विमान में बैठे यात्रियों में फैल सकता है वायरस लेकिन संक्रमण का जोखिम कम - शोध
कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में एक चार घंटे और 40 मिनट के अंतरराष्ट्रीय विमान में दो लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इस संभावना की पुष्टि की है कि किसी विमान में वायरस फैल सकता है लेकिन उसके संक्रमण का जोखिम काफी कम होगा।
उस विमान में नौ मार्च को 102 यात्री सफर कर रहे थे, जिनमें से सात यात्री को कोरोना वायरस था। कुल सात संक्रमित लोगों में से चार लोग उड़ान के दौरान सिम्प्टोमैटिक थे। सभी यात्रियों में से किसी ने भी मास्क नहीं पहना हुआ था।
फ्रेंकफुर्ट गोइथ यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल वायरोलॉजी की निदेशक सैंड्रा सिसेक ने कहा कि जब हमने इन यात्रियों का इंटरव्यू लिया ये जानने के लिए कि संक्रमण कितना फैला, हमें उम्मीद थी संक्रमण के संदिग्ध मामलों की सूची काफी लंबी होगी और विमान में सिम्प्टोमैटिक मरीज ज्यादा थे। इसके अलावा मरीजों ने मास्क भी नहीं पहना हुआ था।
सिसेक इस शोध के लेखकों में से एक हैं, जो मंगलवार को जामा ओपन नेटवर्क में छापी गई। सेसिक का कहना है कि विमान के अंदर हवा संचार की वजह से वायरस की संक्रमण दर काफी कम है और अगर मास्क पहना हुआ होगा तो इससे संक्रमण की दर और कम हो जाएगी।
विमान में जिन सात लोगों को कोरोना था, उन्हें ये संक्रमण होटल के मैनेजर के जरिए हो सकता है। गंतव्य हवाई अड्डे पर हमने यात्रियों का मेडिकल मूल्यांकन किया, जिसमें कोरोना वायरस का टेस्ट शामिल था। इसके अतिरिक्त हमने सभी यात्रियों से चार-पांच हफ्ते बाद टेलीफोन के जरिए संपर्क किया और संगठित साक्षात्कार लिए।
कुल मिलाकर, अन्य 78 यात्रियों (91%) में से 71 जो उड़ान में समूह के संपर्क में थे, उन्होंने साक्षात्कार पूरा किया और उड़ान के छह से नौ सप्ताह बाद इनमें से 13 व्यक्तियों से सीरम के नमूने प्राप्त किए गए। विश्लेषण बताता है कि इस समूह से संपर्क में आने वाले दो लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई।
हालांकि शोधकर्ताओं का मानना है कि ये संक्रमण उड़ान के पहले और बाद में कभी भी हो सकता है। कई और यात्री नहीं आए, इसलिए ये कह पाना मुश्किल है कि उनमें कोरोना के लक्षण है या नहीं। विमान में वायरस फैलने का एक मुख्य कारण बंद दरवाजे हो सकते हैं।
हालांकि लोग बोलते समय भी माइक्रोस्कोपिक वायरल पार्टिकल्स सांस के जरिए बाहर छोड़ते हैं लेकिन इसका खतरा तब बढ़ जाता है जब, कोई खांसा या छींका हो। ऐसी स्थितियों में लंबे समय वाली उड़ानें ज्यादा खतरनाक हो सकती है।