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कोरोना वायरस: दिहाड़ी मजदूरों को नहीं मिल रहा काम, राज्य सरकारों से मदद की आस

Wed, 25 Mar 2020 01:41 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Wed, 25 Mar 2020 01:41 PM IST
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coronavirus India has been put in lockdown to halt spread of virus daily wage earners not getting work
लॉकडाउन के कारण परेशान हैं दिहाड़ी मजदूर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लिए संपूर्ण देशबंदी की घोषणा की है। लोगों को घरों के अंदर रहने के लिए कहा गया है। मगर दिहाड़ी मजदूरी करने वालों के पास कोई विकल्प नहीं हैं। मंगलवार को हुई घोषणा का सबसे ज्यादा प्रभाव इन्हीं पर पड़ा है। इन लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि वह इससे कैसे निपटें। चलिए जानते हैं कि वे किस स्थिति से जूझ रहे हैं।

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नोएडा के लेबर चौक में आमतौर पर सैकड़ों आदमी निर्माण मजदूरों के रूप में नौकरी की तलाश में रहते हैं। दिल्ली के इस उपनगरीय क्षेत्र में सड़क के छोटे से चौराहे पर स्थित इस जगह पर बिल्डर श्रमिकों को काम पर रखने के लिए आते हैं। रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान यहां सब शांत पड़ा हुआ था।
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थोड़ी दूरी पर कुछ आदमियों का समूह एक कोने पर बैठा हुआ दिखाई दिया। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार जब एक निश्चित दूरी बनाकर उनसे पूछा गया कि क्या लॉकडाउन के कारण उन्हें परेशानी हो रही है तो उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रमेश कुमार ने कहा, 'मुझे मालूम है कि कोई भी यहां हमें काम देने के लिए नहीं आएगा लेकिन फिर भी हमें संभावना की तलाश में हैं।'
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उन्होंने कहा, 'मुझे रोजाना के 600 रुपये मिलते हैं और मुझे पांच लोगों को खाना खिलाना होता है। कुछ दिनों में हमारे पास मौजूद खाना खत्म हो जाएगा। मुझे कोरोना वायरस के खतरों के बारे में पता है लेकिन मैं अपने बच्चों को भूखा नहीं देख सकता हूं।' लाखों दिहाड़ी मजदूरों को लगभग इसी स्थिति से निपटना पड़ रहा है।

रिक्शा चालक के तौर पर काम करने वाले किशन लाल, इलाहाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चार दिनों से उन्हें एक भी पैसा नहीं मिला है। उन्होंने कहा, अपने परिवार का पेट भरने के लिए मुझे पैसा कमाना पड़ेगा। मैंने सुना है कि सरकार हमें पैसा देगी। हालांकि मुझे नहीं पता कि कब और कैसे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात को राष्ट्र के नाम संबोधन में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की है। जिसका मतलब है कि दिहाड़ी मजदूरों को अगले तीन हफ्तों तक कोई काम नहीं मिलेगा। यानी उनके पास पैसे भी नहीं आएंगे। वहीं कुछ लोगों के पास आने वाले दिनों में खाना खत्म हो जाएगा।

भारत में संक्रमित मरीजों की संख्या 550 से ज्यादा हो चुकी है वहीं 11 लोगों की जान जा चुकी है। बहुत सी राज्य सरकारों जिसमें उत्तर प्रदेश, केरल और दिल्ली ने दिहाड़ी मजदूरों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करने का वादा किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी लॉकडाउन से प्रभावित होने वाले मजदूरों की मदद का वादा किया है।

लेकिन बहुत सी लॉजिस्टिकल चुनौतियां भी हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, भारत का कम से कम 90 प्रतिशत कार्यबल अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है। जिसमें सिक्योरिटी गार्ड, क्लीनर्स, रिक्शा चालक, सड़क पर सामान बेचने वाले, कूड़ा उठाने वाले और घरेलू सहायक शामिल हैं।


इनमें से ज्यादातर लोगों की पेंशन, बीमार होने पर मिलने वाली छुट्टी, भुगतान वाला अवकाश और किसी तरह का बीमा नहीं मिलता है। बहुत से लोगों के पास बैंक खाते नहीं हैं। वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नकदी पर निर्भर हैं। बहुत से प्रवासी मजदूर हैं। वह विभिन्न राज्यों से काम की तलाश में किसी राज्य में जाते हैं।

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