कोरोना: लॉकडाउन से घबराए लोगों की खरीदारी ला सकती है एक और संकट
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दुनियाभर में प्रकोप दिखा रहे कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई देशों ने लॉकडाउन का फैसला किया है। लॉकडाउन की घोषणा के बाद से लोग जरूरी चीजों की खरीदारी करने में जुटे हैं। ऐसे में यह पैनिक बाइंग एक और संकट को जन्म दे सकती है। आइए जानते हैं क्या है नया संकट...
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दुनियाभर में प्रकोप दिखा रहे कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई देशों ने लॉकडाउन का फैसला किया है। लॉकडाउन की घोषणा के बाद से लोग जरूरी चीजों की खरीदारी करने में जुटे हैं। ऐसे में यह पैनिक बाइंग एक और संकट को जन्म दे सकती है। आइए जानते हैं क्या है नया संकट...
बीते कुछ दशकों में हुए जलवायु परिवर्तन से न सिर्फ ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ी है, बल्कि दुनियाभर में खाद्य आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मौसम की वजह से सिर्फ एक देश में फसल के नष्ट होने से विश्वभर में खाद्य आपूर्ति बाधित हो गई है। वहीं भारत की बात करें तो यहां की सरकार ने कोरोना संकट से निपटने के लिए देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन का एलान किया है। हालांकि सरकार का कहना है कि देश में खाद्यन्न का पर्याप्त भंडार है।
गेहूं की आपूर्ति बाधित होने से बढ़ेगी समस्या
फ्रंटियर्स पत्रिका में छपे शोध के मुताबिक इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दो मॉडलों को लिया। ये जानने के लिए कि देश अपनी जरूरतों को किस तरह से पूरी करता है। एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम ने पाया कि अमेरिका का गेहूं भंडार चार साल बाद खत्म हो जाएगा, जबकि वैश्विक भंडार 31 फीसदी तक गिर सकता है। अमेरिका जिन 174 देशों को गेहूं निर्यात करता है, वहां फसलों के नष्ट होने से भंडार में कमी आएगी।
जलवायु परिवर्तन बना समस्या, फसलें बर्बाद
गर्म तापमान और अनिश्चित बारिश की चेतावनी पहले से ही वैज्ञानिक देते आए हैं। इससे बार-बार और अधिक सूखा पड़ने के हालात बन सकते हैं। साल दर साल पड़ने वाला सूखा कई देशों में कहर बरपा रहा है।
बार-बार सूखे से हालत पस्त
उनके पास परिवार के लिए तक भोजन नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं वैश्विक खाद्य सुरक्षा लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है। वहीं 2008 और 2011 में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ गए थे।
भारत में कोरोना संकट: क्या हमारे पास है पर्याप्त भंडार?
सरकार के पास आने वाले समय के लिए पर्याप्त अनाज है। भारत सरकार का कहना है गोदाम में पर्याप्त अनाज है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी कहा है कि हमने राज्य सरकारों से कहा है कि वो एकसाथ 6 महीने का राशन कार्ड धारकों को दे दें।
केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि सरकार के पास इस वक्त 435 लाख टन अधिशेष खाद्यान्न यानी सरप्लस अनाज है। इसमें 22.19 लाख टन गेहूं और 162.79 लाख टन चावल शामिल है।
भारत में यह रबी की फसल का सीजन है, जिसमें गेहूं, चना, सरसों, दालें आदि की बड़े पैमाने पर खेती होती है। अभी फसल कटाई का समय है। महाराष्ट्र और मध्यभारत के क्षेत्रों में गेहूं की नई फसल आ चुकी है, जबकि पंजाब, हरियाणा, यूपी बिहार समेत उत्तर भारत के राज्यों में अप्रैल के पहले हफ्ते में नई फसल आनी शुरू हो जाती है। इस तरह गोदामों में रखा अतिरिक्त लाखों टन अनाज बाजारों में आएगा।
30 लाख टन चीनी का स्टॉक
जानकार कहते हैं कि कृषि मंत्रालय ने इस साल गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान जताया था। साल 2019 में देश में 10.36 करोड़ टन गेहूं पैदा हुआ था। साल 2018-19 में भारत ने गेहूं का 2,26,225 टन गेहूं का निर्यात भी किया था।
पर्याप्त मात्रा में दूध, ओलावृष्टि ने बढ़ाई मुश्किल
कोरोना वायरस के प्रकोप और कई राज्यों में मार्च में भारी बारिश, ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा। भारतीय खाद्य निगम की वेबसाइट के मुताबिक भारत के गोदामों में मार्च 2020 तक 584.97 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल उपलब्ध है।
इधर, भारत में 75 करोड़ लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम प्रति यूनिट (व्यक्ति) 5 किलो अनाज हर माह बेहद कम दरों (3 रुपए किलो चावल और 2 रुपए किलो पर गेहूं) देती है। पंजाब को छोड़ बाकी राज्यों में एक-एक महीने का राशन मिलता है और मिलता रहा है।
हालांकि ताजा हालातों में भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए अप्रैल महीने में 135 लाख टन चावल और 74.2 लाख टन गेहूं की जरूरत होगी। दुग्ध उत्पादन में भारत बीते कई वर्षों में अव्वल रहा है। डेयरी विकास बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक साल 2018-19 में भारत में 187.7 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ था। बड़ी दुग्ध उत्पादन कंपनियां अभी से 15-17 फीसदी ज्यादा उत्पादन कर रही हैं।