कांग्रेस शासित प्रदेशों को पार्टी का निर्देश, नए कृषि कानूनों के खिलाफ पारित कराएं बिल
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कांग्रेस ने कृषि कानूनों के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारों से कहा है कि वे अपने यहां अनुच्छेद 254(2) के तहत बिल पास करने पर विचार करें जो केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि विधेयकों को निष्क्रिय करता हो।
वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सलाह दी है कि कांग्रेस शासित राज्यों को अपने यहां केंद्र की ओर से पारित कराए गए कृषि संबंधी कानूनों को निष्क्रिय करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 254(2) का इस्तेमाल करने पर विचार करना चाहिए।
संविधान का यह अनुच्छेद राज्य विधानसभाओं को राज्य के अधिकार क्षेत्र पर अतिक्रमण करने वाले केंद्रीय कानूनों को नकारने के लिए एक कानून पारित करने की अनुमति देता है।
वेणुगोपाल ने कहा कि इससे कांग्रेस शासित राज्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और एपीएमसी के विघटन समेत तीन कठोर कृषि कानूनों को दरकिनार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को मोदी सरकार और भाजपा द्वारा किए गए घोर अन्याय से भी निजात मिलेगी।
बता दें कि हाल ही में संपन्न संसद के मानसून सत्र में संसद ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को इन विधेयकों को मंजूरी प्रदान कर दी जिसके बाद ये कानून बन गए।
कृषि कानून किसानों के लिए मौत का फरमान : राहुल गांधी
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि संबंधी कानूनों को लेकर सोमवार को सरकार पर फिर निशाना साधा। गांधी ने आरोप लगाया कि किसानों की आवाज को संसद और बाहर दोनों जगह दबाया गया।
उन्होंने एक ट्वीट में कहा, 'कृषि संबंधी कानून हमारे किसानों के लिए मौत का फरमान हैं। उनकी आवाज संसद और बाहर दोनों जगह दबाई गई। यहां इस बात का सबूत है कि भारत में लोकतंत्र खत्म हो गया है।'
ओडिशा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
कांग्रेस की ओडिशा इकाई ने सोमवार को हाल ही में पारित किए गए कृषि विधेयकों को निरस्त करने की मांग को लेकर राजभवन के पास प्रदर्शन किया। ये विधेयक पहले संसद में पारित किए गए थे, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों और राजनीतिक दलों द्वारा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।
कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस के इस प्रदर्शन में राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष जयदेव जेना और पूर्व सांसद प्रदीप माझी सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भाग लिया। उन्होंने केंद्र पर किसान विरोधी नीति अपनाने का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारी तख्तियां और बैनर पकड़कर राजभवन के पास जमा हो गए और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विधेयक वापस लेने की मांग की। पीसीसी के पूर्व प्रमुख जयदेव जेना ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों ने स्वेच्छा से विरोध प्रदर्शन के साथ खुद को जोड़ रखा है।
उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र विधेयकों को वापस नहीं लेता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा,‘ये विधेयक हरित क्रांति को बर्बाद करने के लिए एक साजिश का हिस्सा हैं और किसानों और कृषि को नष्ट कर मुट्ठी भर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाएंगे।’