सफाई और इंतजाम बढ़ रहा है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह से दुरुस्त नहीं कहा जा सकता। शास्त्री भवन के कई विभागों में कोरोना संक्रमण को लेकर चर्चा छेड़ने पर अधिकारी भी गंभीरता से उसमें हिस्सा ले रहे हैं। कई अधिकारी इसके बाबत इंटरनेट पर लगातार जानकारी लेने के लिए सक्रिय हैं।

 

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