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Lok Sabha Eletion 2024: अग्निपथ पर कांग्रेस का सत्याग्रह, क्या इसी तरह 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी पार्टी?
Sun, 19 Jun 2022 07:48 PM IST
अमित शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित शर्मा
Updated Sun, 19 Jun 2022 07:48 PM IST
सार
सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना का पूरे देश के युवा विरोध कर रहे हैं। इन युवाओं का साथ देने के लिए कांग्रेस पार्टी ने रविवार को जंतर-मंतर पर सत्याग्रह का आयोजन किया, लेकिन जनता के आंदोलन की पहचान के तौर पर जानी जाने वाले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन केवल कांग्रेस के चंद नेताओं और उनके कुछ कार्यकर्ताओं का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन तक ही सिमट कर रह गया।
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Priyanka Gandhi
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
उदयपुर में आयोजित कांग्रेस के चिंतन शिविर से पार्टी ने यह निष्कर्ष निकाला था कि सत्ता में दोबारा वापसी के लिए उसे जमीनी लड़ाई लड़नी चाहिए। उसे जनता से, विशेषकर युवाओं से जुड़ने के लिए विशेष प्रयास करना चाहिए। चिंतन शिविर से निकली इस आवाज में पहली नजर में कुछ गंभीरता दिखाई पड़ी और माना गया कि शायद पार्टी ने अब यह महसूस किया है कि उसके लिए करो या मरो की स्थिति आ चुकी है। यदि उसने अब भी कुछ न किया तो उसके लिए बहुत देर हो जाएगी। लेकिन क्या सच में पार्टी इसके लिए गंभीर है? क्या उसके सलाहकार उसे जनता के करीब जाने दे रहे हैं?
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सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना का पूरे देश के युवा विरोध कर रहे हैं। इन युवाओं का साथ देने के लिए कांग्रेस पार्टी ने रविवार को जंतर-मंतर पर सत्याग्रह का आयोजन किया, लेकिन जनता के आंदोलन की पहचान के तौर पर जानी जाने वाले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन केवल कांग्रेस के चंद नेताओं और उनके कुछ कार्यकर्ताओं का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन तक ही सिमट कर रह गया। इस प्रदर्शन में उन्हीं लोगों को शामिल नहीं होने दिया गया, जिनका साथ देने के लिए कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन को आयोजित किया था।
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‘अग्निवीरों’ से ही दूरी
गाजियाबाद के धीरज शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि वे तीन सालों से सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। सेना में भर्ती की नई नीति आने के बाद उनका भविष्य अंधेरे में पड़ गया है। यदि इस साल की अग्निपथ योजना में उनकी भर्ती हो भी जाती है तो चार सालों के बाद वे आगे क्या करेंगे। कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से उनके जैसे दर्जनों युवाओं में यह उम्मीद बंधी थी कि कांग्रेस का साथ मिलने से शायद उनकी बात मान ली जाए। लेकिन यहां आने पर मुख्य प्रदर्शन स्थल पर उन्हें जाने ही नहीं दिया गया। उनके साथ करीब 20 छात्र कांग्रेस के सत्याग्रह स्थल तक पहुंच भी नहीं सके।
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इन युवाओं की उम्मीद थी कि राहुल गांधी या प्रियंका गांधी उनसे स्वयं मुलाकात करेंगे और उनकी बात सुनेंगे। लेकिन इन छात्रों का आरोप है कि नेताओं की बात तो छोड़ दीजिए, उनकी बात सुनने वाला कांग्रेस का कोई कार्यकर्ता तक उनके पास नहीं आया, जबकि इन छात्रों से महज 50 मीटर दूर कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रियंका गांधी के आगे-पीछे अपनी हाजिरी लगाने में व्यस्त थे। यह हाल तब था जबकि कांग्रेस पार्टी को दुबारा अपने पैरों पर खड़ी होने के लिए इन्हीं युवाओं का सहारा उसको चाहिए।
दूर नहीं हो पा रही पार्टी की यह कमजोरी
यह हाल केवल इन युवाओं का ही नहीं था। पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर पर पहुंचे थे, लेकिन ‘कड़ी सेक्योरिटी’ के नाम पर उन्हें भी सत्याग्रह में शामिल होने का अवसर नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश से आने वाले इन कार्यकर्ताओं में से एक ने अमर उजाला से कहा कि पार्टी के चंद नेता गांधी परिवार के आसपास दूसरों को फटकने नहीं देते हैं। वे गांधी परिवार से मिलकर उन्हें अपनी बात समझाने में ‘कामयाब’ रहते हैं।
इस समय जबकि पार्टी नेताओं को जनता के बीच रहकर सड़क पर प्रदर्शन करना चाहिए, पार्टी सांकेतिक सत्याग्रह कर रही है जिसमें न कार्यकर्ता शामिल हैं, और न ही वे युवा जिनके लिए पार्टी यह आयोजन कर रही है। ऐसे में पार्टी का भविष्य क्या होगा, कहा नहीं जा सकता।