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Congress President: क्या जी-23 से भी बड़ा विरोधी खेमा बनेगा! राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद बढ़ी आशंका
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मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव सोमवार (17 अक्तूबर) को होगा। इस चुनाव में हिस्सेदारी लेने वाले कांग्रेस के नेताओं को मल्लिकार्जुन खरगे या शशि थरूर में से किसी एक को चुनना होगा। जीत किसकी होगी, यह तो बुधवार को पता चलेगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं इस बात की शुरू हो गई है कि कहीं ऐसा तो नहीं इस चुनाव के बाद कांग्रेस में ही जी-23 से बड़ा विरोधी खेमा खड़ा हो जाए। ऐसा दावा चुनावों से पहले बड़े हिस्से में बंटे राजनैतिक नेताओं की खेमेबाजी के चलते किया जा रहा है। हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष के होने वाले चुनावों से पहले दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस के विरोधियों का यह बड़ा खेमा तरीके से समाप्त हो चुका है।
दरसल पार्टी के होने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनावों में जिस तरीके से पार्टी के नेता शशि थरूर का दर्द उभर कर सामने आया है उसे इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस में अब विरोधियों का एक नया धड़ा सामने आएगा। दरअसल इसके पीछे की प्रमुख वजह बताते हुए कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने ही ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि इस चुनाव में शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खरगे के समर्थकों के बीच में बड़ी खाई दिखने लगी है। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर कांग्रेस पार्टी ने अपने विरोधी नेताओं के धड़े को खत्म करते हुए कांग्रेस के नेता मलिकार्जुन खरगे के नामांकन में उनको प्रस्तावक और समर्थक बनवाया। उनका आरोप है कि पार्टी ने नाराज धड़े को खत्म करने के लिए कदम तो ठीक उठाया लेकिन शशि थरूर के साथ उस तरीके का व्यवहार पार्टी की ओर से नहीं किया गया जिसकी उम्मीद की जा रही थी। पार्टी से जुड़े एक नेता का कहना है कि तय यही हुआ था कि लोकतांत्रिक तरीके से हो रहे चुनावों में पार्टी न्यूट्रल रहकर दोनों नेताओं को सभी जरूरी चीजें उपलब्ध कराएगी जिससे पार्टी आसानी से अपना चुनाव प्रचार कर सकें। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
कांग्रेस पार्टी से ही जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि शशि थरूर ने जब यह कहा कि वह वोट मांगने के लिए जब अलग-अलग राज्यों की पार्टी मुख्यालय में जाते हैं तो वहां पर उनको वह न्यूट्रल सपोर्ट नहीं मिलता है जिसका दावा किया जा रहा था। तो इसका मतलब स्पष्ट होता है कि पार्टी खुद नहीं चाहती थी कि शशि थरूर मजबूती के साथ चुनावी मैदान में पहुंचते। वो कहते हैं कि शशि थरूर ने इस बात का भी आरोप लगाया कि उनके पास जो डेलिगेट्स की लिस्ट पहुंची थी उसमें उनके सही मोबाइल नंबर तक नहीं दिए गए थे। वो कहते हैं कि इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी शुरुआत से ही एक नेता को सपोर्ट कर रही है और दूसरे नेता को सपोर्ट नहीं कर रही है। शशि थरूर के एक समर्थक और पार्टी के बड़े नेता कहते हैं कि ऐसा करके कांग्रेस नाराज नेताओं का एक ग्रुप तो खत्म कर रही है लेकिन साथ ही साथ दूसरा धड़ा तैयार कर रही है।
शशि थरूर के साथ हो रहे इस व्यवहार को लेकर उनके ही समर्थक नाराजगी जता रहे हैं। इसी नाराजगी के साथ राजनीति गलियारों में चर्चा इस बात की भी हो रही है कि इस चुनाव के बाद कांग्रेस में एक दूसरा विरोधी धड़ा तैयार हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस को राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनावों में इस बात का निश्चित तौर पर यह ख्याल तो रखना ही चाहिए था कि दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच में कोई मनमुटाव ना हो। वह कहते हैं कि जिस तरीके से शशी थरूर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के आरोप लगाए वह दूरियों को कम करने की वजह दूरियों को बढ़ाते हैं। शर्मा कहते हैं कि चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और कांग्रेस ने पार्टी के भीतर चुनाव कराकर एक बेहतर नजीर भी पेश की है। लेकिन चुनाव लड़ने वाले नेताओं के बीच में इस तरीके के सवाल उठना की उनको दी गई लिस्ट गलत है या पार्टी कार्यालय पर पहुंचने पर जिम्मेदार नेताओं का ना मिलना तमाम तरीके की गलतफहमियां और विरोध की खाई को बढ़ाता है। वो कहते हैं कि विरोध ऐसे ही बढ़ता है और नाराज धड़े कहीं भी हो खड़े हो जाते हैं। कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चुनाव में जीत हार किसी की भी हो लेकिन एक बात तो तय है कि शशि थरूर को पसंद करने वालों का अपना ही समूह कांग्रेस में है। जिसमें छोटे कार्यकर्ता से लेकर कद्दावर नेता तक शामिल है। ऐसे में अगर यह संदेश इन लोगों के बीच में जाता है कि पार्टी उनको मदद नहीं कर रही है तो आप एक नेताओं का नाराज धड़ा भले ही खत्म कर दे लेकिन दूसरा धड़ा तो अपने आप खड़ा हो जाएगा।