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डीएनए पर काम करने वाला होगा देश का तीसरा टीका
Thu, 04 Feb 2021 07:01 AM IST
देव कश्यप
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 04 Feb 2021 07:01 AM IST
सार
- तीन डोज वाला पहला स्वदेशी टीका होगा।
- तीसरा मानव परीक्षण अंतिम चरण में, अगले माह तक मिल सकती है मंजूरी।
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay/Amarujala
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विस्तार
कोरोना वायरस के खात्मे के लिए देश ने तीसरा टीका तैयार कर लिया है। देश को तीसरा कोरोना टीका के रूप में डीएनए पर काम करने वाला मिलेगा। यह देश का पहला डीएनए आधारित कोरोना टीका है जिसे भारतीय वैज्ञानिकों ने महीनों तक चले अध्ययन के बाद तैयार किया है।
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गौर करने वाली बात है कि इस टीके की तीन-तीन खुराक लेने के बाद ही शरीर में कोरोना विषाणुओं के खिलाफ पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी विकसित हो सकती हैं। कोवाक्सिन के बाद यह दूसरा स्वदेशी टीका होगा जिसे अहमदाबाद स्थित जाइडस कैडिला कंपनी ने तैयार किया है। गौर करने वाली बात है कि इसकी खोज भी एनआईवी पुणे और डीबीटी विभाग के वैज्ञानिकों ने साथ में मिलकर की है।
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जाइडस कैडिला का डीएनए आधारित जेडवाईकोवी-डी टीका पर अभी तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। दिल्ली सहित देश के 28 अस्पतालों में 28,216 लोगों पर परीक्षण किया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले माह के शुरुआती सप्ताह तक यह टीका सामने आ सकता है जिसके बाद भारत सरकार आपातकालीन शर्तों पर इस्तेमाल की अनुमति देगी। इतना ही नहीं जाइडस के साथ-साथ रूस का बहुचर्चित स्पुतनिक टीका भी देश को मिल सकता है। इन दोनों ही टीका को 2 से 8 डिग्री तापमान पर रखना होगा।
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केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के अधीन विशेषज्ञ समिति (एसईसी) के अनुसार, बीते तीन जनवरी को जाइडस कैडिला के टीका पर तीसरे चरण के परीक्षण की अनुमति दी गई है। कई केंद्रों पर इसका परीक्षण शुरू हो चुका है। दिल्ली के वजीराबाद स्थित डिवाइन अस्पताल के डॉ. रोहित जैन ने बताया कि तीसरे चरण के परीक्षण को शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस टीका के आने के बाद लोगों को पूरी तरह से सुरक्षा कवच लेने में तीन डोज लेना जरूरी होगा।
दरअसल 16 जनवरी से देश में कोरोना वायरस का टीकाकरण चल रहा है। राज्यों को कोवाक्सिन और कोविशील्ड टीका की 2.28 करोड़ डोज उपलब्ध कराई गई हैं। अब तक 41 लाख लोगों को डोज दी जा चुकी है। इन दोनों ही टीका की दो-दो डोज लेना अनिवार्य है लेकिन जाइडस कैडिला कंपनी के नए टीके की एक व्यक्ति को तीन डोज लेना जरूरी होगा।
जरूरत के मुताबिक टीके में किया जा सकता है बदलाव
जाइडस कैडिला कंपनी ने बताया कि कोरोना वायरस के खिलाफ डीएनए आधारित टीके पर कामयाबी हासिल हुई है। देश के दुर्लभ स्थानों तक इस टीका को पहुंचाने पर भी जोर दिया है। इस टीके को बनाने के लिए सबसे कम जैवसुरक्षा की आवश्यकता है। इतना ही नहीं, अगर आगामी दिनों में कोरोना का वायरस म्युटेड भी होता है तो कुछ ही सप्ताह में इस तकनीक में बदलाव कर उसके खिलाफ भी क्षमता विकसित की जा सकती है। वहीं डीबीटी विभाग की सचिव डॉ. रेणु स्वरुप का कहना है कि देश में पहली बार डीएनए तकनीक को लेकर एक प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। भारतीय वैज्ञानिकों की जीत का गवाह बनने वाला यह टीका स्पाइक प्रोटीन पर असर दिखाएगा।
चार टीकों पर एक साथ चल रहा काम : स्वास्थ्य मंत्रालय
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अभी चार तरह के कोरोना टीका पर काम चल रहा है जिनमें जाइडस और स्पुतनिक अंतिम चरण के परीक्षण में चल रहे हैं। इन दोनों ही टीका में काफी समानताएं भी हैं लेकिन एक के लिए तीन तो दूसरी की दो डोज की आवश्यकता होगी। इनके अलावा बॉयोलॉजिकल ई और जिनेवा कंपनी के दो टीका भी मानव परीक्षण में चल रहे हैं। इनमें से एक एम आरएनए तकनीक पर आधारित है।