कांग्रेस ने गुजरात के चर्चित वेंटिलेटर पर उठाए सवाल, कहा- बिना ट्रायल के राज्य सरकार ने अपनाया
- पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने लगाए आरोप
- रमेश भाई विरानी ने ही दिया था पीएम को चर्चित सूट
- 46.76 फीसदी शेयर वाली कंपनी को गुजरात सरकार ने दिया मोटा फायदा
- कोविड-19 के बाबत कंपनी का प्रोडक्ट नतीजे में फेल
विस्तार
कांग्रेस का कहना है क़ि रमेश भाई विरानी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सूट तोहफे में दिया था। दिलचस्प बात यह है कि इस कंपनी के प्रोडक्ट धमन-1 को मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शानदार वेंटिलेटर कहा, जबकि यह एक आर्टिफिशियल मैनुअल ब्रीदिंग यूनिट (बैग) है। बताते हैं इस प्रोडक्ट के नतीजे सही नहीं पाए गए।
इतना ही नहीं बिना सही ट्रायल और परिणाम और अनुमोदन प्रक्रिया के पूरा हुए गुजरात सरकार ने इसे अपना भी लिया।
मुख्यमंत्री बोले, दस दिन में बनाया वेंटिलेटर
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के मुताबिक यह भी घटना एक घोटाले की तरफ इशारा कर रही है। खेड़ा के अनुसार चार अप्रैल को गुजरात के मुख्यमंत्री धमन-1 मशीन के उद्घाटन और सिविल अस्पताल को इसकी 1000 यूनिट देने के लिए गांधीनगर से अहमदाबाद आए।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री इस वेंटिलेटर को दस दिन से कम समय में तैयार करने के लिए अपने करीबी मित्र पराक्रम सिंह जडेजा और ज्योति सीएनसी नामक कंपनी की जमकर तारीफ करते हैं। खेड़ा का कहना है कि जबकि यह वैंटिलेटर है ही नहीं।
गुजरात के प्रचार से प्रभावित हुई कई राज्य सरकारें
खेड़ा के मुताबिक अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ने अपने एनेस्थेसिया विभाग की रिपोर्ट पर उसे अनुपयोगी बताकर वेंटिलेटर देने की मांग की है। लेकिन गुजरात सरकार ने इसे वेंटिलेटर के तौर पर प्रचारित करने के कारण कई राज्यों की सरकार ने इसमें रुचि दिखाई।
इतना ही नहीं भारत सरकार की कंपनी एचएलएल लाइफ केयर ने भी ज्योति सीएनसी को 5000 धमन-1 मशीन देने का ऑर्डर कर दिया है। यह सभी ऑर्डर कोविड-19 के संक्रमण को लेकर हुए और मशीन कोविड-19 संक्रमितों के इलाज में बिल्कुल कारगर नहीं है।
जब यह सच्चाई सामने आनी शुरू हुई तो राज्य सरकारों ने आर्डर कैंसिल करना आरंभ कर दिया। अब राज्य की प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) जयंती रवि को इसके बचाव में प्रेसवार्ता करनी पड़ रही है।
चौंकाने वाली बात
ज्योति सीएनसी के सीएमडी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के मित्र पराक्रम सिंह जडेजा हैं। इस कंपनी का 74,02,750 शेयर एकनाथ इंफ्राकॉन एलएलपी के पास है। जबकि 60 लाख आठ हजार (46.76 फीसदी) शेयर रमेश भाई विरानी के पास है।
धमन-1 को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी नहीं मिली है। इतना ही नहीं अब यह भी खुलासा हो रहा है कि इसे केवल मरीज पर परीक्षण करके ही मुख्यमंत्री के स्तर से मान्यता दे दी गई।