Bharat Ratna: 'भारत रत्न' और 2024 के आम चुनाव का क्या कनेक्शन है? राजनीतिक दलों के बदल रहे सियासी समीकरण
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राजनीति का भी चश्मा है, जिस रंग का चश्मा उसी रंग के दृश्य। 'भारत रत्न' का सम्मान पाने वालों के नाम आने के बाद अब यह कहावत सटीक बैठने लगी है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पीवी नरसिम्हा राव और कृषि सुधार के मर्मज्ञ एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न अलंकरण प्रदान करने की जानकारी दी है। प्रधानमंत्री की इस घोषणा से राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी गदगद हैं। जयंत चौधरी ने दादा को भारत रत्न मिलने की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि आपने (प्रधानमंत्री) दिल जीत लिया है। जयंत के इस आभार को उत्तर प्रदेश में राजनीति के बदल रहे समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
8 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ की थी। मनमोहन सिंह पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्तमंत्री और भारत में आर्थिक सुधार कार्यक्रम का सूत्रपात करने वालों में हैं। इसके ठीक एक दिन बाद आंध्र प्रदेश के दिग्गज नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को भारत रत्न की सूचना आती है। इस तरह से प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने पिछले 15 दिन के भीतर पांच विभूतियों (स्व. कर्पूरी ठाकुर, लालकृष्ण आडवाणी, स्व. चौधरी चरण सिंह, स्व. एमएस स्वामीनाथन, स्व. पीवी नरसिंहा राव) को भारत रत्न अलंकरण के लिए चुने जाने की जानकारी दी है।
भारत रत्न का अलंकरण और 2024 लोकसभा चुनाव
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। सोनिया गांधी ने कहा कि वह इस फैसले का स्वागत करती है। हालांकि प्रस्ताव लोकसभा चुनाव 2024 से दो महीने पहले हुई इस घोषणा को राजनीतिक दृषिट से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभूतियों का सम्मान और चुनाव में तालमेल कोई नई बात नहीं है। यूपीए सरकार ने भी चुनाव नजदीक आने पर सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न के लिए नाम प्रस्तावित करके चौंकाया था। लखनऊ में अमौसी हवाई को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर रखने की राजनीति भी तब तत्कालीन रालोद मुखिया चौधरी अजीत सिंह से तालमेल बनाने के लिए हुई थी। माना जा रहा है कि 2024 में भारत रत्न के लिए घोषित हुए नाम मौजूदा सरकार को बड़ा फायदा पहुंचा जा सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुझे राजनीति की अधिक समझ नहीं है, लेकिन कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पाला बदल लेने का नैतिक बहाना मिल गया था। वरिष्ठ पत्रकार संजय वर्मा कहते हैं कि कर्पूरी ठाकुर के नाम की घोषणा जातिगत जनगणना और जातिवाद की राजनीति के काट में बड़ी भूमिका निभाएगी।
भारत रत्न देगा देश के किसानों को संदेश
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को किसानों का मसीहा कहा जाता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में चौधरी चरण सिंह काफी सम्मान है। वह अब तक के सबसे बड़े जाट नेता हैं। जाट उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली में बड़ी संख्या में हैं। वहीं दक्षिण भारत से आने वाले एमएस स्वामीनाथन पुलिस अधिकारी थे, लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती-खलिहानी को चुन लिया। स्वामीनाथन ने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए बहुत काम किया है। 2020 में पंजाब समेत कई राज्यों के किसानों ने बड़ा आंदोलन, धरना-प्रदर्शन करके केंद्र सरकार को घुटनों पर ला दिया था। तब से किसान लगातार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली से सटे नोएडा में 8 फरवरी को किसानों के प्रदर्शन ने राज्य सरकार के साथ-साथ सरकार के भी कान खड़े कर दिए थे। ऐसे में माना जा रहा है कि चौधरी चरण सिंह के नाम की घोषणा से उत्तर भारत के किसानों में अच्छा संदेश जाएगा। एमएस स्वामीनाथन और पीवी नरसिम्हा राव के नाम की घोषणा से दक्षिण भारत के किसानों में सकारात्मक संदेश जाएगा। खेती खलिहानी से जुड़ी दोनों विभूतियों को इससे नवाजे जाने की घोषणा से पूरे देश में सकारात्मक राय मिलेगी। इसके साथ-साथ रालोद के प्रमुख चौधरी जयंत सिंह को भी एनडीए के साथ जाने के लिए नैतिक बहाना भी मिलेगा।