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कोरोना वैक्सीन: नेसल, वन-शॉट और पैसिव वैक्सीन में क्या है अंतर, कैसे करती हैं काम?
Sat, 26 Sep 2020 12:00 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sat, 26 Sep 2020 12:00 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कोरोना वैक्सीन बनाने की होड़ में, कई फार्मा कंपनियां असरदार रास्ते की तलाश कर रही हैं। जॉनसन एंड जॉनसन कंपनीय सिंगल-शॉट वैक्सीन का परीक्षण कर रही है, जबकि पारंपरिक तौर पर उम्मीदवारों को दो शॉट्स दिए जाते हैं। वहीं भारत बायोटेक ने इंट्रानेसल वैक्सीन बनाने का एलान किया है, जो इसे इंट्रामस्क्युलर लोगों से अलग करेगा। आइए इन गैर पारंपरिक वैक्सीन परीक्षणों के बारे में डिटेल से जानते हैं...
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नेसल वैक्सीन
ज्यादातर कोरोना की वैक्सीन इंट्रामस्क्युलर तरीके से लगाई जाती हैं, यानि कि मांसपेशियों में इंजेक्शन के जरिए वैक्सीन दी जाती है। इस प्रक्रिया में मेडिकल प्रोफेशनल्स और उपकरणों की जरूरत पड़ती है। जबकि इंट्रानेसल वैक्सीन में इन सबकी जरूरत नहीं पड़ेगी और इसकी लागत भी कम होगी।
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इस तरह की वैक्सीन के लिए भारत बायोटेक ने वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन से लाइसेंस समझौता लिंक कराया लिया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन कृष्णा ईला ने कहा कि हमें इस अभिनव वैक्सीन के सहयोग करने पर गर्व है। हम कल्पना करते हैं कि इस वैक्सीन की एक बिलियन खुराक तैयार की जाएंगी।
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वन-शॉट वैक्सीन
मॉडर्ना, पीफाइजर और एस्ट्राजेनेका की ओर से बनाई जा रही है सभी वैक्सीन डबल-शॉट वैक्सीन हैं, जो किसी मरीज में हफ्तों के अंतराल में दी जाती हैं। जॉनसन एंड जॉनसन और भारत बायोटेक की इंट्रानेसल वैक्सीन सिंगल-शॉट वैक्सीन होंगी।
जेएंडजे कोविड-19 वैक्सीन के रिसर्चर डॉ डैन बारूच का कहना है कि सिंगल-शॉट वैक्सीन के लाभ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान और वैश्विक महामारी नियंत्रण के संदर्भ में संभावित रूप से गहरा है। परीक्षण में देखा गया है कि जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी की वैक्सीन मरीज में मजबूत इम्यूनिटी बना रही है।
पैसिव वैक्सीन
कोविड-19 के लिए पैसिव वैक्सीन विकसित करना एक संभावना है क्योंकि वैज्ञानिकों ने नए कोरोना वायरस के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी एंटीबॉडी की पहचान की है। सक्रिय टीकाकरण की तरह की जगह पैसिव टीकाकरण में बनी बनाई एंटीबॉडीज प्रशासन को शामिल किया जाता है, जो कुछ दिन खत्म हो जाते हैं।
इस तरह के तंत्र में प्लाज्मा थेरेपी काम करती है। हालांकि वैज्ञानिक इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या इसका उपयोग उन लोगों के टीकाकरण के लिए किया जा सकता है जो अभी तक कोरोना से संक्रमित नहीं है।