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Old Vehicle: पुराने वाहनों को हटाने पर विवाद, आप ने कहा- कार कंपनियों को लाभ पहुंचाने का काम कर रही सरकार

Wed, 02 Jul 2025 07:36 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 02 Jul 2025 07:36 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने 10 वर्ष से पुराने डीजल वाहनों और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को सड़कों से हटाने का निर्णय लिया है। दावा है कि इससे अकेले दिल्ली में 62 लाख वाहनों पर असर पड़ेगा। विपक्षी दल इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। 

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Controversy over removal of old vehicles, AAP says Government is working to benefit car companies
मनीष सिसोदिया - फोटो : X/AAP

विस्तार

वायु प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 वर्ष से पुराने डीजल वाहनों और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को सड़कों से हटाने का निर्णय लिया है। दावा है कि इससे अकेले दिल्ली में 62 लाख वाहनों पर असर पड़ेगा। दिल्ली सरकार ने इसे पुरजोर तरीके से लागू करते हुए दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों पर पुराने वाहनों को ईंधन न देने का आदेश जारी कर दिया है। ऐसे वाहनों को मौके पर जब्त किया जा रहा है। इन वाहनों के मालिकों पर दस हजार का जुर्माना भी किया जा रहा है।

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जाहिर है कि इससे लोग अपने पुराने वाहनों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। लोगों को नए वाहनों को खरीदना पड़ेगा और इसका सीधा लाभ कार-मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनियों को होगा। सरकार के इस फैसले से लोगों में नाराजगी है, वहीं सरकार के इस दावे पर विपक्ष ने भी हमलावर रुख अपनाया है।     
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मनीष सिसोदिया ने बोला हमला
आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने बुधवार को कहा कि वाहनों को केवल उनके पुराने होने के आधार पर प्रदूषण पैदा करने वाला करार नहीं दिया जा सकता। यह गाड़ियों की स्थिति पर निर्भर होती है। कई बार उचित देखरेख न होने पर नई गाड़ियों से भी प्रदूषण होने लगता है, वहीं अच्छी देखरेख में रखने पर पुराने वाहन भी प्रदूषण नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कार कंपनियों को जानबूझकर लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे लोगों के हितों के साथ समझौता बताया। 
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मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार के इस आदेश से दिल्ली की सड़कों से 62 लाख वाहनों को हटना पड़ेगा। इसमें 40 लाख से ज्यादा दो पहिया और 20 लाख चार पहिया वाहन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के गरीब लोग अपने निजी इस्तेमाल के लिए छोटे-छोटे वाहन रखते हैं। उन्हें पांच-दस किलोमीटर तक की ही यात्रा करनी होती है, लेकिन सरकार के इस आदेश से इन परिवारों पर एक से दस लाख रूपये तक का बोझ डाल दिया है। 


दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मारलेना ने कहा कि बीजेपी सरकार का यह आदेश निराधार और तर्कहीन है। किसी गाड़ी की उम्र और उसके द्वारा हो रहे प्रदूषण से कोई लेना-देना नहीं है। अगर गाड़ियों को अच्छे से मेंटेन किया जाए, तो वे पुरानी होने के बावजूद प्रदूषण नहीं करतीं। गाड़ी पुरानी होने का मतलब यह नहीं कि वह अधिक इस्तेमाल की गई है। कई गाड़ियां सात साल में तीन लाख किलोमीटर चल चुकी होती हैं, जबकि कई 15 साल में भी 50,000 किलोमीटर से ज्यादा नहीं चली हों। ऐसे में सरकार का यह आदेश पूरी तरह गलत है। 

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