Maharashtra Assembly: पहले दिन ही सदन नहीं पहुंचे NCP के कई विधायक, कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ लगाए नारे
महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र आज शुरू हो गया। सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी के विधायकों ने महाराष्ट्र विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
विस्तार
महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया। तीन हफ्ते का सत्र चार अगस्त तक नरीमन पॉइंट स्थित विधान भवन परिसर में आयोजित होगा। मानसून सत्र में पहले दिन ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 53 में से 27 विधायक शामिल नहीं हुए। बता दें, एनसीपी के एक विधायक, नवाब मलिक वर्तमान में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं, महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी कांग्रेस और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के विधायकों ने सोमवार को राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और उस पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया।
सत्ता पक्ष के यह लोग शामिल
सत्र में भाग लेने वाले 24 एनसीपी विधायकों में से उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल, दिलीप वालसे पाटिल, हसन मुश्रीफ, अदिति तटकरे, संजय बनसोडे, धनंजय मुंडे, अनिल पाटिल और धर्मराव अत्राम सत्ता पक्ष में बैठे थे। इनके अलावा अजित पवार को अपना समर्थन देने वाले बबनराव शिंदे, इंद्रनील नाइक, प्रकाश सोलंखे, किरण लाहमाते, सुनील शेल्के और सरोज अहिरे ने भी मानसून सत्र में भाग लिया।
विपक्ष की ओर से यह रहे उपस्थित
विपक्ष की ओर से एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल (शरद पवार खेमे से), विधायक बालासाहेब पाटिल, प्राजक्त तनपुरे, सुनील भुसारा, मानसिंग पवार, सुमन पाटिल, रोहित पवार, राजेश टोपे, अशोक पवार और अनिल देशमुख मौजूद थे।
शरद पवार वाली एनसीपी के नेता की ये मांग
विशेष रूप से, एनसीपी (शरद पवार खेमे) के मुख्य सचेतक जितेंद्र आव्हाड ने रविवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर सत्र के लिए अजीत पवार खेमे के सदस्यों और पार्टी के बाकी विधायकों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की।
पत्र में आव्हाड ने कहा कि अजित पवार सहित नौ विधायक, जो सरकार में शामिल हुए हैं उन्हें छोड़कर और सभी राकांपा विपक्ष का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि शपथ लेने वाले नौ विधायकों को छोड़कर अन्य के लिए बैठने की व्यवस्था अलग से की जानी चाहिए। राकांपा विपक्ष में है और हम विपक्ष में बैठना चाहते हैं।
एनसीपी को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं
महाराष्ट्र के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने हाल ही में कहा था कि एनसीपी के मामले में कौन सत्ता में है और कौन नहीं, इसके बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं है। उन्होंने कहा था कि इस बात पर बहुत विचार-विमर्श और बहस होगी कि कैसे तय किया जाए कि वास्तविक एनसीपी का प्रतिनिधित्व कौन करता है।
सरकार के खिलाफ नारे
सोमवार को पूर्व मंत्री यशोमति ठाकुर और मुंबई कांग्रेस प्रमुख वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में विधायक विधान भवन की सीढ़ियों पर एकत्र हुए। यहां इन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, महा विकास अघाड़ी के विधायकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) की ओर से केवल अंबादास दानवे मौजूद थे। जबकि विरोध-प्रदर्शन के दौरान शरद पवार के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) खेमे का कोई भी विधायक मौजूद नहीं था।
चाय पार्टी का बहिष्कार
वहीं, शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार समूह) सहित विपक्षी खेमे ने रविवार को राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार किया था। विधान परिषद में नेता विपक्ष अंबादास दानवे ने कहा था कि यह सरकार कलंकित है, असंवैधानिक है, दागी है, इसलिए इनके साथ चाय पीने में विपक्ष को कोई रुचि नहीं है।
दानवे ने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष पर दबाव बनाने और उन्हें सरकार में शामिल करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि हम महाराष्ट्र में लोकतंत्र की एक भयावह तस्वीर देख रहे हैं क्योंकि कई संवैधानिक मानदंडों की अवहेलना की जा रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री खुद अयोग्यता का सामना कर रहे हैं।