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Politics: 'क्या मोदी सरकार उस समझौते को स्वीकार रही जो LAC को बहाल नहीं करता'; चीन के साथ रिश्ते पर कांग्रेस

Sun, 08 Dec 2024 07:15 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 08 Dec 2024 07:15 PM IST
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Congress slams Centre over ties with China, asks if Modi govt is accepting settlement that doesn't restore LAC
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश। - फोटो : पीटीआई

कांग्रेस ने चीन के साथ संबंधों को लेकर केंद्र की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को केंद्र पर तंज कसते हुए कई सवाल पूछे। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या मोदी सरकार ऐसे समझौते को स्वीकार कर रही है जो एलएसी को बहाल नहीं करता है। इस दौरान उन्होंने संसद में चीन के मुद्दे पर बहस करने की विपक्ष की पुरानी मांग भी दोहराई। 

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कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट में केंद्र पर हमला किया। पोस्ट में पार्टी ने जयराम रमेश के हवाले से लिखा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने चीन के साथ भारत के संबंधों पर संसद में विदेश मंत्री के बयान का गंभीरतापूर्वक अध्ययन किया है। हमें विदेश मंत्री के बयान पर किसी भी तरह के स्पष्टीकरण की मांग नहीं रखने दी गई थी। संसद को चीन के साथ सीमा पर चुनौतियों से निपटने के सामूहिक संकल्प पर बात करने का मौका नहीं दिया गया। इसके साथ ही कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के सवालों के पन्ने भी पोस्ट किए गए। 
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सवालों में कांग्रेस नेता ने विपक्ष की मांग को दोहराया कि संसद को सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प को दर्शाने के लिए चीन के मुद्दे पर बहस करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बहस रणनीतिक और आर्थिक नीतियों दोनों पर केंद्रित होनी चाहिए, खासकर तब जब भारत की चीन पर आर्थिक निर्भरता बढ़ गई है।
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"चीन के साथ भारत के संबंधों में हालिया विकास" पर संसद के दोनों सदनों में विदेश मंत्री द्वारा दिए गए बयानों का हवाला देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पास मोदी सरकार से पूछने के लिए चार प्रश्न हैं। 

जयराम रमेश ने पहला सवाल पूछा, 'बयान में कहा गया कि "सदन उन परिस्थितियों से अच्छी तरह वाक़िफ़ है जिनके कारण जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई।" यह एक दुर्भाग्यपूर्ण रिमाइंडर है, क्योंकि इस गंभीर संकट पर देश का पहला आधिकारिक बयान 19 जून 2020 को तब आया जब प्रधानमंत्री ने चीन को क्लीन चिट दी थी और पूरी तरह से झूठ झूठ बोलते हुए कहा था: "न कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है।" यह न सिर्फ़ हमारे शहीद सैनिकों का अपमान था बल्कि इससे बाद की बातचीत में भारत की स्थिति भी कमज़ोर हुई। आख़िर वो कौन सी बात थी जिसने प्रधानमंत्री को यह बात जोर देकर बोलने के लिए मजबूर किया?'

वहीं, आगे उन्होंने कहा कि दूसरा सवाल है,  '22 अक्टूबर 2024 को सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने भारत की दीर्घकालिक स्थिति को दोहराया: "जहां तक हमारा सवाल है, हम अप्रैल 2020 की पूर्व की स्थिति पर वापस जाना चाहते हैं... उसके बाद हम सैनिकों की वापसी, तनाव कम करने और LAC के नॉर्मल मैनेजमेंट की बात करेंगे।" लेकिन, 5 दिसंबर 2024 को भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) की 32वीं बैठक के बाद विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि "दोनों पक्षों ने सबसे हालिया विघटन समझौते के कार्यान्वयन की सकारात्मक पुष्टि की है जो 2020 में उभरे मुद्दों का समाधान करने वाला है।" क्या इससे हमारे आधिकारिक पोजीशन में बदलाव का पता नहीं चलता?'

आगे बोलते हुए जयराम रमेश ने कहा कि संसद में विदेश मंत्री के बयान में कहा गया है कि "कुछ अन्य स्थानों पर जहां 2020 में टकराव हुआ था, वहां आगे ऐसी स्थिति को टालने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अस्थायी और सीमित तरीके के कदम उठाए गए हैं"। यह स्पष्ट रूप से तथाकथित "बफर जोन" को संदर्भित करता है जहां हमारे सैनिकों और पशुपालकों को पहले की तरह जाने से वंचित कर दिया गया है। इन बयानों को एक साथ मिलाकर देखें तो पता चलता है कि विदेश मंत्रालय एक ऐसे समझौते को स्वीकार कर रहा है जो सेना और राष्ट्र की इच्छानुसार वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को अप्रैल 2020 की पूर्व की स्थिति पर वापस नहीं लाता है। क्या मोदी सरकार अप्रैल 2020 से पहले के "ओल्ड नॉर्मल" को चीन द्वारा एकतरफा डिस्टर्ब किए जाने के बाद नई स्थिति पर सहमत हो गई है और "न्यू नॉर्मल" को मानने के लिए तैयार हो गई है?


चीन की सरकार ने अभी तक देपसांग और डेमचोक में सैनिकों की वापसी को लेकर किसी भी विवरण की पुष्टि क्यों नहीं की है? क्या भारत के पशुपालकों के लिए चराई के लिए उनके पहले जैसे अधिकार बहाल कर दिए गए हैं? क्या पारंपरिक गश्त बिंदुओं तक बिना रोक-टोक के पहुंच होगी? क्या पिछली वार्ता के दौरान छोड़े गए बफर जोन भारत ने वापस ले लिए हैं?

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