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SC: 'हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गैंगस्टर की रिहाई...', यूपी सरकार को 'सुप्रीम' निर्देश
Mon, 13 Jan 2025 04:24 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 13 Jan 2025 04:24 PM IST
सार
शीर्ष अदालत ने कहा, 'जहां तक 1938 अधिनियम की धारा 2 के तहत राहत से इनकार करने का सवाल है, हम राज्य सरकार की तरफ से पारित आदेश में कोई गलती नहीं पाते हैं। बीएनएसएस की धारा 473 का दायरा 1938 अधिनियम की धारा 2 से पूरी तरह अलग है।' इसलिए, शीर्ष अदालत ने आठ जनवरी को एक आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह बीएनएसएस की धारा 473 की उप-धारा (1) के तहत छूट देने के लिए याचिकाकर्ता के मामले पर 'जितनी जल्दी हो सके' विचार करे।
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Supreme Court
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 1993 के हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गैंगस्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू श्रीवास्तव की समयपूर्व रिहाई पर दो महीने के भीतर विचार करने का निर्देश दिया है। मामले में जस्टिस अभय एस ओका और नोंग्मीकापम कोटिस्वर सिंह की पीठ ने राज्य सरकार को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 473 की उपधारा (1) के तहत छूट की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया।
गैंगस्टर की याचिका की गई थी खारिज
बता दें कि, ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने संयुक्त प्रांत परिवीक्षा पर कैदियों की रिहाई अधिनियम, 1938 की धारा 2 के तहत राहत मांगी, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई। मामले में शीर्ष अदालत ने कहा कि 1938 अधिनियम की धारा 2 सीआरपीसी की धारा 432 या बीएनएसएस की धारा 473 से अधिक कठोर है। पीठ ने कहा कि जब तक राज्य सरकार यह निष्कर्ष दर्ज नहीं कर लेती कि वह दोषी के पिछले इतिहास या जेल में उसके आचरण से संतुष्ट है और यह कि वह अपराध से दूर रहेगा और रिहाई के बाद शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करेगा, तब तक दोषी को रिहा नहीं किया जा सकता।
गैंगस्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने जेल में काटी 28 साल की सजा
शीर्ष अदालत के आदेश में कहा गया है, 'चूंकि याचिकाकर्ता ने 28 साल से अधिक समय तक वास्तविक सजा काटी है, इसलिए याचिकाकर्ता के मामले पर विचार किया जाएगा और अधिकतम दो महीने के भीतर उचित आदेश पारित किया जाएगा। आदेश याचिकाकर्ता को सूचित किया जाना चाहिए।' पीठ ने संबंधित अदालत को निर्देश दिया - जिसे बीएनएसएस की धारा 473 की उप-धारा (2) के तहत अपनी राय देने का अधिकार है - राज्य के अनुरोध की प्राप्ति की तारीख से 15 दिनों के भीतर इसे अग्रेषित करने के लिए। पीठ ने कहा, 'हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि वह याचिकाकर्ता के मामले को 10 दिनों की अवधि के भीतर केंद्र सरकार की सहमति या अन्यथा के लिए तुरंत अग्रेषित करे... केंद्र सरकार का संबंधित प्राधिकारी चार सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय लेगा। प्रस्ताव को तुरंत संबंधित अदालत और केंद्र सरकार के संबंधित प्राधिकारी को इस आदेश की एक प्रति के साथ भेजा जाएगा।'
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कौन है गैंगस्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव?
ओम प्रकाश श्रीवास्तव, फिलहाल वर्तमान में बरेली सेंट्रल जेल में बंद हैं, ने अपनी समयपूर्व रिहाई पर निर्देश के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। गैंगस्टर कथित तौर पर कभी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का सहयोगी था और बाद में उसका दुश्मन बन गया। जांच एजेंसियों ने हत्या और अपहरण समेत 42 मामलों में वांछित ओम प्रकाश श्रीवास्तव को सिंगापुर में गिरफ्तार किया और 1995 में उसे भारत प्रत्यर्पित किया। 30 सितंबर, 2008 को गैंगस्टर को कानपुर की एक विशेष टाडा अदालत ने इलाहाबाद में 1993 में सीमा शुल्क अधिकारी एलडी अरोड़ा की हत्या के सिलसिले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। शुरुआत में उसे नैनी सेंट्रल जेल में रखा गया और फिर 11 जून, 1999 को उसे बरेली सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। सजा के खिलाफ उसकी अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि उसने 26 साल से अधिक जेल में बिताए हैं और जेल में उसका आचरण अच्छा रहा है, जिसके कारण उसे राज्य की नीति के अनुसार समय से पहले रिहाई मिलनी चाहिए।
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गैंगस्टर की याचिका की गई थी खारिज
बता दें कि, ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने संयुक्त प्रांत परिवीक्षा पर कैदियों की रिहाई अधिनियम, 1938 की धारा 2 के तहत राहत मांगी, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई। मामले में शीर्ष अदालत ने कहा कि 1938 अधिनियम की धारा 2 सीआरपीसी की धारा 432 या बीएनएसएस की धारा 473 से अधिक कठोर है। पीठ ने कहा कि जब तक राज्य सरकार यह निष्कर्ष दर्ज नहीं कर लेती कि वह दोषी के पिछले इतिहास या जेल में उसके आचरण से संतुष्ट है और यह कि वह अपराध से दूर रहेगा और रिहाई के बाद शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करेगा, तब तक दोषी को रिहा नहीं किया जा सकता।
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गैंगस्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने जेल में काटी 28 साल की सजा
शीर्ष अदालत के आदेश में कहा गया है, 'चूंकि याचिकाकर्ता ने 28 साल से अधिक समय तक वास्तविक सजा काटी है, इसलिए याचिकाकर्ता के मामले पर विचार किया जाएगा और अधिकतम दो महीने के भीतर उचित आदेश पारित किया जाएगा। आदेश याचिकाकर्ता को सूचित किया जाना चाहिए।' पीठ ने संबंधित अदालत को निर्देश दिया - जिसे बीएनएसएस की धारा 473 की उप-धारा (2) के तहत अपनी राय देने का अधिकार है - राज्य के अनुरोध की प्राप्ति की तारीख से 15 दिनों के भीतर इसे अग्रेषित करने के लिए। पीठ ने कहा, 'हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि वह याचिकाकर्ता के मामले को 10 दिनों की अवधि के भीतर केंद्र सरकार की सहमति या अन्यथा के लिए तुरंत अग्रेषित करे... केंद्र सरकार का संबंधित प्राधिकारी चार सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय लेगा। प्रस्ताव को तुरंत संबंधित अदालत और केंद्र सरकार के संबंधित प्राधिकारी को इस आदेश की एक प्रति के साथ भेजा जाएगा।'
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कौन है गैंगस्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव?
ओम प्रकाश श्रीवास्तव, फिलहाल वर्तमान में बरेली सेंट्रल जेल में बंद हैं, ने अपनी समयपूर्व रिहाई पर निर्देश के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। गैंगस्टर कथित तौर पर कभी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का सहयोगी था और बाद में उसका दुश्मन बन गया। जांच एजेंसियों ने हत्या और अपहरण समेत 42 मामलों में वांछित ओम प्रकाश श्रीवास्तव को सिंगापुर में गिरफ्तार किया और 1995 में उसे भारत प्रत्यर्पित किया। 30 सितंबर, 2008 को गैंगस्टर को कानपुर की एक विशेष टाडा अदालत ने इलाहाबाद में 1993 में सीमा शुल्क अधिकारी एलडी अरोड़ा की हत्या के सिलसिले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। शुरुआत में उसे नैनी सेंट्रल जेल में रखा गया और फिर 11 जून, 1999 को उसे बरेली सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। सजा के खिलाफ उसकी अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि उसने 26 साल से अधिक जेल में बिताए हैं और जेल में उसका आचरण अच्छा रहा है, जिसके कारण उसे राज्य की नीति के अनुसार समय से पहले रिहाई मिलनी चाहिए।