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कोरोना का बढ़ता कहर: 100 में से 20 बच्चों में संक्रमण का खतरा, कर्नाटक-दिल्ली ने भी किया सचेत
Wed, 19 May 2021 03:33 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 19 May 2021 03:33 AM IST
सार
- तीसरी लहर पर फिलहाल कोई जानकारी नहीं, बच्चों में पहले से ही संक्रमण की जानकारी दी
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डॉ. वीके पॉल
- फोटो : ANI
विस्तार
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल का कहना है कि बच्चों में कोरोना का संक्रमण भी व्यस्कों की तरह रहता है। करीब 20 से 22 फीसदी तक बच्चों में संक्रमण का खतरा है जिसे आईसीएमआर भी एक अध्ययन में पुष्टि कर चुका है। यानि 100 में से 20 बच्चों को संक्रमण का खतरा हो सकता है। हालांकि डॉ. पॉल ने कहा कि बच्चों को बचाने के लिए तरीके वही हैं जिसका व्यस्कों को पालन करना है। पैनिक होने की जगह अगर लोग अपना और पूरे परिवार का नियमों के अनुसार ख्याल रखें तो इससे बचा जा सकता है।
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हालांकि डॉ. पॉल ने तीसरी लहर में बच्चों के खतरे पर कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि ऐसी लहर आएगी या नहीं? इसके बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि सिंगापुर से कोई स्ट्रेन आया है या नहीं? इसके बारे में अभी जानकारी नहीं है।
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दरअसल, मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सिंगापुर से आए किसी स्ट्रेन का हवाला देते हुए बच्चों का ध्यान रखने की अपील की थी। हालांकि उन्होंने सिंगापुर से आए किसी स्ट्रेन का नाम उजागर नहीं किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस राज्य के पास एक भी लैब जीनोम सिक्वेसिंग की न हो और जिन्होंने अब तक 50 लाख में से 10 हजार सैंपल की जीनोम सिक्वेसिंग तक नहीं कराई हो, ऐसे राज्य के मुख्यमंत्री को इस तरह कम जानकारी के साथ नहीं बोलना चाहिए।
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वहीं कर्नाटक में भी बच्चे काफी कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली की तरह यहां भी संक्रमण की तीसरी लहर दिखाई दे रही है। पहली लहर के दौरान 9 मार्च से 25 सितंबर 2020 के बीच 10 साल से छोटे बच्चों के 19,378 केस और 11 से 20 साल के बच्चों के 41,985 मामले सामने आए थे लेकिन बीते एक से 16 मई के बीच अब तक 19 हजार बच्चे कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। 10 साल की आयु के बच्चों में पेट दर्द की समस्या, चकत्ते और अन्य त्वचा रोग के लक्षण भी मिल रहे हैं।
इसी को लेकर प्रेस कान्फ्रेंस में पूछे गए सवाल पर डॉ. वीके पॉल ने कहा कि आईसीएमआर समय-समय पर बच्चों को लेकर जानकारी दे रहा है। बच्चों को वैक्सीन के लिए हाल ही में भारत बायोटेक को भी 18 वर्ष से कम आयु वालों में परीक्षण की अनुमति दी है। अगले दो सप्ताह में यह परीक्षण भी शुरू हो जाएगा। इसलिए लोगों को इस वक्त अपने परिवार का ध्यान रखने की आवश्यकता अधिक है।