SIR: 'ईसी-भाजपा के बीच साझेदारी, भारत में बहुसंख्यक शासन लागू करना चाह रहे'; बिहार में घमासान पर सिब्बल का तंज
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। विभिन्न राजनैतिक दल केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग के साथ मिलकर भाजपा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वहां वोटरों की संख्या में गड़बड़ी कराना चाहती है, जिसका फायदा वो चुनाव में उठा सके।
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बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सियासी घमासान जारी है। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर भाजपा और चुनाव आयोग को घेरने में लगी हैं। इस बीच, राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल ने भी भाजपा को घेरा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि यह अभ्यास एक पायलट प्रोजेक्ट है। यह NRC को वापस लाने का एक और तरीका है। ऐसा करके वे भारत में बहुसंख्यक शासन लागू करना चाहते हैं। भाजपा और केंद्र की मोदी सरकार पर तंज कसते हुए सिब्बल ने कहा कि वे नहीं चाहते कि भारत में कोई और सत्ता में आए। महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए सिब्बल ने आरोप लगाया कि वहां उन्होंने वोटों की संख्या बढ़ाई और यहां वे इसे कम कर रहे हैं। मेरा आरोप है कि चुनाव आयोग और उनके (भाजपा) बीच साझेदारी है।
75% मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा हुए
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम तेज गति से आगे बढ़ रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक हर चार में से तीन मतदाताओं ने अपने गणना फॉर्म जमा करा दिए हैं। आयोग के मुताबिक बिहार में 7,89,69,844 (लगभग 7.90 करोड़) मतदाताओं में से 74.39% से अधिक ने अपने गणना प्रपत्र जमा कर दिए हैं जबकि इन प्रपत्रों को जमा करने की अंतिम तिथि से अभी 14 दिन शेष हैं।
SIR पर बिहार ही नहीं पूरे देश में छिड़ा है घमासान
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। विभिन्न राजनैतिक दल केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग के साथ मिलकर भाजपा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वहां वोटरों की संख्या में गड़बड़ी कराना चाहती है, जिसका फायदा वो चुनाव में उठा सके। इस प्रक्रिया के विरोध का आलम यह है कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कई सलाह देते हुए इस प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट का क्या है रुख
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर लगाई गई कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते गुरुवार को सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से कहा कि बिहार में चल रही विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को वैध मानकर विचार किया जाए। बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जयमाल्या बागची की पीठ ने इसे सांविधानिक दायित्व बताया और चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी की दलीलों को सुनने के बाद बिहार के सात करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए चल रही प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी थी।
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