Coronavirus: इन दो दवाओं की कालाबाजारी रोकने में जुटी सरकार, दवा कारोबारियों को दिए ये निर्देश
Coronavirus: स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई इस बैठक में मौजूद दवा उद्योग से जुड़े लोगों ने अमर उजाला को बताया कि बैठक में दवा उद्योग के कारोबारियों ने यह अनुरोध किया कि कुछ प्रमुख दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि पिछली बार महामारी के दौरान सरकार ने दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था...
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कोविड संक्रमण (Coronavirus) के फिर से बढ़ने की आशंकाओं के बीच भारत ने इससे निपटने के लिए एहतियाती कदम उठाना शुरू कर दिए हैं। केंद्र सरकार जीवन रक्षक दवाइयों के मैनेजमेंट में जुट गई है। ताकि जरूरत के समय लोगों को पिछली बार की तरह दवाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़े। वहीं दवाईयों की कालाबाजारी न हो सके, इसी सिलसिले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख भाई मंडाविया ने कोविड-19 प्रबंधन की तैयारी के लिए दवा उत्पादन कंपनियों के साथ एक बैठक की। बैठक में फार्मा कंपनियों को निर्देश दिया गया कि कोरोना के संक्रमण पर नजर रखें और सुनिश्चित करें कि जरूरत पड़ने पर जरूरी दवाओं की किल्लत न हो। उनसे पूरा स्टॉक रखने और सप्लाई चेन को निर्बाध बनाने को भी कहा गया।
स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई इस बैठक में मौजूद दवा उद्योग से जुड़े लोगों ने अमर उजाला को बताया कि बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दवाओं की मांग में वृद्धि होने की स्थिति में तैयारी की समीक्षा के लिए मंत्री के साथ चर्चा की गई। बैठक में दवा उद्योग के कारोबारियों ने यह अनुरोध किया कि कुछ प्रमुख दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि पिछली बार महामारी के दौरान सरकार ने दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार के इस तरह के फैसले से भारत के दवा उद्योग की छवि को नुकसान पहुंचता है। सरकार दवाओं के निर्यात आदि से जुड़े फैसले हितधारकों के सलाह-मशविरे के बाद ले।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने दवा उद्योग से जुड़े लोगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर नजर रखने और सक्रिय दवा सामग्री के साथ-साथ कोविड प्रबंधन के लिए आवश्यक दवाओं के फॉर्म्युलेशन के उत्पादन और उपलब्धता की बारीकी से निगरानी करने का भी निर्देश दिया। दवा कंपनियों ने आश्वस्त किया कि वे कोविड दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने में सक्षम होंगी। बैठक में दवा उद्योग के प्रतिनिधियों में इंडियन फार्मास्यूटिकल्स एलायंस के महासचिव सुदर्शन जैन, इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विरंचि शाह, अकुम्स फार्मास्यूटिकल्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक संजीव जैन भी बैठक में शामिल हुए।
इन दवाओँ पर है सरकार की निगरानी
इधर, दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने चीन समेत अनेक देशों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के मद्देनजर यहां इससे निपटने के लिए पीपीई किट, मास्क, वेंटिलेटर और पेरासिटामोल जैसी कुछ दवाओं आदि के निर्यात पर कड़ी निगरानी रखना शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य संक्रमण के मामले बढ़ने की स्थिति में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, हम इन सभी उत्पादों के निर्यात पर लगातार नजर रख रहे हैं। हम उचित निर्णय के लिए हालात की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि इस समय स्थिति चिंताजनक नहीं है। लेकिन हमें हर तरह की स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए और उसके लिए हमें अपनी घरेलू जरूरतों का ध्यान रखना होगा।
उन्होंने कहा, हमने पीपीई किट, सिरिंज, दस्ताने, रेमडेसिवीर और पैरासिटामोल जैसी कुछ दवाओं आदि उत्पादों पर निगरानी के उद्देश्य से दैनिक आधार पर आंकड़े जमा करना शुरू कर दिया है। यह मुद्दा हाल में मंत्रालयों की एक बैठक में सामने आया, जिसमें इस स्थिति से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया गया। बैठक में वाणिज्य मंत्रालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, स्वास्थ्य एवं कपड़ा मंत्रालयों समेत विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। सरकार ने महामारी से निपटने के लिए 2020 में पीपीई किट, सैनिटाइजर, दस्ताने, परीक्षण किट, सिरिंज, रेमडेसिवीर और अन्य दवाओं समेत विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी।
चीन में कोविड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है और लोगों को भारत में भी एक और कोविड लहर की आशंका सताने लगी है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को आगाह किया कि देश में अगले 40 दिन अहम होंगे और जनवरी में भारत में कोविड-19 के मामले बढ़ सकते हैं। सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से तैयारी रखने को कहा है। प्रधानमंत्री मोदी और स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया मामले बढ़ने की किसी भी संभावित स्थिति से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए बैठक कर चुके हैं।