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मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली में एकजुट हुआ विपक्ष, आर्थिक मंदी और बेरोजगारी को लेकर बैठक की
Mon, 04 Nov 2019 04:43 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Mon, 04 Nov 2019 04:43 PM IST
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विपक्ष की बैठक
- फोटो : ANI
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मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली में विपक्ष एकजुट हुआ है। विपक्षी नेताओं ने सोमवार को आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते को लेकर बैठक की। बैठक में कांग्रेस नेताओं के अलावा रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और शरद यादव समेत कई नेता शामिल हुए।
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विपक्ष की बैठक के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आज की बैठक में 13 समान विचारधारा वाले दल शामिल हुए। बैठक में बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक स्थिति और कृषि संकट सहित कई विषयों पर चर्चा की गई।
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Delhi: Opposition leaders met today over issues of economic slowdown, unemployment and the proposed Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP) agreement. pic.twitter.com/GlivZq9uyX
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 4, 2019
कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ देशभर में पांच से 15 नवंबर के बीच आंदोलन करने का एलान किया है। कांग्रेस ने आंदोलन की तैयारियों को लेकर बैठक की थी। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की। सोनिया गांधी ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला था।
पार्टी महासचिवों और प्रभारियों की बैठक में सोनिया ने कहा था, सरकार इसके माध्यम से पहले ही बुरी स्थिति का सामना कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचाने की तैयारी में है। गंभीर मंदी को स्वीकारने और समग्र समाधान तलाशने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी सुर्खियां बटोरने और आयोजनों में व्यस्त हैं।
सोनिया ने कहा था कि मोदी सरकार के कई फैसलों से अर्थव्यवस्था को कम नुकसान नहीं हुआ था कि अब वह आरसीईपी के माध्यम से बड़ा नुकसान पहुंचाने की तैयारी में है। इससे हमारे किसानों, दुकानदारों, छोटे एवं मझले इकाइयों पर गंभीर दुष्परिणाम होंगे।
सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि जीडीपी की वृद्धि पहली तिमाही में केवल पांच फीसदी है। बेरोजगारी का 8.5 फासदी स्तर परेशान करने वाला है। मोदी सरकार के नोटबंदी, जीएसटी और आर्थिक फैसलों के परिणामस्वरूप पिछले छह सालों में 90 लाख लोगों की नौकरियां चली गईं।