Manmohan Singh: मनमोहन सिंह के अस्थि विसर्जन पर नहीं पहुंचा गांधी परिवार; BJP ने घेरा तो कांग्रेस ने दी सफाई
पूर्व मनमोहन सिंह के निधन के बाद से लगातार सियासी गलियारे में हलचल है। पहले उनके स्मारक पर अब उनकी अस्थियों से जुड़े मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।
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पूर्व मनमोहन सिंह के निधन के बाद से लगातार राजनीति जारी है। पहले उनके स्मारक को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। अब उनकी अस्थियों से जुड़े मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। दरअसल, डॉ. मनमोहन सिंह की अस्थियां उनके परिवार के सदस्यों ने सिख रीति-रिवाजों के अनुसार मजनू का टीला गुरुद्वारे के निकट यमुना नदी में विसर्जित कीं। इस दौरान गांधी परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा। इसी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। हालांकि, अब सबसे पुरानी पार्टी के नेता ने सफाई दी है।
कांग्रेस ने दी ये सफाई
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि परिवार की निजता का सम्मान करते हुए पार्टी का कोई भी वरिष्ठ नेता डॉ. सिंह की अस्थियों को इकट्ठा और विसर्जित करने के लिए परिवार के साथ नहीं गया था। उन्होंने कहा कि हमारे प्रिय नेता के अंतिम संस्कार के बाद वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा उनके निवास पर परिवार से मुलाकात करने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा, 'उनसे चर्चा करने के बाद यह महसूस किया गया कि चूंकि अंतिम संस्कार के समय परिवार को कोई निजता नहीं मिली और परिवार के कुछ सदस्य चिता स्थल पर नहीं पहुंच पाए थे, इसलिए उन्हें फूल चुनने और अस्थियों के विसर्जन के लिए कुछ निजता देना उचित होगा जो कि करीबी परिवार के सदस्यों के लिए भावनात्मक रूप से पीड़ादायक और कठिन समय होता है।'
26 दिसंबर को हुआ था निधन
मनमोहन सिंह का गत 26 दिसंबर की रात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। वह 92 वर्ष के थे। 28 दिसंबर को उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के निगमबोध घाट पर किया गया था। बता दें कि डॉ. सिंह की अस्थियां के विसर्जन के दौरान कांग्रेस नेता नदारद रहे थे। इसको लेकर भाजपा के कई नेताओं ने तंज कसा था।
भाजपा का यह है आरोप
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा था, 'यह देखकर बहुत दुख हुआ कि डॉ. मनमोहन सिंह जी की अस्थियां विसर्जित किए जाने के समय कांग्रेस या गांधी परिवार का एक भी सदस्य मौजूद नहीं था। मीडिया का ध्यान खींचने और राजनीति करने के लिए कांग्रेस मौजूद थी, लेकिन जब उन्हें सम्मान देने की बात आई तो वे नदारद हो गए। वाकई शर्मनाक है।'
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