Census: कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- जनगणना में 23 महीने और देरी करने का कोई कारण नहीं
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनगणना में 23 और महीने की बेवजह देरी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार केवल सुर्खियां बटोरने में सक्षम है और तय समय पर काम पूरा नहीं करती है।
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केंद्र सरकार ने जनगणना का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद, बुधवार को कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि जनगणना में 23 महीने और देरी करने का कोई कारण नहीं है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार तय समय पर काम पूरा नहीं करती है।
गृह मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि अगली जनगणना 2027 में की जाएगी, जिसमें जाति जनगणना भी शामिल होगी। मंत्रालय ने बताया कि यह जनगणना दो चरणों में की जाएगी। मंत्रालय ने कहा कि लद्दाख जैसे बर्फीले इलाकों में 1 अक्तूबर 2026 को, और बाकी देश में 1 मार्च, 2027 की संदर्भ तिथि के साथ जनगणना की जाएगी।
मोदी सरकार केवल सुर्खियां बटोरने में सक्षम: रमेश
जनगणना के कार्यक्रम की घोषणा के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, '2021 में होने वाली जनगणना को 23 महीने के लिए टालने का कोई कारण नहीं है। मोदी सरकार केवल सुर्खियां बटोरने में सक्षम है, समयसीमा को पूरा करने में नहीं।'
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दी विस्तृत जानकारी
गृह मंत्रालय बताया कि, 'जातियों की गणना के साथ-साथ दो चरणों में जनसंख्या जनगणना-2027 आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। जनसंख्या जनगणना-2027 के लिए संदर्भ तिथि मार्च, 2027 के पहले दिन 00:00 बजे होगी। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के गैर-समकालिक बर्फीले क्षेत्रों के लिए, संदर्भ तिथि अक्टूबर, 2026 के पहले दिन 00.00 बजे होगी। उपरोक्त संदर्भ तिथियों के साथ जनसंख्या जनगणना आयोजित करने के इरादे की अधिसूचना जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 3 के प्रावधान के अनुसार 16.06.2025 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी।'
पहली जनगणना 1872 और आखिरी 2011 में हुई थी
भारत में हर दस साल में जनगणना होती है। पहली जनगणना 1872 में हुई थी। 1947 में आजादी मिलने के बाद पहली जनगणना 1951 में हुई थी और आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, 2011 में भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ थी, जबकि लिंगानुपात 940 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष और साक्षरता दर 74.04 फीसदी था।
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देश में आखिरी बार कब हुई थी जातिगत जनगणना?
देश में जनगणना की शुरुआत 1881 में हुई थी। पहली बार हुई जनगणना में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी हुए थे। इसके बाद हर दस साल पर जनगणना होती रही। 1931 तक की जनगणना में हर बार जातिवार आंकड़े भी जारी किए गए। 1941 की जनगणना में जातिवार आंकड़े जुटाए गए थे, लेकिन इन्हें जारी नहीं किया गया। आजादी के बाद से हर बार की जनगणना में सरकार ने सिर्फ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के ही जाति आधारित आंकड़े जारी किए। अन्य जातियों के जातिवार आंकड़े 1931 के बाद कभी प्रकाशित नहीं किए गए।
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