फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Coronavirus India for more vaccines can get approval soon, here is all you need to know

कोरोना से जंग: जल्द ही इन चार टीकों को मिल सकती है अनुमति, जानिए सबकुछ

Thu, 15 Apr 2021 09:59 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 15 Apr 2021 09:59 PM IST
विज्ञापन
Coronavirus India for more vaccines can get approval soon, here is all you need to know
कोरोना वायरस वैक्सीन (सांकेतिक) - फोटो : पिक्साबे

देश में कोरोना वायरस संकट अब पहले से भी ज्यादा गंभीर हो गया है। संक्रमण के दैनिक मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। रिकॉर्ड रोज ही टूट रहे हैं और रोज ही बन रहे हैं। गुरुवार को देश में दो लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। ऐसी स्थितियों में जब वैक्सीन की इस संकट का एकमात्र उपाय दिख रही है, तब टीकों की कमी की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है।  भारत में इस समय तीन टीकों को सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी जा चुकी है। राहत की बात ये है कि चार और टीके ऐसे हैं जिन्हें जल्द ही अनुमति मिल सकती है।

विज्ञापन


अभी हमारे देश में जिन टीकों को इस्तेमाल की अनुमति है वह हैं कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पुनिक वी। कोवैक्सीन स्वदेशी वैक्सीन है जिसे भारत बायोटेक ने विकसित किया है। कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका ने विकसित किया है और इसका उत्पादन भारतीय सीरम संस्थान कर रहा है। वहीं, रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी को हाल ही में मंजूरी दी गई है। हम आपको बताने जा रहे हैं उन टीकों के बारे में जिन्हें आने वाले समय में उपयोग की मंजूरी मिल सकती है और भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता कितनी है।

विज्ञापन

इन चार टीकों को मिल सकती है अनुमति

  • जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन 
  • नोवावैक्स वैक्सीन 
  • भारत बायोटेक की इंट्रानेजल यानी नाक से दी जाने वाली वैक्सीन 
  • जायडस कैडिला की वैक्सीन

कब तक देश में आ सकती हैं ये वैक्सीन 

समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर सब ठीक रहता है तो जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को अगस्त तक अनुमति मिल सकती है। आपको बता दें कि जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन पर खुराक लेने के बाद रक्त में थक्के बनने के कुछ मामले सामने आने के बाद सवाल उठे हैं। वहीं, जायडस कैडिला की वैक्सीन के भी अगस्त तक उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके अलावा नोवावैक्स की वैक्सीन सितंबक अंत तक आ सकती है और भारत बायोटेक की इंट्रानेजल वैक्सीन अक्तूबर तक उपलब्ध हो सकती है। 

भारत में जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के निर्माण के लिए यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेट फाइनेंस कॉरपोरेशन, हैदराबाद स्थित फार्मास्यूटिकल कंपनी बायोलॉजिकल ई को वित्तीय मदद देगी। अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स की वैक्सीन का भारत में उत्पादन सीरम संस्थान करेगा। वहीं, भारतीय कंपनी जायडस कैडिला खुद ही अपनी वैक्सीन का निर्माण करेगी। भारत बायोटेक ने अपनी नाक से ली जाने वाली इंट्रानेजल वैक्सीन के लिए अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ समझौता किया है। 

विज्ञापन

वैक्सीनों का असर, कीमत और खुराक

  • जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन मध्यम से गंभीर संक्रमण के लिए 66 फीसदी और अधिक गंभीर बीमारी में 85 फीसदी तक प्रभावी पाई गई है। ये एक खुराक वाली वैक्सीन है और इसकी कीमत भारत में 700 से 750 रुपये के बीच हो सकती है।
  • नोवावैक्स की वैक्सीन मूल कोरोना वायरस के खिलाफ 96.4 फीसदी और यूके स्ट्रेन के खिलाफ 86.3 फीसदी असरदार साबित हुई है। यह दो खुराक वाली वैक्सीन है और इसकी कीमत 200 से 250 रुपये के बीच हो सकती है। 
  • जायडस कैडिला और भारत बायोटेक की इंट्रानेजल वैक्सीन के असर और कीमत के बारे में अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इंट्रानेजल वैक्सीन के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य वैक्सीनों के मुकाबले यह काफी किफायती होगी।

जानिए भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता के बारे में

भारत में कोरोना वायरस महामारी के आने से पहले तीन बड़ी कंपनियां विभिन्न तरीकों के टीकों का उत्पादन कर रही थीं। ये कंपनियां हैं सीरम संस्थान, भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई। ये तीनों कंपनियां हर साल विभिन्न वैक्सीनों की करीब 2.3 अरब खुराकों का उत्पादन कर रही थीं। कोरोना के खिलाफ पहली स्वदेशी वैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक की उत्पादन क्षमता 1.25 करोड़ खुराक प्रति माह है। कंपनी ने इसे एक साल में बढ़ा कर 50 करोड़ प्रति माह करने के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है। 

सीरम संस्थान ने अप्रैल 2020 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका के साथ कोविशील्ड वैक्सीन के उत्पादन का करार किया था। इसके तहत एक अरब खुराकों का ऑर्डर दिया गया था। इसके अलावा कोवाक्स (COVAX) के लिए 20 करोड़ खुराकों का करार भी किया है। भारत की 90 फीसदी वैक्सीन की आपूर्ति सीरम संस्थान से ही होती है। संस्थान की विनिर्माण क्षमता 6.5 से सात करोड़ खुराक प्रति माह तक है, जिसे 10 करोड़ खुराक तक करने के लिए संस्थान ने तीन हजार करोड़ रुपये के अनुदान का अनुरोध किया है।

स्पुतनिक वी वैक्सीन के बारे में बात करें तो रूसी प्रत्यक्ष निवेश फंड (आरडीआईएफ) ने डॉ. रेड्डीज लैब के साथ वैक्सीन की 10 करोड़ खुराकों के आयात और वितरण के लिए सौदा किया है। इसके अलावा आरडीआईएफ ने कई भारतीय कंपनियों के साथ वैक्सीन उत्पादन के लिए करार किया है। इनमें डॉ. रेड्डीज लैब के अलावा हेटेरो फार्मा, विक्रो बायोटेक, ग्लैंड फार्मा और स्टेलिस बायोफार्मा के नाम शामिल हैं। जानकारी के अनुसार ये कुल मिलाकर स्पुतनिक वी वैक्सीन की सालाना 85 करोड़ खुराकों का उत्पादन करेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed