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भारत में लॉकडाउन वैश्विक लॉकडाउन से कितना असरदार, जानें क्या कहता है इंडेक्स?

Fri, 08 May 2020 12:21 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला Published by: Tanuja Yadav Updated Fri, 08 May 2020 12:21 PM IST
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coronavirus india lockown vs global lockdown covid 19 death case and recovered case all over the world
कोरोना वायरस (सांकेतिक फोटो) - फोटो : PTI

कोरोना वायरस के फैलने के साथ ही दुनिया के कई देशों ने लॉकडाउन की प्रक्रिया को अपनाया लेकिन यह बात वैश्विक स्तर पर मानी जाती है कि भारत की सरकार ने देश में लॉकडाउन बहुत जल्दी लगाया जो काफी मजबूत था और जिसका परिणाम भी देखने को मिला। 


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कोरोना वायरस के फैलने के साथ ही दुनिया के कई देशों ने लॉकडाउन की प्रक्रिया को अपनाया लेकिन यह बात वैश्विक स्तर पर मानी जाती है कि भारत की सरकार ने देश में लॉकडाउन बहुत जल्दी लगाया जो काफी मजबूत था और जिसका परिणाम भी देखने को मिला। 

ऑक्सफोर्ड  विश्वविद्यालय ने एक इंडेक्स तैयार किया है जिसमें यह बात कही गई है कि भारत में सबसे मजबूत लॉकडाउन लगाया गया है। 22 मार्च को पहली बार लगे लॉकडाउन में सरकार ने 20 अप्रैल से थोड़ी छूट देने की शुरुआत की जिसमें रेड जोन के बाहर कुछ शर्तों के साथ काम करने की मंजूरी मिली।

क्या है ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की इंडेक्स?

ऑक्सफोर्ड कोविड-19 गवर्मेंट रिस्पॉन्स ट्रैकर की तरफ से इस्तेमाल किए गए माध्यमों में से ऑक्सफोर्ड इंडेक्स भी एक माध्यम है। इस ट्रैकर में 100 ऑक्सफोर्ड सामुदायिक सदस्य हैं जो लगातार सरकारी प्रतिक्रिया के 17 सूचकों के डाटाबेस को अपडेट करते रहते हैं। 

सरकार के इन सूचकों में स्कूल, कॉलेज का बंद होना, सार्वजनिक कार्यक्रम, सार्वजनिक परिवहन और घर पर रहने जैसी नीतियों का परीक्षण किया जाता है। इस इंडेक्स में 0 से 100 तक के नंबर इन सूचकों को दर्शाते हैं। जिसका इंडेक्स स्कोर सबसे ज्यादा होगा वो सख्ती का उच्चतम स्तर दिखाएगा।

इस इंडेक्स से क्या पता चलता है?

इंडेक्स से जानकारी मिलती है कि किसी देश ने अपने यहां लॉकडाउन कितनी मजबूती और सख्ती के साथ लगाया है। ऑक्सफोर्ड ने कई देशों के उनके यहां होने वाले कोरोना से मौत और सख्ती के स्कोर को दर्शाया है। 

इंडेक्स में बताया गया है कि इटली, स्पेन और फ्रांस जैसे देशों में कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों के आंकड़ों के शुरुआत में ही मौतों का आंकड़ा भी बढ़ने लगा। हालांकि चीन ने सख्ती का पालन किया और वहां तुलनात्मक कम मौतें हुई।

यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और भारत जैसे देशों में इंडेक्स बताता है कि सख्त कदम उठाने के बाद मौत के आंकड़ों वाला ग्राफ समतल नहीं हुआ। सख्ती का पालन करने के बाद भी मौत का आंकड़ा ज्यादा होने पर जिन देशों की तुलना की गई वो हैं फ्रांस, इटली, ईरान, जर्मनी, यूनाइटे़ड किंगडम, नीदरलैंड, स्वीडन, मेक्सिको, कनाडा, बेल्जियम, आयरलैंड, अमेरिका, तुर्की, इजराइल, चीन, भारत और स्विटजरलैंड।

भारत की दुसरे देशों से कैसे की तुलना?

जब भारत की तुलना दूसरे देशों की गई तो पता चला कि भारत ने तुलनात्मक तौर पर जल्दी और सख्त लॉकडाउन का पालन किया। इन 18 देशों ने जब सख्ती से लॉकडाउन लगाया तब यहां पांच सौ से ज्यादा मामले थे लेकिन भारत में सख्ती से लॉकडाउन के समय 320 मामले थे और 22 मार्च तक देश में केवल चार मौतें ही हुई थीं।

जब भारत में मौत का आंकड़ा सौ के पार पहुंचा तब अन्य देशों में इससे ज्यादा मौते हो चुकी थीं। स्विटजरलैंड इस लिस्ट में एक अपवाद है यहां अभी तक कोई मौत नहीं हुई है। स्पेन ने सख्ती बढ़ाने में देरी की और स्वीडन और इटली ने उदारपंथ का रास्ता अपनाया।

इस इंडेक्स में और किन बातों पर जोर दिया गया है? 

शोधकर्ताओं का मानना है कि सभी देशों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के भौतिक दूरी बनाए रखने के छह में से चार सिफारिशों को माना चाहिए। क्या है विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी की गई ये सिफारिशें...
  • स्वास्थ्य प्रणाली की ओर से संक्रमण को रोकने का प्रबंध
  • स्वास्थ्य प्रणाली गंभीर ही नहीं बल्कि हर मामले की जांच करे और आइसोलेट करे
  • ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में संक्रमण को रोकने पर जोर
  • समुदायों के कम से कम संपर्क करने पर जोर
इंडेक्स में भारत को 0.7 स्कोर इसलिए मिला है, भारत को मामलों को नियंत्रण करने में शू्न्य स्कोर मिला है। इंडेक्स में सबसे ज्यादा स्कोर 0.9 है जो आइसलैंड, हॉन्ग-कॉन्ग, क्रोएशिया जैसे देशों को मिला है। 

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने माना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी सिफारिशों को किसी देश ने नहीं माना लेकिन 20 देश ऐसे रहे जो जिन्होंने इन सिफारिशों को आधार बनाकर काम किया।
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