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Rahul Gandhi: कांग्रेस को ऊपरी कोर्ट से राहुल के लिए राहत की उम्मीद, जानें कैसे कोर्ट से सड़क तक लड़ी जाएगी लड़ाई
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Rahul Gandhi
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विस्तार
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की संसद की सदस्यता रद्द कर दी गई है। वे 2019 में केरल की वायनाड सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। शुक्रवार 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए इस बात की जानकारी दी। सचिवालय ने घोषणा की कि साल 2019 में मानहानि के मामले में गुजरात की सूरत कोर्ट के दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब संसद के सदस्य नहीं रहे।
लोकसभा से नोटिफिकेशन जारी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राहुल गांधी का अगला कदम क्या होगा। वो कौन से रास्ते हैं जिससे राहुल गांधी इस मामले से बाहर आ सकते हैं। कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि दोषी ठहराए जाने के बाद कांग्रेस सांसद अयोग्य हो गए थे। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वो सजा को पलटवाने में कामयाब हो जाते हैं तो इस कार्रवाई को रोका जा सकता है।
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अमर उजाला से चर्चा में वरिष्ठ अधिवक्ता और मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा का कहना है कि ये मामला पूरी तरह से भाजपा की एक सोची समझी साजिश और प्लानिंग का हिस्सा है। भाजपा ने रणनीति बनाकर इस काम को अंजाम दिया है। 2019 में राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलार में एक रैली में भाषण दिया था। इसके बाद भाजपा ने अपने पूर्व मंत्री से राहुल गांधी के खिलाफ केस लगाया। जुलाई 2020 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सूरत कोर्ट में हाजिर हुए और अपना पक्ष रखा। इसके बाद तीन साल तक मामले में सुनवाई चलती रही। अचानक अभी कोर्ट ने सुनवाई पूरी की और राहुल को दोषी करार दे दिया। केस के मामले में जो परिस्थितियां नजर आ रही हैं। वह खुद ही अपनी कहानी बयां कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह केस कुछ दिन की बात है। कोर्ट ने जो फैसला दिया है उस पर कांग्रेस और कांग्रेस की विधि विभाग की टीम और पार्टी के सभी वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ आज शाम को चर्चा करेंगे। इसके बाद राहुल जी अपील फाइल करेंगे। कोर्ट में बताएंगे कि किन आधार पर यह फैसला गलत है। हमें पूरी उम्मीद है कि राहुल गांधी को कोर्ट से राहत मिल जाएंगी। निश्चित तौर पर ऊपरी अदालत से इस मामले में स्टे हो जाएंगा। केस को विधिवित रुप से पूरी ताकत के साथ कोर्ट में लड़ा जाएंगा। क्येांकि केस सड़क पर नहीं लड़े जाते है। लेकिन भाजपा सरकार और उसके आत्याचार के खिलाफ पूरी कांग्रेस पार्टी देशभर में सड़कों पर उतरेगी।
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लोकसभा सचिवालय द्वारा सदस्यता रद्द करने के सवाल पर वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद तन्खा का कहना है कि जिस कानून के जरिए सचिवालय किसी सांसद की सदस्यता रद्द करता है। अगर वह ऊपरी कोर्ट में वह रद्द हो जाता है या खत्म हो जाता है तो ऐसे में पुरानी स्थिति बहाल करना होती है। हालांकि, लक्षद्वीप के सांसद केस में सांसद सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना अभी बाकी है।
राज्यसभा सांसद तन्खा कहते है कि भाजपा लोकतंत्र में कटुता लेकर आई हैं। यह कटुता राजनीतिक संवाद को खत्म कर रही है। यह लोग किसी भी स्तर पर संवाद नहीं चाहते है। पहले भी राजनीति में नेहरू जी, इंदिरा जी और राजीव जी पर तमाम प्रकार के आरोप लगाए जाते थे।लेकिन किसी भी नेता ने कोर्ट में मानहानि का केस दायर नहीं किया। आज भी भाजपा के नेता तीनों नेताओं पर आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी करने से बाज नहीं आते है। लेकिन आज तक गांधी परिवार या किसी अन्य ने कोई केस नहीं किया। राजीव जी पर बोर्फोस मामले से लेकर उनके परिवार पर निजी हमले होते आए लेकिन कभी उन्होंने कोई मनमानी का केस नहीं लगाया है।