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Congress PC: 'नीरव मोदी' टिप्पणी पर बोले अधीर रंजन, किसी को ठेस पहुंचाने की मंशा नहीं, जरूरत पड़ी तो जाएंगे SC

Sat, 12 Aug 2023 02:46 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 12 Aug 2023 02:46 PM IST
सार

चौधरी ने कहा, 'नीरव' का मतलब क्या है? मैं पहले दिन से कहता आ रहा हूं कि मैंने इसका इस्तेमाल किसी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि खुद को अभिव्यक्त करने के लिए किया था।

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Congress leader Adhir Ranjan Chowdhury on his suspension from Lok Sabha says if needed, I can approach SC
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी एआईसीसी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए। - फोटो : PTI

विस्तार

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में संसद के मानसून सत्र के समापन पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान कथित 'अनियंत्रित व्यवहार' को लेकर लोकसभा से निलंबित किए जाने पर चौधरी ने कहा कि उनकी टिप्पणी का इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह सदन में अपनी दलीलें स्पष्ट रूप से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

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चौधरी ने एक सवाल के जवाब में कहा, जरूरत पड़ी तो उच्च न्यायालय जा सकते हैं...विचार विमर्श कर रहे हैं। उनका यह भी कहना था, मुझे जब भी संसद की विशेषाधिकार समिति के पास बुलाया जाएगा, तो मैं जरूर जाऊंगा। हम लोग सभी नियमों और परंपराओं को मानकर चलते हैं। चौधरी ने कहा, ‘पहले फांसी दे दी गई और फिर मुकदमे का सामना करना है। अजीबोगरीब स्थिति है। 
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चौधरी ने कहा, 'नीरव' का मतलब क्या है? मैं पहले दिन से कहता आ रहा हूं कि मैंने इसका इस्तेमाल किसी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि खुद को अभिव्यक्त करने के लिए किया था। चौधरी ने लोकसभा से अपने निलंबन पर कहा, यह एक नई घटना है जिसे हमने संसद में अपने करियर में पहले कभी अनुभव नहीं किया है...यह विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सत्ता पक्ष द्वारा जानबूझकर की गई एक साजिश है... इससे संसदीय लोकतंत्र की भावना कमजोर होगी। कांग्रेस नेता ने संवाददाता सम्मेलन में पूछा, मेरा इरादा अपने तर्कों को स्पष्ट रूप से रखना और जो कुछ भी मेरे मन में आया उसे व्यक्त करना था। क्या यह गलत था?
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हो सकता है यह सरकार आगे भगवा शब्दकोश बना दे: चौधरी
कांग्रेस नेता ने कहा, मैंने सदन में जो बात कही उसमें मुझे गलती नहीं लगती। हो सकता है कि यह सरकार आगे भगवा शब्दकोश बना दे और तय करे कि विपक्ष के लोग कौन-कौन से शब्द का इस्तेमाल करेंगे। कांग्रेस नेता ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने जब दो घंटे तक मणिपुर का उल्लेख नहीं किया तो विपक्ष को सदन से बहिर्गमन करना पड़ा।

चौधरी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ तीन मिनट तक मणिपुर को लेकर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस सत्र में नियमों और संसदीय परंपराओं की धज्जियां उड़ाईं और अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा किए जाने के बाद भी कई विधेयक पारित करवा लिए गए।


 

 

मणिपुर हिंसा को लेकर विपक्ष द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना भगोड़े कारोबारी 'नीरव मोदी' और धृतराष्ट्र से की थी। हालांकि, भारी आक्रोश के बाद इन टिप्पणियों को हटा दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव को लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद चौधरी को निलंबित कर दिया गया था। वह तब तक निलंबित रहेंगे जब तक विशेषाधिकार समिति इस मामले पर अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती।

ये भी पढ़ें:- Rajya Sabha: मल्लिकार्जुन खरगे ने 'नीरव मोदी' टिप्पणी पर राज्यसभा में अधीर रंजन का किया बचाव, जानें क्या कहा



इस बीच, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि चौधरी का निलंबन ''कमजोर आधार'' पर किया गया है। उनका बचाव करते हुए खगे ने दावा किया कि चौधरी ने केवल "नीरव मोदी" कहा था और नीरव का अर्थ "शांत" होता है।

कांग्रेस ने अदाणी मामले को लेकर पीएम की चुप्पी पर फिर उठाया सवाल
कांग्रेस ने शनिवार को उम्मीद जताई कि अदाणा पर सेबी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ समिति द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देगी।  पार्टी ने हैरानी जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेंगे। शीर्ष अदालत ने मई में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को अदाणी समूह द्वारा शेयर कीमतों में हेरफेर के आरोपों की जांच पूरी करने के लिए 14 अगस्त तक का समय दिया था।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने डेलॉयट हास्किंस एंड सेल्स द्वारा अदाणी पोर्ट्स एंड सेज के ऑडिटर का पद छोड़ने की घोषणा का हवाला देते हुए कहा, 'जब सांविधिक लेखा परीक्षक बार-बार इस्तीफा देते हैं तो आप जानते हैं कि चीजें वैसी नहीं हैं जैसी कि उन्हें पेश किया जा रहा है।' अदानी मुद्दे पर उन्होंने ट्विटर पर कहा, प्रधानमंत्री चुप्पी तोड़ें।

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