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कोरोना महामारी: दक्षिण एशिया के सबसे बड़ा अध्ययन में खुलासा, भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर 21 फीसदी मौतें

Thu, 09 Sep 2021 06:01 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 09 Sep 2021 06:01 AM IST
सार

इस साल अप्रैल से जून माह के बीच एम्स में 2080 मरीज भर्ती हुए थे जिनमें से 406 मरीजों की मौत दर्ज की गई है। कोरोना संक्रमण के चलते हाइपोक्सिया होने पर मरीजों को बचाना बहुत मुश्किल हो रहा है।

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Corona Pandemic 21 percent deaths due to corona within 48 hours of being admitted in Delhi AIIMS
कोरोना की वैक्सीन लगवाती युवती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर को लेकर दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा चिकित्सकीय अध्ययन सामने आया है। नई दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों ने दो हजार से भी अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों पर अध्ययन करने के बाद पता चला कि संस्थान में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर सर्वाधिक 21 फीसदी मौतें दर्ज की गई हैं। करीब 89 मरीजों की हालात इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों को दो दिन का समय भी नहीं मिल पाया।

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इस साल अप्रैल से जून माह के बीच एम्स में 2080 मरीज भर्ती हुए थे जिनमें से 406 मरीजों की मौत दर्ज की गई। इन कोरोना मरीजों की केस हिस्ट्री से पता चला है कि कोरोना संक्रमण के चलते हाइपोक्सिया होने पर मरीजों को बचाना बहुत मुश्किल हो रहा है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जब मरीज के वेंटिलेटर पर रहते हुए परेशानी होती है। दिल्ली एम्स में वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों में 86 फीसदी की मौत हो चुकी है।
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ऑक्सीजन की कमी से 37 फीसदी की मौत
एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, ऑक्सीजन की कमी वाले मरीजों में मृत्युदर 37 फीसदी तक रही। 2080 में से 1067 मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। इनमें से 63 फीसदी मरीजों को ही बचा सके। पहली लहर में मृत्युदर करीब 1.14 फीसदी थी, दूसरी लहर में 19 फीसदी पार कर गई।
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सात दिन में भर्ती हुए तो बच सकती है जान
मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित एम्स के नौ अलग अलग विभागों के इस संयुक्त अध्ययन में डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला है कि कोरोना की चपेट में आने के पहले सप्ताह के दौरान अगर मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाता है तो मृत्यु की आशंका को कम किया जा सकता है। एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि पहले अनुभव कम था लेकिन अब अब काफी कुछ जाना जा चुका है। एम्स के कैंसर एनेस्थिसिया विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा भटनागर की निगरानी में यह अध्ययन हुआ है।


पहली बार राज्यों के पास टीके का भंडारण छह करोड़ के करीब
पहली बार राज्यों के पास वैक्सीन का भंडारण छह करोड़ के करीब पहुंच चुका है। बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक दिन में 8.02 लाख से अधिक खुराक की नई खेप जारी की है। इस माह साढ़े तीन करोड़ से अधिक वैक्सीन राज्यों को मिल चुकी हैं। इसी के साथ ही वैक्सीन का कुल भंडारण बढ़कर 5.64 करोड़ से अधिक हो चुका है।

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