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VBSA Bill: उच्च शिक्षा विधेयक पर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल, संघीय ढांचे के उल्लंघन का लगाया आरोप
Thu, 19 Mar 2026 02:14 PM IST
Nitin Gautam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Thu, 19 Mar 2026 02:14 PM IST
सार
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है और इस विधेयक को संघीय ढांचे के खिलाफ बताया है। साथ ही कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस विधेयक से उच्च शिक्षा संस्थानों की आर्थिक स्वायत्ता प्रभावित होगी। आइए जानते हैं कांग्रेस ने और क्या-क्या आरोप लगाए हैं।
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कांग्रेस ने जताई चिंता
- फोटो : ANI Photos
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विस्तार
कांग्रेस ने गुरुवार को प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 को लेकर गंभीर चिंता जताई और आरोप लगाया कि यह संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन करता है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस विधेयक को लेकर सात प्रमुख आपत्तियां गिनाईं। जिनमें राज्यों से परामर्श न करना, संवैधानिक अतिक्रमण, फंडिंग काउंसिल का अभाव, उच्च शिक्षा का बढ़ता नौकरशाहीकरण और यूजीसी की परामर्श प्रक्रिया का कमजोर होना जैसे आरोप शामिल हैं।
'संघीय ढांचे के खिलाफ है ये विधेयक'
'उच्च शिक्षा में नौकरशाही का दखल बढ़ेगा'
'राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की स्वायत्ता प्रभावित होगी'
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'संघीय ढांचे के खिलाफ है ये विधेयक'
- कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा की पूरी संरचना को फिर से गढ़ने की कोशिश की जा रही है। यह विधेयक फिलहाल संसद की संयुक्त समिति के पास विचाराधीन है।
- जयराम रमेश ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग की स्थायी समिति की रिपोर्ट में यूजीसी और एआईसीटीई जैसे प्रमुख नियामक संस्थानों में बड़ी संख्या में रिक्तियां सामने आई हैं, जो चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय होने के बावजूद इस विधेयक के मसौदे में राज्य सरकारों से कोई परामर्श नहीं किया गया, जबकि इसका सीधा असर राज्य विश्वविद्यालयों पर पड़ेगा।
- कांग्रेस का कहना है कि यह विधेयक संविधान की सातवीं अनुसूची के संघ सूची के दायरे से आगे जाकर राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप करता है। पार्टी के अनुसार, विश्वविद्यालयों के गठन और संचालन से जुड़े विषय राज्य सूची में आते हैं, इसलिए यह विधेयक संघीय ढांचे के खिलाफ है।
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'उच्च शिक्षा में नौकरशाही का दखल बढ़ेगा'
- जयराम रमेश ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उच्च शिक्षा परिषद के चार स्तंभों की परिकल्पना की गई थी, जबकि इस विधेयक में केवल तीन काउंसिल का प्रस्ताव है और अनुदान देने वाली संस्था का प्रावधान नहीं है। उनका आरोप है कि इससे वित्तीय शक्तियां स्वायत्त शैक्षणिक निकायों से हटकर सीधे मंत्रालय के पास चली जाएंगी।
- कांग्रेस का कहना है कि वर्तमान में यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई का संचालन शिक्षाविदों द्वारा किया जाता है, लेकिन नए विधेयक में प्रशासनिक नियंत्रण नौकरशाहों के हाथ में देने का प्रस्ताव है, जो शिक्षा के लिए ठीक नहीं है।
'राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की स्वायत्ता प्रभावित होगी'
- कांग्रेस ने यह भी चिंता जताई कि इस विधेयक के तहत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान जैसे आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी, की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। हालांकि विधेयक में उनकी स्वायत्तता बनाए रखने की बात कही गई है, लेकिन इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं। कांग्रेस ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक नियामक संस्थाओं को अत्यधिक और अस्पष्ट अधिकार देता है, जिससे विश्वविद्यालयों के साथ परामर्श की वर्तमान व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
- कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि नए नियमों के तहत विश्वविद्यालयों को नए परिसर या कार्यक्रम शुरू करने के लिए अतिरिक्त अनुमतियां लेनी होंगी, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 संस्थानों को अधिक स्वायत्तता देने की वकालत करती है।