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कोरोना का कहर: नाइट कर्फ्यू के नाम पर साइकोलॉजिकल पिल्स दे रही सरकार

Thu, 08 Apr 2021 11:02 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 08 Apr 2021 11:02 PM IST
सार

  • ताकि लोगों को लगे कि सरकारें कुछ कर रही हैं
  • अगले दो सप्ताह कोविड-19 संक्रमण के लिहाज से महत्वपूर्ण
  • इस बार कोविड-19 युवाओं को तेजी से बना रहा है शिकार

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Coronas havoc: Government giving Psychological Pills in the name of Night Curfew
night curfew - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्या कोविड-19 संक्रमण से बचने के लिए सरकारों द्वारा लगाया जा रहा नाइट कर्फ्यू साइकोलॉजिक पिल्स है? केन्द्र सरकार के रणनीतिकार इस सवाल को मुस्कराकर टाल जाते हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी केवल इतना कहते हैं कि आखिर कुछ सोच-समझ कर ही ऐसा निर्णय लिया जा रहा है। एम्स में महामारी रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. आनंद कृष्णन का कहना है कि क्या बताएं, यह वास्तव में एक साइकोलॉजिकल पिल्स ही है।
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डॉ. कृष्णन का कहना है कि नाइट कर्फ्यू  लगाने से कोविड-19 के संक्रमण का प्रसार रोकने से कोई खास लेना-देना नहीं है। इसका एक कारण है। रात दस बजे तक शहरों की 90 प्रतिशत आबादी अपने घरों में लौट आती है। कुछ लोग घर आने के रास्ते में होते हैं।  डॉ. कृष्णन का कहना है कि रात में नौ बजे के बाद बार, डांस क्लब, पार्टी, शादी-विवाह जैसे स्थल पर या इंडिया गेट जैसी जगहों पर लोग होते हैं। यह संख्या वैसे भी बहुत कम होती है। 
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नाइट कर्फ्यू के जरिए सभी को एक संदेश जाता है कि वह सारा काम जल्दी निबटाकर घर चले जाएं, लेकिन यह कहना कि इससे कोविड-19 के प्रसार में कमी आएगी, मुझे नहीं लगता कि सही है। डॉ. कृष्णन के अनुसार इसके जरिए सरकार बताना चाहती है कि वह कुछ कर रही है।
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लॉकडाउन का डर सताएगा और वे सावधानी बरतेंगे

वैशाली के मैक्स अस्पताल में कोविड-19 वार्ड में काम कर रहे डॉ. अश्विन चौबे का कहना है कि नाइट कर्फ्यू  लोगों के लिए एक चेतावनी के सिवा कुछ नहीं है। वे कहते हैं कि पिछले साल जब संक्रमण फैलना शुरू हुआ तो केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन लगा दिया था। इस लॉकडाउन का लोगों में डर अभी भी समाया हुआ है। वहीं दूसरी तरफ लोग रोजी-रोटी, कामकाज के चक्कर में लापरवाही भी बरत रहे हैं। इसलिए सरकारें परोक्ष रूप से लोगों को संदेश दे रही हैं कि वह गंभीर हो जाएं। सावधानी बरतें, नहीं तो लॉकडाउन लगा देगी। 

कामगारों के लिए भी संदेश 
डॉ. अश्विन कहते हैं मुझे तो कामगारों के लिए भी एक संदेश लग रहा है। सरकार संदेश दे रही है कि कोविड का प्रसार बढ़ा तो लॉकडाउन लगाना मजबूरी होगी। इसलिए जो अपने गांव-घर जाना चाहते हैं, पहले ही चले जाएं। पिछले साल की तरह अफरा-तफरी का माहौल न बन पाए।

पिछले साल से इस साल के संक्रमण में क्या फर्क है?

डॉ. कृष्णन के अनुसार उनके पास अभी इसका कोई बड़े पैमाने पर आंकड़ा नहीं है, लेकिन चिकित्सक बिरादरी की रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 के तेजी से वैरिएंट आ रहे हैं। दूसरे इस साल कोविड युवाओं को तेजी से अपना शिकार बना रहा है। युवा न केवल संक्रमित हो रहे हैं, बल्कि गंभीर स्थिति तक पहुंच रहे हैं।
डॉ. अश्विन चौबे का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस साल लोगों में पैनिक होने की बहुत स्थिति नहीं है। होम क्वारंटीन या सेल्फ आइसोलेशन ने काफी राहत दी है। हालांकि संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है।

जल्दी खत्म नहीं होगा वायरस

डॉ. अश्विन और डॉ. कृष्णन दोनों का मानना है कि वायरस इतनी जल्दी समाप्त होने वाला नहीं है। आगे भी संक्रमण का खतरा बना रहेगा। इसके नए-नए वैरिएंट आते रहेंगे। डॉ. कृष्णन और डॉ.अश्विन दोनों का मानना है कि अभी भारत में उपलब्ध वैक्सीन कोविड-19 के संक्रमण से बचाने में सहायता करेगी, लेकिन यह कोविड की दवा नहीं है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी होगी। 
नीति आयोग के सदस्य और कोविड-19 टास्क फोर्स के अध्यक्ष डा. विनोद कुमार पाल तो कहते हैं कि मास्क लगाना, हाथ धोना वैक्सीन जैसा ही कारगर है।

अगले दो सप्ताह महत्वपूर्ण

डॉ. आनंद कृष्णन का कहना कि अगले दो सप्ताह में कोविड-19 संक्रमण का प्रसार काफी बढ़ सकता है। इसलिए देश के लोगों को सावधान रहना चाहिए। बताते हैं अप्रैल के अंत तक संक्रमण पर काबू पाने की स्थिति आ सकती है। बताते हैं इस दौरान यदि सतर्कता नहीं बरती गई तो स्थिति भयावह हो सकती है।

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