'पारदर्शी नहीं है चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति': मणिशंकर अय्यर ने सीईसी पर उठाए सवाल, काम के तरीके पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'शर्मनाक' बताते हुए उन्हें अब तक का सबसे खराब सीईसी करार दिया है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: पूर्व टीएमसी सांसद और अभिनेत्री कोयल मल्लिक भाजपा में शामिल, राज्यसभा की भी हैं उम्मीदवार
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर क्या कहा?
वे आगे कहते हैं, 'मुझे लगता है कि हाल तक चुनाव आयोग पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम कर रहा था। मुझे नहीं लगता कि किसी संवैधानिक संस्था को कानूनी तौर पर स्वतंत्र बनाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट को स्वतंत्र नहीं कहा जाता; वह एक संवैधानिक संस्था है। इसलिए, इसे संवैधानिक संस्था बनाकर आप अपने आप यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि यह स्वतंत्र होगी। लेकिन फिर इसमें गड़बड़ी की गई है। इन आयुक्तों और जजों की नियुक्ति का तरीका बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है।'
#WATCH | Srinagar, Jammu and Kashmir: Congress leader Mani Shankar Aiyar says, "I think the Chief Election Commissioner has behaved disgracefully, and his two Election Commissioners have not behaved properly because they have not endorsed publicly on television the 14 or 15 notes that they wrote. So, I really think this is the worst Election Commissioner we've ever had..." He adds, "I think the Election Commission was functioning totally autonomously all the time until very recently. I don't think it is necessary to statutorily make a constitutional body autonomous. The Supreme Court is not described as autonomous; it's a constitutional body. So, by making it a constitutional body, you automatically ensure that it will be autonomous. But then subversion has been done. The method by which these commissioners and judges are being appointed is not a transparent procedure at all." (04.10)
— ANI (@ANI) October 5, 2026
भारत की कूटनीति को क्या बताया?
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि हमें पाखंडी माना जा रहा है क्योंकि हम दुनिया को बताते हैं कि यह युद्ध का दौर नहीं है और फिर हम पाकिस्तान के साथ युद्ध करते हैं। हम कहते हैं कि कूटनीति और बातचीत होनी चाहिए। पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है जिसके साथ हमारी कोई कूटनीति या बातचीत नहीं है। हमने 'क्वाड' में शामिल होकर चीन को भी नाराज कर दिया है। अब तो अमेरिका भी कह रहा है कि 'क्वाड' का कोई महत्व नहीं है। तो यह किस तरह की कूटनीति है? इसका हमारी रणनीतिक स्वायत्तता से कोई लेना-देना नहीं है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर क्या बोले?
इसके पहले कांग्रेस नेता ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू करने की वकालत की थी। श्रीनगर में आयोजित पांचवे हल्ला बोल सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है, तो दोनों देशों के बीच बातचीत करने का साहस क्यों नहीं है।
ये भी पढ़ें: 'क्या महिलाओं के साथ ये बर्ताव उचित है?': महिला पत्रकारों के उत्पीड़न पर भड़कीं प्रियंका, पीएम से मांगा जवाब
सरकार को क्या सुझाव दिया?
अय्यर ने सुझाव दिया था कि दोनों देशों के बीच अटारी-वाघा सीमा पर भी बातचीत हो सकती है। उन्होंने कहा कि सीमा पर ही एक टेबल लगाकर दोनों देशों के प्रतिनिधि बातचीत कर सकते हैं जिससे कि संवाद के लिए किसी तीसरे पक्ष की जरूरत न पड़े। भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर अय्यर ने कहा कि अतीत के विवादों को लेकर लगातार बहस करना विदेश नीति नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी रचनात्मक समाधान तक पहुंचने का रास्ता बातचीत से ही निकलता है।