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कोरोना अलर्ट: बूस्टर खुराक लेने वाले 70 फीसदी लोग तीसरी लहर के दौरान संक्रमण से बचे रहे, कर्नाटक के मंत्री ने चौथी लहर के लिए किया आगाह

Tue, 26 Apr 2022 05:45 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 26 Apr 2022 05:45 PM IST
सार

शोधार्थियों ने यह निष्कर्ष भी निकाला है कि टीके की दूसरी खुराक और बूस्टर खुराक के बीच लंबा अंतर तीसरी लहर के दौरान संक्रमित होने की अधिक आशंका से जुड़ा हुआ है।

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Coronavirus new cases infection rate vaccination third wave study Omicron all updates in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

कोरोना वायरस रोधी टीके की बूस्टर खुराक लेने वाले 70 फीसदी लोग इस महामारी की तीसरी लहर के दौरान संक्रमण की चपेट में नहीं आए। यह जानकारी एक नए अध्ययन में सामने आई है जो भारत में लगभग 6000 लोगों पर किया गया है। कोरोना वायरस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की राष्ट्रीय टास्क फोर्स के को-चेयरमैन डॉ. राजीव जयदेवन के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि तीसरी लहर में ऐसे 45 फीसदी लोग संक्रमित हुए जिन्होंने टीके की दो खुराकें तो ली थीं लेकिन बूस्टर खुराक नहीं ली थी। 

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समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार यह अध्ययन टीकाकरण करवा चुके 5971 लोगों पर किया गया है। इनमें से 24 फीसदी लोगों की उम्र 40 वर्ष से कम थी और 50 फीसदी लोग 40 से 59 वर्ष आयु वर्ग के थे। सर्वे में शामिल होने वाले कुल लोगों में 45 फीसदी महिलाएं रहीं और 53 फीसदी स्वास्थ्य कर्मी थे। रिपोर्ट के अनुसार इन 5971 लोगों में से 2383 लोगों ने कोरोना रोधी टीके की बूस्टर खुराक ली थी। इनमें से 30 फीसदी लोग कोरोना वायरस महामारी की तीसरी लहर के दौरान संक्रमण की चपेट में आए थे।
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शोधार्थियों ने यह निष्कर्ष भी निकाला है कि टीके की दूसरी खुराक और बूस्टर खुराक के बीच लंबा अंतर तीसरी लहर के दौरान संक्रमित होने की अधिक आशंका से जुड़ा हुआ है। इसमें यह भी कहा गया है कि छह महीने के अंतर के बाद टीके की तीसरी खुराक देने से संक्रमण की दर पर कोई असर नहीं पड़ा। अध्ययन में यह भी दिखाया गया है कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर ने 40 साल से कम आयु के लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया था। इस आयु वर्ग के करीब 45 फीसदी लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे।
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रिपोर्ट के अनुसार तीसरी लहर के दौरान 40 से 59 वर्ष आयु वर्ग के 39.6 फीसदी लोग और 60 से 79 वर्ष आयु वर्ग के 31.8 फीसदी लोग तीसरी लहर के दौरान संक्रमित हुए। वहीं, 80 वर्ष और इससे अधिक आयु के केवल 21.2 फीसदी लोग की कोविड की चपेट में आए। तीसरी लहर के दौरान संक्रमित हुए 2311 लोगों में से 4.8 फीसदी एसिम्टोमैटिक थे जबकि, 53 फीसदी लोगों में हल्के लक्षण देखने को मिले थे। इसकी मध्यम गंभीरता 41.5 फीसदी मरीजों में देखी गई। वहीं, 0.69 फीसदी मरीज गंभीर रूप से बीमार पड़े थे।

शोधार्थियों का कहना है कि तीसरी लहर में कोवाक्सिन या कोविशील्ड दोनों ही टीके लगवाने वाले लोगों में संक्रमण की समान दर दर्ज की गई। 5157 लोगों ने कोविशील्ड की खुराक ली थी और इनमें से 2010 लोग (39 फीसदी) तीसरी लहर में संक्रमित हुए थे। वहीं, कोविशील्ड की खुराक लेने वाले 523 लोगों में से 210 (40 फीसदी) संक्रमित हुए थे।

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री बोले, जून के बाद आ सकती है चौथी लहर की पीक

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने मंगलवार को कहा कि विशेषज्ञों ने अनुमान व्यक्त किया है कि कोरोना वायरस की चौथी लहर जून के बाद चरम पर पहुंच सकती है और इसका असर अक्तूबर तक रहने की आशंका है। उन्होंने कोरोना के साथ जीना सीखने पर जोर देते हुए कहा कि टीकाकरण और मास्क जैसे एहतियाती उपायों का लगातार पालन जरूरी है। इस सवाल पर कि क्या कर्नाटक में चौथी लहर है, सुधाकर ने कहा कि यहां अन्य प्रदेशों के मुकाबले मामले बहुत कम हैं, ऐसे में फिलहाल यहां ऐसा कहना ठीक नहीं है।

वायरस विज्ञानी बोले, कोविड-19 की चौथी लहर आने की संभावना बेहद कम

प्रख्यात वायरोलॉजिस्ट और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर के पूर्व प्रोफेसर डॉ. टी जेकब जॉन ने कहा है कि भारत में कोरोना वायरस की चौथी लहर आने की संभावना बहुत कम है। इस सवाल पर कि कुछ राज्यों में कोरोना के मामले क्यों बढ़ रहे हैं, जॉन ने कहा कि दिल्ली और हरियाणा में पिछले तो से तीन सप्ताह में कोविड के मामलों में मामूली तेजी आई थी। उन्होंने कहा कि जहां तक मुझे मालूम है देश के किसी भी राज्य में कोरोना के मामले तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं। मार्च और अप्रैल में यहां संक्रमण की दर नियंत्रित रही है। 

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